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सड़क पर दौड़ रही अनफिट स्कूल वैन सीज
Updated Wed, 01 Aug 2018 02:08 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। निजी स्कूल की लापरवाही से बच्चों की जान खतरे में है। स्कूली वाहनों में बिना कागज और फिटनेस के बच्चों को ढोया जा रहा है। मंगलवार को एआरटीओ ने गुमानीवाला में संचालित एक मिशनरी स्कूल की वैन को पकड़ा। चालक से दस्तावेज मांगे गए, तो वह लाइसेंस तो दूर वैन का परमिट तक नहीं दिखा पाया। एआरटीओ डॉ. अनीता चमोला ने बताया कि चालक के पास वैन से संबंधित कोई भी दस्तावेज नहीं मिले। वैन का फिटनेस सर्टिफिकेट भी कई वर्षों से नहीं बनाया गया। वैन को सीज कर दिया गया है। इस बाबत स्कूल प्रबंधन को भी अवगत करा दिया गया है।
वहीं एआरटीओ डॉ. अनीता चमोला ने वाहन चेकिंग के दौरान एक ऑटो को ओवरलोडिंग में हरिद्वार रोड पर पकड़ लिया। वाहन में कांवड़िये सवार थे। ऑटो के कागजों की जांच की गई, तो पता चला कि वह चार सवारियों में पास है। जबकि सवारियों की गिनती में उसमें 12 लोग सवार मिले। एआरटीओ ने ऑटो को सीज कर परमिट व चालक के लाइसेंस के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति भी की है।
अभिभावकों में जागरुकता जरुरी
एआरटीओ डॉ. अनीता चमोला ने कहा कि नगर क्षेत्र में विभिन्न निजी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाने वाले अभिभावकों का जागरूक होना जरूरी है। बच्चों को जिस स्कूली वाहन में भेजा रहा है, उसके दस्तावेज पूरे हैं या नहीं। फिटनेस ठीक है कि नहीं। इस प्रकार की जानकारियां अभिभावकों को लेनी आवश्यक हैं। मामला मासूम बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा है। निजी स्कूलों के प्रबंधन भी मामले में गंभीर हों, तो ऐसी लापरवाही से हादसों को रोकने में मदद मिल सकती है।
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वहीं एआरटीओ डॉ. अनीता चमोला ने वाहन चेकिंग के दौरान एक ऑटो को ओवरलोडिंग में हरिद्वार रोड पर पकड़ लिया। वाहन में कांवड़िये सवार थे। ऑटो के कागजों की जांच की गई, तो पता चला कि वह चार सवारियों में पास है। जबकि सवारियों की गिनती में उसमें 12 लोग सवार मिले। एआरटीओ ने ऑटो को सीज कर परमिट व चालक के लाइसेंस के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति भी की है।
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अभिभावकों में जागरुकता जरुरी
एआरटीओ डॉ. अनीता चमोला ने कहा कि नगर क्षेत्र में विभिन्न निजी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाने वाले अभिभावकों का जागरूक होना जरूरी है। बच्चों को जिस स्कूली वाहन में भेजा रहा है, उसके दस्तावेज पूरे हैं या नहीं। फिटनेस ठीक है कि नहीं। इस प्रकार की जानकारियां अभिभावकों को लेनी आवश्यक हैं। मामला मासूम बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा है। निजी स्कूलों के प्रबंधन भी मामले में गंभीर हों, तो ऐसी लापरवाही से हादसों को रोकने में मदद मिल सकती है।
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