फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   50 लाख का जलपान गटक गए वन विकास निगम के अधिकारी

50 लाख का जलपान गटक गए वन विकास निगम के अधिकारी

Mon, 15 Oct 2018 01:48 AM IST
Updated Mon, 15 Oct 2018 01:48 AM IST
विज्ञापन
50 लाख का जलपान गटक गए वन विकास निगम के अधिकारी
ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
विज्ञापन

सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में वन विकास निगम में लाखों का गड़बड़झाला सामने आया है। जानकारी में वित्तीय वर्ष 2015-16 व 2016-17 में जलपान, भोजन के नाम पर 50 लाख रुपये खर्च करने की बात उजागर हुई है। इसके अलावा लाखों रुपये के टैक्सी बिल घोटाले की भी बात सामने आ रही है।
यह जानकारी आरटीआई क्लब उत्तराखंड के महासचिव अमर एस धुंता ने रविवार को मीडिया से साझा की। धुंता ने बताया कि वन विकास निगम के अधिकारियों ने दो साल के भीतर जलपान, भोजन आदि पर 50 लाख रुपये सरकारी धन खर्च किया गया है। धुंता के मुताबिक महाप्रबंधक द्वारा 30 दिसंबर 2015 को 27 अधिकारियों को रात्रि भोज दिया गया। इसके एवज में एक लाख 21 हजार 400 रुपये का भुगतान किया गया। वहीं 55 लाख रुपये कीमत से सोफा, पलंग, कूलर समेत तमाम सामान खरीदे गए और फिर उन्हें मात्र 15 हजार रुपये में नीलाम कर दिया गया। इसके अलावा अफसरों ने उप खनिजों की निकासी पर 14.24 लाख रुपये का राजस्व नुकसान कराने के साथ ही आयकर की धनराशि का लाभ वाहन स्वामियों को गलत तरीके से पहुंचाया गया। इस संबंध में वन विभाग की ऑडिट टीम द्वारा अनियमितता पाए जाने के बावजूद शासन व वन विभाग की ओर से कोेई कार्रवाई नहीं की गई।
विज्ञापन

धुंता ने आरोप लगाया कि निगम अफसरों ने विभागीय गाड़ियों की आड़ में भी लाखों की हेराफेरी की गई है। एक खड़ी गाड़ी होने के बावजूद लाग बुक में 160 लीटर डीजल भराया जाना दर्शाया गया है। इसके अलावा देहरादून से नैनीताल जाने वाली गाड़ी में राजस्थान के झुंझनू में तेल भराने की बात सामने आई है। अप्रैल 2017 में एक गाड़ी को 31 अप्रैल को 59 किमी चलना दर्शाया गया है जबकि अप्रैल सिर्फ 30 दिन का होता है। साथ ही तमाम निजी वाहनों को भी टैक्सी कोटे में दर्शाकर लाखों रुपये का भुगतान किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

आरोपों के संबंध में जब वन विकास निगम के प्रबंध निदेशक गंभीर सिंह से जानकारी ली गई तो उन्हाेंने बताया कि प्रकरणों की प्रमुख वन संरक्षक के स्तर पर जांच करायी गई है। जांच रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। इससे अधिक उन्हें जानकारी नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed