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जुगाड़ वाहन पलटने से दबा किशोर, मौत
Updated Tue, 04 Dec 2018 11:56 PM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, सुल्तानपुर
क्षेत्र के मोहम्मदपुर कुन्हारी निवासी एक किशोर की अपने ही जुगाड़ वाहन के नीचे दबकर मौत हो गई। किशोर जुगाड़ वाहन से बजरी-रेत आदि माल की ढुलाई का काम करता था। किशोर की मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया। जुगाड़ वाहन से किशोर की मौत के बाद परिवहन विभाग में भी हड़कंप मच गया।
मोहम्मदपुर कुन्हारी गांव निवासी सूफियान (15) पुत्र शमशेर जुगाड़ (स्कूटर के इंजन को काटकर बनाया गया वाहन) चलाता था। वह आसपास के निर्माणाधीन भवनों में दुकानों से सरिया, सीमेंट, रेत, बजरी और अन्य सामान ढोने का काम करता था। मंगलवार को किशोर जुगाड़ लेकर घर से सुल्तानपुर की ओर जा रहा था। सुल्तानपुर कस्बे के निकट पहुंचते ही जुगाड़ अनियंत्रित होकर पलट गया। इससे सूफियान भी वाहन के नीचे दब गया। बताया जा रहा है कि जुगाड़ से किशोर सिर के बल गिरा था। राहगीरों की सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। आसपास के लोगों ने किशोर को पास के ही एक निजी अस्पताल में पहुंचाया। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। किशोर की मौत की सूचना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। मृतक के परिजनों शव का पोस्टमार्टम न करने की पुलिस से मांग की। चौकी प्रभारी एनके बचकोटी ने बताया कि परिजनों को डीएम ने शव का पीएम न कराने की अनुमति नहीं मिल पाई। इस पर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं अभी मामले में कोई तहरीर नहीं आई। तहरीर आने पर मामले की जांच की जाएगी।
नहीं चेता परिवहन विभाग
शहर में और देहात में बढ़ रहे जुगाड़ वाहनों की संख्या से जहां शहर में जाम की स्थिति बन रही है, वहीं ये जुगाड़ वाहन लोगों की जान का दुश्मन बन रहा है। इन वाहनों के चलने से दोपहिया वाहन के चोरी होने की घटनाओं में भी इजाफा हो रहा है। ‘अमर उजाला’ की ओर से 23 नवंबर के अंक में ‘हाईवे से गलियों तक फैला जुगाड़ वाहनों का साम्राज्य’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी, लेकिन उसके बाद एआरटीओ प्रवर्तन रुड़की और हरिद्वार ने जुगाड़ वाहनों के खिलाफ कोई अभियान नहीं चलाया। जबकि ये जुगाड़ वाहन थाना, कोतवाली सहित एआरटीओ कार्यालय के आगे फर्राटा भरते हैं। खबर छपने के 12 दिन बाद घटना घट गई।
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शहर और देहात में जो भी जुगाड़ वाहन संचालित हो रहे हैं सारे नियम विरुद्ध चल रहे हैं, इन वाहनों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सघन अभियान चलाया जाएगा। शहर के सारे जुगाड़ वाहन बंद किए जाएंगे।
ज्योति शंकर मिश्रा, एआरटीओ (प्रवर्तन) रुड़की
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क्षेत्र के मोहम्मदपुर कुन्हारी निवासी एक किशोर की अपने ही जुगाड़ वाहन के नीचे दबकर मौत हो गई। किशोर जुगाड़ वाहन से बजरी-रेत आदि माल की ढुलाई का काम करता था। किशोर की मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया। जुगाड़ वाहन से किशोर की मौत के बाद परिवहन विभाग में भी हड़कंप मच गया।
मोहम्मदपुर कुन्हारी गांव निवासी सूफियान (15) पुत्र शमशेर जुगाड़ (स्कूटर के इंजन को काटकर बनाया गया वाहन) चलाता था। वह आसपास के निर्माणाधीन भवनों में दुकानों से सरिया, सीमेंट, रेत, बजरी और अन्य सामान ढोने का काम करता था। मंगलवार को किशोर जुगाड़ लेकर घर से सुल्तानपुर की ओर जा रहा था। सुल्तानपुर कस्बे के निकट पहुंचते ही जुगाड़ अनियंत्रित होकर पलट गया। इससे सूफियान भी वाहन के नीचे दब गया। बताया जा रहा है कि जुगाड़ से किशोर सिर के बल गिरा था। राहगीरों की सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। आसपास के लोगों ने किशोर को पास के ही एक निजी अस्पताल में पहुंचाया। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। किशोर की मौत की सूचना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। मृतक के परिजनों शव का पोस्टमार्टम न करने की पुलिस से मांग की। चौकी प्रभारी एनके बचकोटी ने बताया कि परिजनों को डीएम ने शव का पीएम न कराने की अनुमति नहीं मिल पाई। इस पर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं अभी मामले में कोई तहरीर नहीं आई। तहरीर आने पर मामले की जांच की जाएगी।
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नहीं चेता परिवहन विभाग
शहर में और देहात में बढ़ रहे जुगाड़ वाहनों की संख्या से जहां शहर में जाम की स्थिति बन रही है, वहीं ये जुगाड़ वाहन लोगों की जान का दुश्मन बन रहा है। इन वाहनों के चलने से दोपहिया वाहन के चोरी होने की घटनाओं में भी इजाफा हो रहा है। ‘अमर उजाला’ की ओर से 23 नवंबर के अंक में ‘हाईवे से गलियों तक फैला जुगाड़ वाहनों का साम्राज्य’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी, लेकिन उसके बाद एआरटीओ प्रवर्तन रुड़की और हरिद्वार ने जुगाड़ वाहनों के खिलाफ कोई अभियान नहीं चलाया। जबकि ये जुगाड़ वाहन थाना, कोतवाली सहित एआरटीओ कार्यालय के आगे फर्राटा भरते हैं। खबर छपने के 12 दिन बाद घटना घट गई।
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शहर और देहात में जो भी जुगाड़ वाहन संचालित हो रहे हैं सारे नियम विरुद्ध चल रहे हैं, इन वाहनों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सघन अभियान चलाया जाएगा। शहर के सारे जुगाड़ वाहन बंद किए जाएंगे।
ज्योति शंकर मिश्रा, एआरटीओ (प्रवर्तन) रुड़की