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एसआईटी ने बालिका निकेतन जाकर दर्ज किए बयान

Tue, 23 Jan 2018 02:00 AM IST
Updated Tue, 23 Jan 2018 02:00 AM IST
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एसआईटी ने बालिका निकेतन जाकर दर्ज किए बयान
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून।
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बालिका निकेतन और शिशु सदन में अमानवीय व्यवहार के मामले की जांच को गठित एसआईटी अब तक आठ बालिकाओं समेत 13 लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है। यहां से जुड़ी सात शिकायतों में एसआईटी चार की जांच कर रही है। इनमें से एक मामला टिहरी तो दूसरा रायपुर थाने में विचाराधीन है। उधर तीन माह बाद में स्वास्थ्य विभाग एसआईटी में राजपत्रित महिला अधिकारी की नियुक्ति नहीं कर सका है।
गृह सचिव आनंद बर्द्धन ने समाज कल्याण विभाग के अपर सचिव रहे मनोज चंद्रन की गोपनीय रिपोर्ट के आधार पर तीन माह पहले बालिका निकेतन और शिशु सदन में बालिकाआें और बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार को लेकर एसआईटी से जांच कराने के आदेश दिए थे। पुलिस मुख्यालय ने एसआईटी के लिए सीओ डालनवाला जया बलूनी और इंस्पेक्टर नीलम रावत को नियुक्त कर दिया था। समाज कल्याण विभाग दो माह बाद चीफ प्रोबेशन अधिकारी वंदना सिंह का नाम दे पाया। जबकि स्वास्थ्य विभाग कई बार रिमांडर देने के बाद अभी तक अपने विभाग की तरफ से राजपत्रित महिला अधिकारी का नाम तक नहीं दे पाया है। इसी बीच अधिकारियों के निर्देश पर एसआईटी ने अपनी जांच पड़ताल शुरू कर दी। एसआईटी प्रभारी जया बलूनी ने चीफ प्रोबेशन अधिकारी वंदना सिंह, नेहरू कालोनी थाने की दारोगा आशा पंचम और अनीता नेगी के साथ बालिका और शिशु सदन पहुंचकर बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सूत्राें के मुताबिक अब आठ पीड़ित बालिकाओं समेत 13 लोगों के बयान दर्ज कर लिए है।
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सूत्राें के मुताबिक एसआईटी को दर्ज कराए बयानों में कई महिला कर्मचारियों ने एक दूसरे को आरोपित किया है। ऐसे में एसआईटी के सामने उनके बयानों को तस्दीक करने की चुनौती है। उस समय तैनात रहे कई कर्मचारियाें को यहां से हटा दिया गया था। एसआईटी अब उनके बारे में जानकारी जुटाने में लगी है। इस बारे में सीओ जया बलूनी से बात की गई तो उनका कहना था कि जांच चल रही अभी कुछ भी कहना मुमकिन नहीं है।
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