{"_id":"5968f05d4f1c1b1c678b45b7","slug":"15000495667-karnpryag-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पूर्व डॉक्टर और फार्मासिस्ट को तीन साल की सजा और पांच हजार का जुर्माना","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
पूर्व डॉक्टर और फार्मासिस्ट को तीन साल की सजा और पांच हजार का जुर्माना
Updated Fri, 14 Jul 2017 09:55 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
थराली (कर्णप्रयाग)। एनआरएचएम के खाते से एक लाख रुपये गबन करने के मामले में शुक्रवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) नारायणबगड़ में 2013 में तैनात डाक्टर और एक क्लर्क को तीन-तीन साल कठोर कारावास और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
19 सितंबर 2013 को चिकित्साधिकारी मनोज कुमार ने थाना थराली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नारायणबगड़ के एनआरएचएम खाते (011344526906) से डाक्टर हरेंद्र कुमार कुशवाहा और क्लर्क चंद्रशेखर जोशी ने एक लाख रुपये गबन कर लिए। पुलिस जांच में इसकी पुष्टि होने पर आरोपियों के खिलाफ धारा-120 बी के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया। वर्तमान में दोनों जमानत पर चल रहे हैं तथा सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
शुक्रवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) अशोक कुमार की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। यहां सहायक अभियोजन अधिकारी बीपी टम्टा, अधिवक्ता देवेंद्र नेगी तथा केएस झिक्वांण ने पैरवी की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने डा. हरेंद्र कुशवाहा तथा लिपिक चंद्रशेखर को आपराधिक षड्यंत्र रचकर सरकारी धनराशि गबन करने का दोषी मानते हुए दोनों को तीन-तीन साल के कठोर कारावास के साथ ही पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर दोनों को एक-एक माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।
19 सितंबर 2013 को चिकित्साधिकारी मनोज कुमार ने थाना थराली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नारायणबगड़ के एनआरएचएम खाते (011344526906) से डाक्टर हरेंद्र कुमार कुशवाहा और क्लर्क चंद्रशेखर जोशी ने एक लाख रुपये गबन कर लिए। पुलिस जांच में इसकी पुष्टि होने पर आरोपियों के खिलाफ धारा-120 बी के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया। वर्तमान में दोनों जमानत पर चल रहे हैं तथा सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
विज्ञापन
शुक्रवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) अशोक कुमार की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। यहां सहायक अभियोजन अधिकारी बीपी टम्टा, अधिवक्ता देवेंद्र नेगी तथा केएस झिक्वांण ने पैरवी की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने डा. हरेंद्र कुशवाहा तथा लिपिक चंद्रशेखर को आपराधिक षड्यंत्र रचकर सरकारी धनराशि गबन करने का दोषी मानते हुए दोनों को तीन-तीन साल के कठोर कारावास के साथ ही पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर दोनों को एक-एक माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।
विज्ञापन