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कबूतरबाजी का मास्टरमाइंड दबोचा

Thu, 19 Jul 2018 02:00 AM IST
Updated Thu, 19 Jul 2018 02:00 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश।
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मुनिकीरेती पुलिस की ओर से गिरफ्तार कि गए आरोपी यशपाल नेगी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर विदेश में नौकरी दिलाने की बात कही। बेरोजगार युवाओं ने पोस्ट पर दिए नंबर पर उससे संपर्क किया। उसने वर्ष 2009 में कोटद्वार में एक दुकान में ऑफिस खोलकर युवकों को ठगा। बताया गया है कि आरोपी ने 50 युवाओं से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी कर ली। जालसाजी का पता चलने पर जब युवाओं को असलियत का पता चलने लगा तो वह दुकान बंद कर चंपत हो गया। इसके बाद आरोपी ने वर्ष 2015 में ढालवाला में इंस्टीट्यूट खोला। यहां भी उसने धोखाधड़ी का धंधा जारी रखा। अब वह गाजियाबाद स्थित एक फ्लैट से जालसाजी का धंधा संचालित कर रहा था।
नरेंद्रनगर पुलिस क्षेत्राधिकारी जेपी जुयाल ने बताया कि आरोपी यशपाल नेगी का नेटवर्क थाइलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया सहित कई देशों में फैला है। वर्किंग वीजा दिलाने के लिए वह बेरोजगारों को टूरिस्ट वीजा पर इन देशों में भेजता था। वहां वर्किंग वीजा न मिलने पर जब भेजे गए युवक उससे जानकारी करते थे तो वह बहाने बनाकर टालता रहता था। इसके बाद वह फोन ही बंद कर लेता था और नंबर बदल लेता था।
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ये युवक हुए ठगी का शिकार
आरोपी यशपाल नेगी ने सोशल मीडिया के माध्यम से नौकरी का झांसा देकर टिहरी निवासी अनिल, मनीष, केशव, रमेश, दीपक भद्री, सूरज, मुकेश जोशी, खुशहाल सिंह, गुड्डू, संदीप, मदन, सुदामा, पौड़ी निवासी सुरेंद्र नेगी, देहरादून निवासी गौरव काला, धारचूला निवासी रमेश चंद्र, हिमाचल प्रदेश के सोलन निवासी अर्जुन व मनीष, कोलकाता निवासी लुकमान अली, गुजरात के सूरत निवासी मोहम्मद आदम, इरफान, अय्यूब, इस्माइल, उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित आर्यनगर निवासी शिवानंद गौतम, अंकित आदि शामिल हैं।
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नमो विचार मंच का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष है यशपाल नेगी
मुनिकीरेती थानाध्यक्ष आरके सकलानी के मुताबिक आरोपी के दस्तावेजों की जांच में नरेंद्र मोदी विचार मंच संगठन का एक लेटर भी मिला है, जिसमें आरोपी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और उत्तराखंड प्रदेश प्रभारी मनोनीत किया जाना अंकित है। उन्होंने बताया कि आरोपी के अन्य दस्तावेजों की पड़ताल भी की जा रही है।

थाईलैंड भेजा, वर्क परमिट नहीं दिया
-यशपाल नेगी से मैं वर्ष 2015 में उसके ढालवाला स्थित इंस्टीट्यूट में मिला। विदेश में नौकरी के लिए बात हुई। मैंने उसे एक लाख 10 हजार रुपए की रकम दी, जिसकी एवज में मुझे दो माह का टूरिस्ट वीजा मिला और यशपाल ने मुझे थाईलैंड भेज दिया। थाईलैंड में उसके एजेंट ने रिसीव किया। इस बीच यशपाल वर्क परमिट के लिए टरकाता रहा। पैसे खत्म होने पर थाईलैंड के एक होटल में काम किया। बामुश्किल दो माह में किसी तरह से स्वदेश लौटा।

- गौरव काला निवासी देहरादून, पीड़ित

थाईलैंड के बजाए मकाउ भेजा
-फेसबुक पर विदेश में नौकरी का विज्ञापन देखकर मैंने बीते जनवरी माह में यशपाल नेगी से संपर्क किया। इसके बाद आरोपी से ढालवाला में उसके इंस्टीट्यूट में मुलाकात हुई। उसने विदेश में नौकरी दिलाने के लिए थाईलैंड भेजने की बात कही। आरोपी ने इसकी एवज में मुझ से एक लाख रुपए लिए, लेकिन कुछ समय बाद थाईलैंड में कोई समस्या आ गई तो चीन में मकाउ के लिए भेज दिया। इसके बाद आरोपी को दो लाख रुपए और दिए। उसे दो माह का टूरिस्ट वीजा दिया गया और इसके बाद वह वर्क परमिट दिलाने से मुकर गया।
- ओमप्रकाश नौटियाल निवासी मुनिकीरेती, पीड़ित
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