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पढ़ें, रावत राज में पुलिस की नाकामयाबी के किस्से

Mon, 02 Feb 2015 03:33 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 02 Feb 2015 03:33 PM IST
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crime increase in harish rawat government.

मुख्यमंत्री हरीश रावत और अफसर लिखत पढ़त में अपराध कम होने का दावा भले ही करे लेकिन कुख्यात अमित भूरा की फरारी की घटना ने पुलिस के मुंह पर कालिख पोत डाली।

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यूपी स्टाइल में हुई गैंगवार, अफसरों पर हमले जैसी कई घटनाओं ने पुलिस इतिहास के पन्नों पर काली स्याही से नाकामयाबी की इबारत लिख डाली। विधानसभा के पिछले दो सत्र बिगड़ी कानून व्यवस्था के नाम रहे।
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गृहमंत्री प्रीतम सिंह अपनी अनदेखी का रोना रोते रहे और मुकदमेबाजी में फंसे विवादित डीजीपी बीएस सिद्धू को मुख्यमंत्री का संरक्षण बरकरार रहा। पहाड़ भी अपराध से अछूते नहीं रहे। अल्मोड़ा जैसे जिले में ट्रिपल मर्डर हो गया। रुड़की में बम विस्फोट में एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) सक्रिय हुई तो अपनी पुलिस ने पल्ला झाड़ लिया।
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रुड़की जेल के सामने गैंगवार में हुई तीन हत्या के छह महीने बाद भी मुख्य अभियुक्त फरार है। रुड़की में ही आईपीएस प्रहलाद मीणा पर खनन माफियाओं ने फायरिंग झोंक दी लेकिन दो महीने बाद भी नतीजा सिफर। यूएसनगर में अवैध खनन के कारोबार को लेकर छात्र संघ अध्यक्ष प्रताप बिष्ट की हत्या कर दी गई।

रामनगर में छात्र नेता आत्मदाह कांड हुआ। डीएम एसएसपी नप गए और एक मंत्री का करीबी होने के चलते मुख्य अभियुक्त संजय नेगी की गिरफ्तारी के बजाय उसे पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई। जबकि वह कालाढूंगी कांड का भी अभियुक्त रहा है। हल्द्वानी में नाबालिग लाड़ली की हत्या से पूरा कुमाऊं दहक उठा और विधानसभा में सरकार सबकुछ ठीक होने का दावा करती रही।

मुंह दिखाने के काबिल नहीं रही पुलिस

crime increase in harish rawat government.

देहरादून की नकरौंदा डकैती व हत्या के मामले में बिजनौर पुलिस अभियुक्तों को ना पकड़ती तो राज्य की पुलिस मुंह दिखाने के काबिल नहीं बचती। शासन व पीएचक्यू के बीच मतभेदों पर नसीहत देने के अलावा मुख्यमंत्री भी कोई बड़ा एक्शन भी नहीं ले सके।

सीएम ने कहा था कि ईनामी भूरा नहीं पकड़ा तो कइयों को जाना पड़ेगा लेकिन डीजीपी बीएस सिद्धू, संजय गुंज्याल और नए एसएसपी पुष्पक ज्योति सब अपनी जगह जमे हैं। पोस्टिंग के मामले में प्रयोगधर्मी बनी सरकार ने अफसर की पृष्ठभूमि के बजाय चेहरों को तवज्जों दी।

विवादित डीजीपी को लेकर विपक्ष हमलावर रहा और मुख्यमंत्री बचाव में खड़े रहे। हत्या अभियुक्त जवाहर सिंह परिहार की सजा माफ कर जेल से रिहा कर दिया। विधायक के समर्थक गिरफ्तार हुए तो रुड़की थाने निरीक्षक व कई अन्य हटाकर पहाड़ भेज दिए गए।

रही सही कसर मुख्यमंत्री के काफिले पर हल्द्वानी में भीड़ द्वारा किए गए हमले ने पूरी कर दी। और, अल्मोड़ा जैसे जिले भी ट्रिपल मर्डर जैसी जघन्य वारदात से नहीं बच सके।

कुछ बड़ी घटनाएं
: 04 नवम्बर 2014 को रामनगर में छात्रनेता ललित मोहन पांडेय का आत्मदाह, अभियुक्तों को गिरफ्तारी के बजाय मिली पुलिस सुरक्षा।
: नवम्बर को गायब लाड़ली की शव गौलापार में मिला। पूरा कुमाऊं बंद रहा।
: 27 मई 2014 को पुलिस चौकी में आईपीएस विमला गुंज्याल के भाई सिपाही सुरेंद्र सिंह की हत्या, अभियुक्त असलम अभी भी फरार।
: पहाड़ों में अपराध बढ़ा, चम्पावत में बलात्कार की सात और हत्या की दो घटनाएं हुई। बागेश्वर पांच हत्या की घटना हुई।
: यूएसनगर में एटीएम लुटते रहे, खनन के कारोबार में मर्डर, पुलिस ने घटना का खुलासा कर इज्जत बचाई।
: अल्मोड़ा की गल्ली ग्राम पंचायत के सालजाड़ा तोक में 30 जुलाई 2014 में तिहरा हत्याकांड हुआ।
: हल्द्वानी जेल में बंद एक बदमाश के पेशी के दौरान बुलंदशहर में डकैती डालने की घटना से खाकी दागदार हुई।
: रुड़की में 27 फरवरी 2014 को जौरासी जबरदस्तपुर से लापता बच्ची की हत्या।
: 05 अगस्त 2014 को जेल के मुख्य द्वार पर गैंगवार, तीन हत्या, मुख्य आरोपी फरार।
: नवंबर में मकतूलपुरी में दिनदाहड़े फैक्ट्री कर्मियों से साढ़े चार लाख की लूट।
: 26 नवंबर को खनन माफियाओं का आईपीएस प्रहलाद मीणा पर जानलेवा हमला।
: देहरादून के नकरौंदा में डकैती व युवक की हत्या, बिजनौर पुलिस ने बचाई इज्जत।

कुछ अपराध ऐसे होते हैं कि उन्हें रोकना संभव नहीं होता। मसलन, रंजिशन जितनी वारदात होती हैं। लेकिन संगठित अपराध पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस की सतर्कता, प्रशिक्षण, अभिसूचना व नेतृत्व समेत बहुत सारी चीजों की आवश्यकता होती हैं। इन्हीं पर ध्यान देना होगा।
- जेएस पांडे, पूर्व पुलिस महानिदेशक

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