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दून बन रहा पंजाब के अपराधियों का सुरक्षित ठिकाना
Updated Sun, 14 Jan 2018 02:13 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
दो लाख के इनामी हर सिमरन दीप सिंह उर्फ सिम्मा की गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर पंजाब के अपराधियों द्वारा देहरादून को ठिकाना बनाने का मामला प्रकाश में आया है। इसके पहले नाभा जेल ब्रेक कांड की साजिश भी दून से ही रची गई थी। जेल में हमला कर साथियों को छुड़ाने वाले पलविंदर उर्फ पेंदा अपने साथियों के साथ दून के रायपुर क्षेत्र में छिपा था।
पंजाब के अपराधियों का देहरादून से जुड़ाव का यह पहला मामला नहीं है। पंजाब में आतंकवाद के दौर में कई आतंकवादियों ने देहरादून जिले में शरण लेने के साथ कई घटनाएं अंजाम दी थीं। आतंकवाद का सफाया हुआ तो काफी समय तक देहरादून में पंजाब के अपराधियों की गतिविधियों पर अंकुश लगा रहा, लेकिन दो साल पहले नाभा जेल ब्रेक कांड के बाद देहरादून और पंजाब के अपराधियों का कनेक्शन फिर सामने आया। जेल ब्रेक कांड को अंजाम देने वाले पलविंदर उर्फ पेंदा और उसके साथियों ने देहरादून में रहते हुए साजिश रची थी। यही नहीं पेंदा के एक साथी ने पंजाब में हुई डकैती में मिले लाखों के जेवरात पलटन बाजार के एक कारोबारी को बेचे थे। अब हर सिमरन दीप सिंह उर्फ सिम्मा की गिरफ्तारी के बाद यह बात पुष्ट है कि पंजाब के अपराधियों को देहरादून की आबोहवा खूब रास आ रही है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक निवेदिता कुकरेती की मानें तो बीते साल जुलाई में जिले की सीमा से लगे पांवटा साहिब में जो तीन लोग गोली लगने से घायल हुए थे। घायलों से सिम्मा के संबंध होने की बात सामने आ रही है। सिम्मा का देहरादून और आसपास से जुड़ाव का पता लगाया जा रहा है। इसके अलावा नाभा जेल ब्रेक कांड के आरोपियों से कनेक्शन को लेकर भी जांच कराई जा रही है।
कब आया था सिम्मा; दो लाख का इनामी हर सिमरन दीप सिंह सिम्मा कब आया था, अभी कुछ भी कहना मुमकिन नहीं है। पुलिस का दावा है कि सिम्मा शुक्रवार रात को यहां आया था, लेकिन आसपास के लोगों का कहना है कि इस शख्स को पहले भी यहां देखा गया है। सिम्मा का अपने भाई फूल विंदर के साथ रुकने के पीछे क्या मंशा थी। क्या दून से फिर किसी बड़े साजिश को अंजाम देने की तैयारी थी। ये सवाल पुलिस को सुलझाने हैं।
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सत्यापन अभियान की खुली पोल; दो लाख के इनामी सिम्मा और उसके साथियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सत्यापन अभियान के दावों की पोल खुल गई है। हरीश भाटिया के इस मकान से सिर्फ 20 कदम दूर पुलिस पिकेट है, लेकिन तीन माह में एक बार भी फिर पुलिस उधर झांकने तक नहीं पहुंची।
नेट से करता था कॉल ; शातिर हर सिमरन दीप सिंह पुलिस की हर चाल से वाकिफ है। रंगदारी न मिलने पर सिम्मा ने 29 जुलाई को रविन्द्र कोचर की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। वह मोबाइल का प्रयोग नहीं करता है। इसके अलावा वह अपने साथियों से भी नेट के जरिये ही बात करता था।
दो लाख के इनामी हर सिमरन दीप सिंह उर्फ सिम्मा की गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर पंजाब के अपराधियों द्वारा देहरादून को ठिकाना बनाने का मामला प्रकाश में आया है। इसके पहले नाभा जेल ब्रेक कांड की साजिश भी दून से ही रची गई थी। जेल में हमला कर साथियों को छुड़ाने वाले पलविंदर उर्फ पेंदा अपने साथियों के साथ दून के रायपुर क्षेत्र में छिपा था।
पंजाब के अपराधियों का देहरादून से जुड़ाव का यह पहला मामला नहीं है। पंजाब में आतंकवाद के दौर में कई आतंकवादियों ने देहरादून जिले में शरण लेने के साथ कई घटनाएं अंजाम दी थीं। आतंकवाद का सफाया हुआ तो काफी समय तक देहरादून में पंजाब के अपराधियों की गतिविधियों पर अंकुश लगा रहा, लेकिन दो साल पहले नाभा जेल ब्रेक कांड के बाद देहरादून और पंजाब के अपराधियों का कनेक्शन फिर सामने आया। जेल ब्रेक कांड को अंजाम देने वाले पलविंदर उर्फ पेंदा और उसके साथियों ने देहरादून में रहते हुए साजिश रची थी। यही नहीं पेंदा के एक साथी ने पंजाब में हुई डकैती में मिले लाखों के जेवरात पलटन बाजार के एक कारोबारी को बेचे थे। अब हर सिमरन दीप सिंह उर्फ सिम्मा की गिरफ्तारी के बाद यह बात पुष्ट है कि पंजाब के अपराधियों को देहरादून की आबोहवा खूब रास आ रही है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक निवेदिता कुकरेती की मानें तो बीते साल जुलाई में जिले की सीमा से लगे पांवटा साहिब में जो तीन लोग गोली लगने से घायल हुए थे। घायलों से सिम्मा के संबंध होने की बात सामने आ रही है। सिम्मा का देहरादून और आसपास से जुड़ाव का पता लगाया जा रहा है। इसके अलावा नाभा जेल ब्रेक कांड के आरोपियों से कनेक्शन को लेकर भी जांच कराई जा रही है।
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कब आया था सिम्मा; दो लाख का इनामी हर सिमरन दीप सिंह सिम्मा कब आया था, अभी कुछ भी कहना मुमकिन नहीं है। पुलिस का दावा है कि सिम्मा शुक्रवार रात को यहां आया था, लेकिन आसपास के लोगों का कहना है कि इस शख्स को पहले भी यहां देखा गया है। सिम्मा का अपने भाई फूल विंदर के साथ रुकने के पीछे क्या मंशा थी। क्या दून से फिर किसी बड़े साजिश को अंजाम देने की तैयारी थी। ये सवाल पुलिस को सुलझाने हैं।
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सत्यापन अभियान की खुली पोल; दो लाख के इनामी सिम्मा और उसके साथियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सत्यापन अभियान के दावों की पोल खुल गई है। हरीश भाटिया के इस मकान से सिर्फ 20 कदम दूर पुलिस पिकेट है, लेकिन तीन माह में एक बार भी फिर पुलिस उधर झांकने तक नहीं पहुंची।
नेट से करता था कॉल ; शातिर हर सिमरन दीप सिंह पुलिस की हर चाल से वाकिफ है। रंगदारी न मिलने पर सिम्मा ने 29 जुलाई को रविन्द्र कोचर की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। वह मोबाइल का प्रयोग नहीं करता है। इसके अलावा वह अपने साथियों से भी नेट के जरिये ही बात करता था।