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टमाटर के बेहतर उत्पादन के तरीके बताए
Updated Sat, 13 Jan 2018 02:17 AM IST
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टमाटर के बेहतर उत्पादन के तरीके बताए
ब्यूरो/अमर उजाला
विकासनगर।
टमाटर के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से कालसी और चकराता विकासखंड के विभिन्न गांव में प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया।
तीन दिनों तक चले इस अभियान के दौरान काश्तकारों को टमाटर की इंडम-13407, अभिरंग, अभिनव, रक्षिता गोल्ड प्रजाति की जानकारी दी गई। केंद्र प्रभारी डॉ. एसएस सिंह ने कहा कि इन प्रजाति के बीज उत्पादन से काश्तकार एक बीघा से लगभग 50 क्विंटल फसल प्राप्त कर सकते हैं। इन प्रजाति में पछेती झुलसा रोग का प्रकोप भी बेहद कम होता है। उन्होंने रोग को कम करने के लिए काश्तकारों को करजेट फफूंदनाशक की दो ग्राम मात्रा एक लीटर पानी में घोल मिलाकर छिड़काव करने की सलाह दी। शिविर में एटी इंडिया संस्थान के कृपाराम भट्ट ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के दौरान 120 कृषक महिलाओं को टमाटर के बीज उपलब्ध कराए गए।
शिविर में लाखामंडल, धौरा, भटाड़, कुन्ना, मुनोग, पुड़िया, गोथान, कांडी, कांडोई, चामा, गाता, मौठी, क्वांसी, खारसी, गहरी, जोगियो, शड़ोग, बिजनाड़, दाबला, पोखरी, सीड़ी, बरकोटी, चुनोटी, मानवा, सावड़ा, सरना, बरौठा, रंगियो, तुना, बिरपा, मानुवा, बिजनू गांवों के काश्तकारों ने प्रतिभाग किया।
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ब्यूरो/अमर उजाला
विकासनगर।
टमाटर के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से कालसी और चकराता विकासखंड के विभिन्न गांव में प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया।
तीन दिनों तक चले इस अभियान के दौरान काश्तकारों को टमाटर की इंडम-13407, अभिरंग, अभिनव, रक्षिता गोल्ड प्रजाति की जानकारी दी गई। केंद्र प्रभारी डॉ. एसएस सिंह ने कहा कि इन प्रजाति के बीज उत्पादन से काश्तकार एक बीघा से लगभग 50 क्विंटल फसल प्राप्त कर सकते हैं। इन प्रजाति में पछेती झुलसा रोग का प्रकोप भी बेहद कम होता है। उन्होंने रोग को कम करने के लिए काश्तकारों को करजेट फफूंदनाशक की दो ग्राम मात्रा एक लीटर पानी में घोल मिलाकर छिड़काव करने की सलाह दी। शिविर में एटी इंडिया संस्थान के कृपाराम भट्ट ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के दौरान 120 कृषक महिलाओं को टमाटर के बीज उपलब्ध कराए गए।
शिविर में लाखामंडल, धौरा, भटाड़, कुन्ना, मुनोग, पुड़िया, गोथान, कांडी, कांडोई, चामा, गाता, मौठी, क्वांसी, खारसी, गहरी, जोगियो, शड़ोग, बिजनाड़, दाबला, पोखरी, सीड़ी, बरकोटी, चुनोटी, मानवा, सावड़ा, सरना, बरौठा, रंगियो, तुना, बिरपा, मानुवा, बिजनू गांवों के काश्तकारों ने प्रतिभाग किया।
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