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पोर्नोग्राफी की जांच करेगी स्पेशल सेल
Updated Tue, 17 Jul 2018 02:32 AM IST
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पोर्नोग्राफी की जांच करेगी स्पेशल सेल
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। महिलाओं और बच्चों की अश्लील वीडियो व फोटो वायरल करने की जांच भी अब साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन करेगा। इसके लिए एक विशेष सेल का गठन किया गया है। केंद्र सरकार के निर्देश पर राज्य में इस तरह की यह पहली और अकेली सेल है। पूरे राज्य के लिए एसएसपी एसटीएफ को इसका नोडल अधिकारी बनाया गया है। यह सेल बच्चों और महिलाओं के संबंध में पोर्नोग्राफी की शिकायत पर प्राथमिक जांच कर संबंधित जिले के थानों को विवेचना में मदद भी करेगी।
पिछले कुछ समय में महिलाओं और बच्चों से संबंधित अश्लील वीडियो व फोटो सोशल मीडिया पर वायरल करने का चलन बढ़ा है। सोशल मीडिया का दायरा बढ़ने के बाद यह तेजी से फैल रहा है। इसी के मद्देनजर केंद्र सरकार ने प्रीवेंशन ऑफ साइबर क्राइम अगेंस्ट वुमन एंड चिल्ड्रन के तहत सभी राज्यों को विशेष सेल गठित करने के निर्देश दिए थे। एसएसपी (एसटीएफ) रिधिम अग्रवाल ने बताया कि एक जुलाई को साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में भी एक सेल बनाई गई है। इस सेल की प्रभारी महिला सब इंस्पेक्टर बनाई गई है। उन्होंने बताया कि इसके तहत यदि कोई भी शिकायत आती है तो सेल उसकी गंभीरता से जांच करेगी। इसी निगरानी उनके द्वारा की जाएगी। कुछ भी साक्ष्य मिलने के बाद संबंधित थाने में मुकदमा दर्ज किया जाएगा। इसके साथ ही इस मुकदमे के विवेचना अधिकारी को भी इस सेल का लगातार सहयोग मिलेगा। शिकायत के लिए एक नंबर भी उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने बताया कि फिलहाल 15 दिनों से इस तरह की कोई शिकायत सेल को नहीं मिली है।
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यहां कर सकते हैं शिकायत
महिलाओं और बच्चों से संबंधित पोर्नोग्राफी की शिकायत 0135-2655900 टेलीफोन नंबर पर की जा सकती है।
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सस्ता-ज्यादा इंटरनेट अपराध के उकसावे में कर रहा खाद का काम
- सस्ते इंटरनेट डाटा के चलते बढ़ रहा उपयोग
- नाबालिगों पर होता है ज्यादा प्रभाव, बन रहे अपराधी
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। मोबाइल कंपनियों का सस्ता-फ्री और ज्यादा से ज्यादा इंटरनेट डाटा अपराध के उकसावे में उत्प्रेरक की तरह काम कर रहा है। पुलिस अधिकारियों की माने तो सहसपुर थाना क्षेत्र में मोबाइल पर पोर्न फिल्म देखकर पांच नाबालिगों द्वारा बृहस्पतिवार को आठ साल की बच्ची के साथ दुराचार की घटना कुछ ऐसी ही घटना है। पुलिस अधिकारी चिंता जताते हैं कि आने वाले दिनों में अपराध के उकसावे को लेकर इंटरनेट बड़ी चुनौती बन कर उभरेगा। आए दिन इस तरह की घटना सामने आ रहीं है, जिनमें इंटरनेट अपराध के उत्प्रेरक के तौर पर काम कर रहा है।
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विशेषज्ञ मानते हैं कि इस समय विभिन्न टेलीकॉम कंपनियों की ओर जो सस्ता इंटरनेट डाटा उपलब्ध कराया जा रहा है, उससे ज्यादा से ज्यादा लोगों की पहुंच इंटरनेट तक हुई है। सन 2017 में हुए एक सर्वे के अनुसार भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल 2013 से 2017 के बीच 123 फीसदी तक बढ़ा है। इस डाटा में से बहुत बड़ा हिस्सा पोर्न साइट को देखने में इस्तेमाल होता है। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार पोर्न साइट पर खर्च डाटा 23 गुना तक बढ़ा है। समाज में इसका बुरा असर न पड़े इसके लिए पिछले साल केंद्र सरकार ने सैकड़ों पोर्न साइट्स प्रतिबंधित भी की थी।
बच्चों में बढ़ रही इस लत के बारे में मनोवैज्ञानिक वीना कृष्णनन बताती हैं कि 14 साल से कम उम्र में बच्चे का दिमाग इस अवस्था में होता है कि वह किसी भी चीज को बहुत जल्दी ग्रहण करता है। नकारात्मक और उत्तेजक घटनाक्रम उन्हें जल्दी अपने प्रभाव में लेते हैं। इंटरनेट पर सभी की निर्भरता बढ़ी है। घर से लेकर स्कूल तक में बच्चों को इंटरनेट से टास्क पूरा करने को कहा जाता है। इसी बीच वे इस तरह की साइटों को भी सर्च करने लग जाते हैं, जिनका उन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
एसएसपी एसटीएफ रिधिम अग्रवाल का कहना है कि वर्तमान में इंटरनेट डाटा की दरें काफी सस्ती हो गईं हैं। इसलिए हर तबके की पहुंच अब इंटरनेट तक हो गई है। इसी के चलते लोग कम समय में ज्यादा से ज्यादा सामग्री इंटरनेट पर खोज रहे हैं। इनमें कुछ अच्छी तो कुछ बुरी होती है। बुरी चीजों का बच्चों पर ज्यादा असर पड़ रहा है। डीआईजी गढ़वाल रेंज अजय रौतेला बताते हैं कि सस्ती और सुलभ इंटरनेट सेवा ने जहां लोगों का काम आसान किया है, वहीं उसके कुछ दुष्परिणाम भी हैं। बच्चों तक भी इसकी पहुंच हो गई है। ऐसे में बच्चे तमाम कंटेंट देखते देखते ऐसी साइट्स पर चले जाते हैं, जिसका कंटेंट उनके दिमाग पर बुरा असर डालता है। ये एक्शन और हॉरर गेम भी हो सकते हैं। इसके साथ ही पॉर्न कंटेंट भी उनके दिमाग को कब्जे में ले लेता है।
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दो साल में 80 फीसदी तक गिरे दाम
दरअसल, जिस समय डाटा महंगा था और लिमिटेड था उस वक्त इस तरह के कंटेंट कम देखे जाते थे। टेलीकॉम क्षेत्र में सर्वे करने वाली एक एजेंसी के अनुसार पिछले दो सालों में इंटरनेट डाटा के दामों में 80 फीसदी तक की कमी आई है। 2016 में एक जीबी फोर जी डाटा की औसत दर 228 रुपये थी। जो कि अब घटकर महज 30 रुपये के आसपास आ गई है। भविष्य में संभावित बढ़ोतरी को भी देखा जाए तो 2020 तक यह महज 50 रुपये प्रति जीबी से ज्यादा नहीं होने वाला है।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। महिलाओं और बच्चों की अश्लील वीडियो व फोटो वायरल करने की जांच भी अब साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन करेगा। इसके लिए एक विशेष सेल का गठन किया गया है। केंद्र सरकार के निर्देश पर राज्य में इस तरह की यह पहली और अकेली सेल है। पूरे राज्य के लिए एसएसपी एसटीएफ को इसका नोडल अधिकारी बनाया गया है। यह सेल बच्चों और महिलाओं के संबंध में पोर्नोग्राफी की शिकायत पर प्राथमिक जांच कर संबंधित जिले के थानों को विवेचना में मदद भी करेगी।
पिछले कुछ समय में महिलाओं और बच्चों से संबंधित अश्लील वीडियो व फोटो सोशल मीडिया पर वायरल करने का चलन बढ़ा है। सोशल मीडिया का दायरा बढ़ने के बाद यह तेजी से फैल रहा है। इसी के मद्देनजर केंद्र सरकार ने प्रीवेंशन ऑफ साइबर क्राइम अगेंस्ट वुमन एंड चिल्ड्रन के तहत सभी राज्यों को विशेष सेल गठित करने के निर्देश दिए थे। एसएसपी (एसटीएफ) रिधिम अग्रवाल ने बताया कि एक जुलाई को साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में भी एक सेल बनाई गई है। इस सेल की प्रभारी महिला सब इंस्पेक्टर बनाई गई है। उन्होंने बताया कि इसके तहत यदि कोई भी शिकायत आती है तो सेल उसकी गंभीरता से जांच करेगी। इसी निगरानी उनके द्वारा की जाएगी। कुछ भी साक्ष्य मिलने के बाद संबंधित थाने में मुकदमा दर्ज किया जाएगा। इसके साथ ही इस मुकदमे के विवेचना अधिकारी को भी इस सेल का लगातार सहयोग मिलेगा। शिकायत के लिए एक नंबर भी उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने बताया कि फिलहाल 15 दिनों से इस तरह की कोई शिकायत सेल को नहीं मिली है।
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यहां कर सकते हैं शिकायत
महिलाओं और बच्चों से संबंधित पोर्नोग्राफी की शिकायत 0135-2655900 टेलीफोन नंबर पर की जा सकती है।
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सस्ता-ज्यादा इंटरनेट अपराध के उकसावे में कर रहा खाद का काम
- सस्ते इंटरनेट डाटा के चलते बढ़ रहा उपयोग
- नाबालिगों पर होता है ज्यादा प्रभाव, बन रहे अपराधी
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। मोबाइल कंपनियों का सस्ता-फ्री और ज्यादा से ज्यादा इंटरनेट डाटा अपराध के उकसावे में उत्प्रेरक की तरह काम कर रहा है। पुलिस अधिकारियों की माने तो सहसपुर थाना क्षेत्र में मोबाइल पर पोर्न फिल्म देखकर पांच नाबालिगों द्वारा बृहस्पतिवार को आठ साल की बच्ची के साथ दुराचार की घटना कुछ ऐसी ही घटना है। पुलिस अधिकारी चिंता जताते हैं कि आने वाले दिनों में अपराध के उकसावे को लेकर इंटरनेट बड़ी चुनौती बन कर उभरेगा। आए दिन इस तरह की घटना सामने आ रहीं है, जिनमें इंटरनेट अपराध के उत्प्रेरक के तौर पर काम कर रहा है।
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विशेषज्ञ मानते हैं कि इस समय विभिन्न टेलीकॉम कंपनियों की ओर जो सस्ता इंटरनेट डाटा उपलब्ध कराया जा रहा है, उससे ज्यादा से ज्यादा लोगों की पहुंच इंटरनेट तक हुई है। सन 2017 में हुए एक सर्वे के अनुसार भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल 2013 से 2017 के बीच 123 फीसदी तक बढ़ा है। इस डाटा में से बहुत बड़ा हिस्सा पोर्न साइट को देखने में इस्तेमाल होता है। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार पोर्न साइट पर खर्च डाटा 23 गुना तक बढ़ा है। समाज में इसका बुरा असर न पड़े इसके लिए पिछले साल केंद्र सरकार ने सैकड़ों पोर्न साइट्स प्रतिबंधित भी की थी।
बच्चों में बढ़ रही इस लत के बारे में मनोवैज्ञानिक वीना कृष्णनन बताती हैं कि 14 साल से कम उम्र में बच्चे का दिमाग इस अवस्था में होता है कि वह किसी भी चीज को बहुत जल्दी ग्रहण करता है। नकारात्मक और उत्तेजक घटनाक्रम उन्हें जल्दी अपने प्रभाव में लेते हैं। इंटरनेट पर सभी की निर्भरता बढ़ी है। घर से लेकर स्कूल तक में बच्चों को इंटरनेट से टास्क पूरा करने को कहा जाता है। इसी बीच वे इस तरह की साइटों को भी सर्च करने लग जाते हैं, जिनका उन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
एसएसपी एसटीएफ रिधिम अग्रवाल का कहना है कि वर्तमान में इंटरनेट डाटा की दरें काफी सस्ती हो गईं हैं। इसलिए हर तबके की पहुंच अब इंटरनेट तक हो गई है। इसी के चलते लोग कम समय में ज्यादा से ज्यादा सामग्री इंटरनेट पर खोज रहे हैं। इनमें कुछ अच्छी तो कुछ बुरी होती है। बुरी चीजों का बच्चों पर ज्यादा असर पड़ रहा है। डीआईजी गढ़वाल रेंज अजय रौतेला बताते हैं कि सस्ती और सुलभ इंटरनेट सेवा ने जहां लोगों का काम आसान किया है, वहीं उसके कुछ दुष्परिणाम भी हैं। बच्चों तक भी इसकी पहुंच हो गई है। ऐसे में बच्चे तमाम कंटेंट देखते देखते ऐसी साइट्स पर चले जाते हैं, जिसका कंटेंट उनके दिमाग पर बुरा असर डालता है। ये एक्शन और हॉरर गेम भी हो सकते हैं। इसके साथ ही पॉर्न कंटेंट भी उनके दिमाग को कब्जे में ले लेता है।
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दो साल में 80 फीसदी तक गिरे दाम
दरअसल, जिस समय डाटा महंगा था और लिमिटेड था उस वक्त इस तरह के कंटेंट कम देखे जाते थे। टेलीकॉम क्षेत्र में सर्वे करने वाली एक एजेंसी के अनुसार पिछले दो सालों में इंटरनेट डाटा के दामों में 80 फीसदी तक की कमी आई है। 2016 में एक जीबी फोर जी डाटा की औसत दर 228 रुपये थी। जो कि अब घटकर महज 30 रुपये के आसपास आ गई है। भविष्य में संभावित बढ़ोतरी को भी देखा जाए तो 2020 तक यह महज 50 रुपये प्रति जीबी से ज्यादा नहीं होने वाला है।