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पूर्व ग्राम प्रधान समेत 18 के खिलाफ मुकदमा दर्ज
Updated Sat, 25 Aug 2018 02:08 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/सेलाकुई।
निर्मल भारत अभियान के तहत ग्राम पंचायत जस्सोवाला में शौचालय निर्माण में हुई गड़बड़ी मामले में पुलिस ने पूर्व ग्राम प्रधान समेत 18 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया है। 18 लोगों में आठ स्वजल के अधिकारी, एक सहयोगी संस्था की सीईओ, दो सामुदायिक कार्यकर्ता, एक तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी और चार ग्रामीणों के नाम शामिल हैं। पुलिस ने सभी के खिलाफ धोखाधड़ी, लोक सेवक द्वारा विश्वास का आपराधिक हनन और 97 पंचायतीराज अधिनियम में मुकदमा दर्ज किया है।
मालूम हो कि ग्राम पंचायत अंतर्गत निर्मल भारत अभियान के तहत वर्ष 2006-07, 2009-10 और 2011 में शौचालय निर्माण में धांधली का मामला प्रकाश में आया था। मामले में गांव निवासी आरटीआई कार्यकर्ता और एडवोकेट सुंदर लाल सैनी ने कोर्ट में पीआईएल दायर की थी। जिस पर हाईकोर्ट ने बीते 22 जून को फैसला सुनाते हुए मुख्य सचिव और एसएसपी को मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए थे। जिसके बाद परियोजना प्रबंधक इकाई (स्वजल) के निदेशक के निर्देशन में गठित चार सदस्य जांच समिति ने मामले की जांच शुरू कर दी थी। जांच समिति और तहसीलदार की रिपोर्ट के आधार पर मामले में 18 लोग दोषी पाए गए। जिसके बाद एसएसपी की संस्तुति पर सहसपुर थाना पुलिस ने पूर्व ग्राम प्रधान समेत 18 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया।
इनके खिलाफ दर्ज हुए मुकदमे
थानाध्यक्ष नरेश राठौर ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर मामले में तत्कालीन ग्राम प्रधान प्रवीण कुमार सैनी, सहयोगी संस्था समर्पित सेवा संस्थान की सीईओ/अध्यक्षा कमला जायसवाल, जिला परियोजना प्रबंधन इकाई के तत्कालीन पर्यावरण सलाहकार/पोर्टफोलियो मैनेजर सुरेश चंद्र खंडूरी, तत्कालीन लेखा प्रबंधक रणवीर रावत, सतीश चंद गुप्ता, तत्कालीन परियोजना प्रबंधक किशन सिंह रावत, तत्कालीन उप परियोजना प्रबंधक जगमोहन सिंह चौहान, सुनीता भट्ट, तत्कालीन सामुदायिक विकास विशेषज्ञ वीरेंद्र भट्ट, तत्कालीन स्वास्थ्य एवं स्वच्छता विशेषज्ञ/पोर्टफोलियो मैनेजर अनुभा रावत, सामुदायिक कार्यकर्ता रीना, पूरन सिंह, तत्कालीन ग्राम पंचायत विकास अधिकारी जुल्फीकार हुसैन और गांव निवासी वजीर पुत्र नंदलाल, नीता पुत्र फुल्लू, छोटेलाल पुत्र चेतराम, गफूल पुत्र यासीन और आशाराम पुत्र छोटेलाल के नाम शामिल हैं। थानाध्यक्ष ने बताया कि जिन ग्रामीणों के नाम मुकदमा सूची में दर्ज किए गए हैं इन ग्रामीणों ने पूर्व में तहसीलदार की जांच में प्रोत्साहन राशि प्राप्त नहीं होने का लिखित बयान दिया था, लेकिन 12 जुलाई को जांच में इन ग्रामीणों ने बयान दिया गया कि उन्हें प्रोत्साहन धनराशि प्राप्त हो चुकी है। जिनके द्वारा गलत प्रमाण देने और तथ्य को छुपाने का प्रयास किया गया।
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निर्मल भारत अभियान के तहत ग्राम पंचायत जस्सोवाला में शौचालय निर्माण में हुई गड़बड़ी मामले में पुलिस ने पूर्व ग्राम प्रधान समेत 18 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया है। 18 लोगों में आठ स्वजल के अधिकारी, एक सहयोगी संस्था की सीईओ, दो सामुदायिक कार्यकर्ता, एक तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी और चार ग्रामीणों के नाम शामिल हैं। पुलिस ने सभी के खिलाफ धोखाधड़ी, लोक सेवक द्वारा विश्वास का आपराधिक हनन और 97 पंचायतीराज अधिनियम में मुकदमा दर्ज किया है।
मालूम हो कि ग्राम पंचायत अंतर्गत निर्मल भारत अभियान के तहत वर्ष 2006-07, 2009-10 और 2011 में शौचालय निर्माण में धांधली का मामला प्रकाश में आया था। मामले में गांव निवासी आरटीआई कार्यकर्ता और एडवोकेट सुंदर लाल सैनी ने कोर्ट में पीआईएल दायर की थी। जिस पर हाईकोर्ट ने बीते 22 जून को फैसला सुनाते हुए मुख्य सचिव और एसएसपी को मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए थे। जिसके बाद परियोजना प्रबंधक इकाई (स्वजल) के निदेशक के निर्देशन में गठित चार सदस्य जांच समिति ने मामले की जांच शुरू कर दी थी। जांच समिति और तहसीलदार की रिपोर्ट के आधार पर मामले में 18 लोग दोषी पाए गए। जिसके बाद एसएसपी की संस्तुति पर सहसपुर थाना पुलिस ने पूर्व ग्राम प्रधान समेत 18 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया।
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इनके खिलाफ दर्ज हुए मुकदमे
थानाध्यक्ष नरेश राठौर ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर मामले में तत्कालीन ग्राम प्रधान प्रवीण कुमार सैनी, सहयोगी संस्था समर्पित सेवा संस्थान की सीईओ/अध्यक्षा कमला जायसवाल, जिला परियोजना प्रबंधन इकाई के तत्कालीन पर्यावरण सलाहकार/पोर्टफोलियो मैनेजर सुरेश चंद्र खंडूरी, तत्कालीन लेखा प्रबंधक रणवीर रावत, सतीश चंद गुप्ता, तत्कालीन परियोजना प्रबंधक किशन सिंह रावत, तत्कालीन उप परियोजना प्रबंधक जगमोहन सिंह चौहान, सुनीता भट्ट, तत्कालीन सामुदायिक विकास विशेषज्ञ वीरेंद्र भट्ट, तत्कालीन स्वास्थ्य एवं स्वच्छता विशेषज्ञ/पोर्टफोलियो मैनेजर अनुभा रावत, सामुदायिक कार्यकर्ता रीना, पूरन सिंह, तत्कालीन ग्राम पंचायत विकास अधिकारी जुल्फीकार हुसैन और गांव निवासी वजीर पुत्र नंदलाल, नीता पुत्र फुल्लू, छोटेलाल पुत्र चेतराम, गफूल पुत्र यासीन और आशाराम पुत्र छोटेलाल के नाम शामिल हैं। थानाध्यक्ष ने बताया कि जिन ग्रामीणों के नाम मुकदमा सूची में दर्ज किए गए हैं इन ग्रामीणों ने पूर्व में तहसीलदार की जांच में प्रोत्साहन राशि प्राप्त नहीं होने का लिखित बयान दिया था, लेकिन 12 जुलाई को जांच में इन ग्रामीणों ने बयान दिया गया कि उन्हें प्रोत्साहन धनराशि प्राप्त हो चुकी है। जिनके द्वारा गलत प्रमाण देने और तथ्य को छुपाने का प्रयास किया गया।
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