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शिशु निकेतन में एसआईटी की जांच पूरी
Updated Thu, 07 Jun 2018 02:08 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
एसआईटी ने शिशु निकेतन में बच्चों के साथ हुई दुर्घटनाओं की जांच पूरी कर रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी है। चार साल पहले एक बच्ची के जलने के मामले में एसआईटी ने तत्कालीन अधीक्षिका व कार्यकारी अधीक्षिका के खिलाफ विभागीय जांच की संस्तुति की है। साथ ही प्रकरण में दर्ज दोनों मुकदमों में एसआईटी ने न्यायालय में आरोप-पत्र भी दाखिल कर दिए हैं। इसके अलावा दो माह की बच्ची की मौत के मामले में भी एसआईटी की रिपोर्ट में केयर टेकर के विरुद्ध विभागीय जांच को कहा गया है।
शिशु निकेतन में हुई दुर्घटनाओं के मामले में महिला एवं बाल आयोग ने जांच की थी। प्राथमिक जांच में सामने आया था कि सभी घटनाएं वहां मौजूद कर्मचारियों की लापरवाही के चलते हुई हैं। इसके बाद अक्तूबर 2017 में अपर सचिव समाज कल्याण विभाग मनोज चंद्रन ने पुलिस मुख्यालय को चिट्ठी लिखकर इसकी एसआईटी जांच की मांग की थी। इस पर अपर पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार के निर्देश पर डीएसपी जया बलूनी के नेतृत्व में एक जांच दल का गठन किया था। एसआईटी की जांच के दौरान शिशु निकेतन में हुई दो घटनाओं (एक बच्ची का जलना व एक की मौत) में तीन नवंबर 2017 को मुकदमे दर्ज किए गए थे।
पहले मामले के अनुसार 2014 में एक तीन वर्षीय बच्चे की केयर टेकर शांति की लापरवाही के कारण कमर जल गई थी। इस मामले में केयर टेकर शांति और फार्मासिस्ट हरिकिशन के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। जबकि, दूसरे मामले में दो माह के अक्षत की मौत में केयर टेकर सुशीला की लापरवाही सामने आने पर उसके खिलाफ भी जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। दोनों मामलों में एसआईटी ने न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिए हैं।
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बच्ची के इलाज में हुई लापरवाही
एसआईटी प्रभारी जया बलूनी ने बताया कि साल 2014 में तीन साल की मौली के साथ हुई घटना में तत्कालीन अधीक्षिका अंजना गुप्ता और कार्यकारी अधीक्षिका शशिकांता की लापरवाही भी सामने आई है। उन्होंने बताया कि जिस समय मौली की कमर जली उस समय अंजना गुप्ता छुट्टी पर थीं और शशिकांता के पास चार्ज था। मौली के जलने पर शशिकांता ने न तो इस बात का ध्यान दिया कि बच्ची कैसे जली और न ही उसके इलाज पर ही कोई गौर किया। दून अस्पताल से रेफर करने के बावजूद बच्ची को हायर सेंटर नहीं ले जाया गया था। इसके बाद जब अंजना गुप्ता ड्यूटी पर लौटीं तो उन्होंने भी इस मामले में ध्यान नहीं दिया। घटना के साढ़े तीन साल बाद जब बच्ची ज्यादा परेशान हुई तब उसका ऑपरेशन कराया गया। जबकि, चिकित्सकों ने घटना के समय ही ऑपरेशन की सलाह दी थी।
केयर टेकर के खिलाफ जांच की सिफारिश
साल 2016 में एक बच्ची शांभवी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। जांच के दौरान इसमें केयर टेकर रेवती की लापरवाही सामने आई है। लिहाजा एसआईटी ने रेवती के खिलाफ विभागीय जांच की संस्तुति की है।
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एसआईटी ने शिशु निकेतन में बच्चों के साथ हुई दुर्घटनाओं की जांच पूरी कर रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी है। चार साल पहले एक बच्ची के जलने के मामले में एसआईटी ने तत्कालीन अधीक्षिका व कार्यकारी अधीक्षिका के खिलाफ विभागीय जांच की संस्तुति की है। साथ ही प्रकरण में दर्ज दोनों मुकदमों में एसआईटी ने न्यायालय में आरोप-पत्र भी दाखिल कर दिए हैं। इसके अलावा दो माह की बच्ची की मौत के मामले में भी एसआईटी की रिपोर्ट में केयर टेकर के विरुद्ध विभागीय जांच को कहा गया है।
शिशु निकेतन में हुई दुर्घटनाओं के मामले में महिला एवं बाल आयोग ने जांच की थी। प्राथमिक जांच में सामने आया था कि सभी घटनाएं वहां मौजूद कर्मचारियों की लापरवाही के चलते हुई हैं। इसके बाद अक्तूबर 2017 में अपर सचिव समाज कल्याण विभाग मनोज चंद्रन ने पुलिस मुख्यालय को चिट्ठी लिखकर इसकी एसआईटी जांच की मांग की थी। इस पर अपर पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार के निर्देश पर डीएसपी जया बलूनी के नेतृत्व में एक जांच दल का गठन किया था। एसआईटी की जांच के दौरान शिशु निकेतन में हुई दो घटनाओं (एक बच्ची का जलना व एक की मौत) में तीन नवंबर 2017 को मुकदमे दर्ज किए गए थे।
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पहले मामले के अनुसार 2014 में एक तीन वर्षीय बच्चे की केयर टेकर शांति की लापरवाही के कारण कमर जल गई थी। इस मामले में केयर टेकर शांति और फार्मासिस्ट हरिकिशन के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। जबकि, दूसरे मामले में दो माह के अक्षत की मौत में केयर टेकर सुशीला की लापरवाही सामने आने पर उसके खिलाफ भी जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। दोनों मामलों में एसआईटी ने न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिए हैं।
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बच्ची के इलाज में हुई लापरवाही
एसआईटी प्रभारी जया बलूनी ने बताया कि साल 2014 में तीन साल की मौली के साथ हुई घटना में तत्कालीन अधीक्षिका अंजना गुप्ता और कार्यकारी अधीक्षिका शशिकांता की लापरवाही भी सामने आई है। उन्होंने बताया कि जिस समय मौली की कमर जली उस समय अंजना गुप्ता छुट्टी पर थीं और शशिकांता के पास चार्ज था। मौली के जलने पर शशिकांता ने न तो इस बात का ध्यान दिया कि बच्ची कैसे जली और न ही उसके इलाज पर ही कोई गौर किया। दून अस्पताल से रेफर करने के बावजूद बच्ची को हायर सेंटर नहीं ले जाया गया था। इसके बाद जब अंजना गुप्ता ड्यूटी पर लौटीं तो उन्होंने भी इस मामले में ध्यान नहीं दिया। घटना के साढ़े तीन साल बाद जब बच्ची ज्यादा परेशान हुई तब उसका ऑपरेशन कराया गया। जबकि, चिकित्सकों ने घटना के समय ही ऑपरेशन की सलाह दी थी।
केयर टेकर के खिलाफ जांच की सिफारिश
साल 2016 में एक बच्ची शांभवी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। जांच के दौरान इसमें केयर टेकर रेवती की लापरवाही सामने आई है। लिहाजा एसआईटी ने रेवती के खिलाफ विभागीय जांच की संस्तुति की है।