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सालभर से विभाग को गुमराह कर रहा था प्रबंधन
Updated Fri, 12 Oct 2018 01:44 AM IST
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सालभर से विभाग को गुमराह कर रहा था प्रबंधन
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। अपना घर आश्रम प्रबंधन एक व्यक्ति विशेष की हनक में चल रहा था। यही कारण है कि प्रबंधन ने आठ साल तक तो प्रशासन की आंखों में धूल झोंकी और अब एक साल से विभाग को गुमराह कर रहा था। सितंबर 2017 में रजिस्ट्रेशन का प्रोबेशन पीरियड खत्म होने के बाद विभाग रिमाइंडर पर रिमाइंडर भेजता रहा, लेकिन आश्रम प्रबंधन कोई न कोई बहाना बनाकर टालने में लगा रहा। नतीजतन, जब सरकार ने सख्ती की आश्रम सील हो गया।
दरअसल, अपना घर रजिस्टर्ड गैर सरकारी संस्था है। इस संस्था ने ही जोगीवाला स्थित अपना घर आश्रम का साल 2009 से संचालन शुरू किया था। आश्रम की शुरुआत एक प्रभुत्वधारी व्यक्ति की देखरेख में हुई। लिहाजा इसके रजिस्ट्रेशन पर जोर नहीं दिया गया। बावजूद इसके आश्रम में निराश्रित महिलाएं और बच्चे प्रवास करने लगे। इस बीच 2015 में किशोर न्याय संरक्षण अधिनियम लागू हुआ तो देश के आश्रमों और शेल्टर होम का रजिस्ट्रेशन जरूरी कर दिया गया। उस वक्त भी इस आश्रम का रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया। इसके बाद 2016 में स्थानीय प्रशासन ने आश्रम की जांच की तो पंजीकरण कराने के निर्देश दिए गए। इस पर आश्रम प्रबंधन की ओर से मार्च 2017 में पंजीकरण के लिए प्रोबेशन विभाग में आवेदन किया गया।
जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट ने बताया कि विभाग ने आश्रम का दौरा किया और उन्हें छह माह के लिए प्रोबेशन लाइसेंस देकर व्यवस्थाओं में सुधार लाने को कहा। उन्होेंने कुछ शर्तें रखी और उन्हें पूरा करने पर ही पंजीकरण करने की बात कही। छह माह बीत गए मगर न तो जरूरी शर्तों को पूरा किया गया और नही व्यवस्थाओं में सुधार हुआ। ऐसे में विभाग ने आश्रम का पंजीकरण करने से इंकार कर दिया। इसके बाद सितंबर 2017 से लगातार आश्रम को पंजीकरण कराने को विभाग रिमाइंडर भेज रहा था। बावजूद इसके आश्रम प्रबंधन ने इस पर गौर नहीं किया। कभी कुछ बहाना तो कभी उच्च स्तर पर बात करने का हवाला देते हुए विभाग को ही टालते रहे।
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बच्चों को आश्रय देने के लिए किया था आवेदन
आश्रम की ओर से आवेदन के वक्त कहा गया था कि यहां 10 वर्ष तक के बच्चों को आश्रय दिया जाएगा। मौके पर जब ऑडिट टीम गई तो पता चला कि यहां तीन वर्ष से 11 वर्ष तक के बच्चे रह रहे थे। यही नहीं, 10 महिलाओं को भी यहां रखा गया था। ऐसे में टीम ने इसे पूरी तरह से किशोर न्याय संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन मानते हुए कार्रवाई की।
सभी बच्चों को है संक्रमण
सोशल ऑडिट टीम ने पाया कि यहां रहने वाले सभी बच्चे त्वचा रोग से ग्रसित हैं। यह रोग संक्रामक रोग है। मौके पर गए चिकित्सकों ने बताया कि यह आश्रम में फैली गंदगी के कारण हुआ है। बच्चों को जरूरी चिकित्सा देकर दूसरे स्थानों पर शिफ्ट किया जा रहा है।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। अपना घर आश्रम प्रबंधन एक व्यक्ति विशेष की हनक में चल रहा था। यही कारण है कि प्रबंधन ने आठ साल तक तो प्रशासन की आंखों में धूल झोंकी और अब एक साल से विभाग को गुमराह कर रहा था। सितंबर 2017 में रजिस्ट्रेशन का प्रोबेशन पीरियड खत्म होने के बाद विभाग रिमाइंडर पर रिमाइंडर भेजता रहा, लेकिन आश्रम प्रबंधन कोई न कोई बहाना बनाकर टालने में लगा रहा। नतीजतन, जब सरकार ने सख्ती की आश्रम सील हो गया।
दरअसल, अपना घर रजिस्टर्ड गैर सरकारी संस्था है। इस संस्था ने ही जोगीवाला स्थित अपना घर आश्रम का साल 2009 से संचालन शुरू किया था। आश्रम की शुरुआत एक प्रभुत्वधारी व्यक्ति की देखरेख में हुई। लिहाजा इसके रजिस्ट्रेशन पर जोर नहीं दिया गया। बावजूद इसके आश्रम में निराश्रित महिलाएं और बच्चे प्रवास करने लगे। इस बीच 2015 में किशोर न्याय संरक्षण अधिनियम लागू हुआ तो देश के आश्रमों और शेल्टर होम का रजिस्ट्रेशन जरूरी कर दिया गया। उस वक्त भी इस आश्रम का रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया। इसके बाद 2016 में स्थानीय प्रशासन ने आश्रम की जांच की तो पंजीकरण कराने के निर्देश दिए गए। इस पर आश्रम प्रबंधन की ओर से मार्च 2017 में पंजीकरण के लिए प्रोबेशन विभाग में आवेदन किया गया।
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जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट ने बताया कि विभाग ने आश्रम का दौरा किया और उन्हें छह माह के लिए प्रोबेशन लाइसेंस देकर व्यवस्थाओं में सुधार लाने को कहा। उन्होेंने कुछ शर्तें रखी और उन्हें पूरा करने पर ही पंजीकरण करने की बात कही। छह माह बीत गए मगर न तो जरूरी शर्तों को पूरा किया गया और नही व्यवस्थाओं में सुधार हुआ। ऐसे में विभाग ने आश्रम का पंजीकरण करने से इंकार कर दिया। इसके बाद सितंबर 2017 से लगातार आश्रम को पंजीकरण कराने को विभाग रिमाइंडर भेज रहा था। बावजूद इसके आश्रम प्रबंधन ने इस पर गौर नहीं किया। कभी कुछ बहाना तो कभी उच्च स्तर पर बात करने का हवाला देते हुए विभाग को ही टालते रहे।
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बच्चों को आश्रय देने के लिए किया था आवेदन
आश्रम की ओर से आवेदन के वक्त कहा गया था कि यहां 10 वर्ष तक के बच्चों को आश्रय दिया जाएगा। मौके पर जब ऑडिट टीम गई तो पता चला कि यहां तीन वर्ष से 11 वर्ष तक के बच्चे रह रहे थे। यही नहीं, 10 महिलाओं को भी यहां रखा गया था। ऐसे में टीम ने इसे पूरी तरह से किशोर न्याय संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन मानते हुए कार्रवाई की।
सभी बच्चों को है संक्रमण
सोशल ऑडिट टीम ने पाया कि यहां रहने वाले सभी बच्चे त्वचा रोग से ग्रसित हैं। यह रोग संक्रामक रोग है। मौके पर गए चिकित्सकों ने बताया कि यह आश्रम में फैली गंदगी के कारण हुआ है। बच्चों को जरूरी चिकित्सा देकर दूसरे स्थानों पर शिफ्ट किया जा रहा है।