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कोर्ट ने जारी किया आदेश, कंप्यूटर प्रिंट ही हो पर्ची में बीमारी और दवा के नाम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
Updated Sat, 15 Sep 2018 10:05 AM IST
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nainital high court
- फोटो : google
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अस्पतालों के पंजीकरण के मामले में हिमालयन और सिनर्जी अस्पताल की पुनर्विचार याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि डाक्टर मरीज की पर्ची में दवा और बीमारी का नाम कंप्यूटर प्रिंट कराएं। इसके लिए सरकार को जल्द ही जरूरी सामान चिकित्सालयों को उपलब्ध कराने को कहा गया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने शुक्रवार को राज्य के सभी डाक्टरों( जिनमें सरकारी, सार्वजनिक और प्राइवेट क्लीनिक के डाक्टर शामिल) को निर्देश दिए कि वे मरीज की पर्ची में बीमारी का नाम और दवा का नाम कंप्यूटर से अंकित करें ताकि रोगियों को अपनी बीमारी और उससे संबंधित दवा के बारे में आसानी से जानकारी मिल सके। कोर्ट ने राज्य सरकार को कहा है कि वे जल्द से जल्द सरकारी मेडिकल आफिसर को कंप्यूटर व प्रिंटर की सुविधा उपलब्ध कराएं।
सुनवाई के दौरान सरकारी अधिवक्ता ने अदालत को अवगत कराया कि राज्य के सभी डॉक्टरों को कंप्यूटर प्रिंटर आदि सामग्री अभी उपलब्ध कराया जाना संभव नही है। इस पर कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए कि इस आदेश को लागू करने में कम से कम समय लिया जाय। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि डॉक्टर मरीज को दवा देते वक्त ब्रांडेड दवा के बजाय जेनेरिक दवाएं ही लिखे।
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कोर्ट ने पूर्व आदेश में राज्य में बगैर लाइसेंस तथा क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट रजिस्ट्रेशन एक्ट 2010 के तहत पंजीकृत न हुए सभी अस्पतालों और क्लिनिक सील करने के आदेश दिया था। कोर्ट ने ब्रांडेड दवाएं लिखने पर रोक लगाई थी और जांच शुल्क निर्धारित करने के निर्देश दिए थे। इस आदेश में संशोधन के लिए हिमालयन हास्पिटल एसआरएचयू कैंपस जौली ग्रांट देहरादून व सिनर्जी इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल हास्पिटल ने पुनर्विचार याचिका दायर की थी। बाजपुर निवासी अहमद नबी ने इस मामले में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में बाजपुर में दोराहा स्थित बीडी अस्पताल तथा पब्लिक अस्पताल केलाखेडा बगैर पंजीकरण के संचालित होने की शिकायत की गई थी। आईएमए ने अनुरोध किया था कि पंजीकरण कराने का आदेश स्थगित कर दिया जाए।
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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने शुक्रवार को राज्य के सभी डाक्टरों( जिनमें सरकारी, सार्वजनिक और प्राइवेट क्लीनिक के डाक्टर शामिल) को निर्देश दिए कि वे मरीज की पर्ची में बीमारी का नाम और दवा का नाम कंप्यूटर से अंकित करें ताकि रोगियों को अपनी बीमारी और उससे संबंधित दवा के बारे में आसानी से जानकारी मिल सके। कोर्ट ने राज्य सरकार को कहा है कि वे जल्द से जल्द सरकारी मेडिकल आफिसर को कंप्यूटर व प्रिंटर की सुविधा उपलब्ध कराएं।
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सुनवाई के दौरान सरकारी अधिवक्ता ने अदालत को अवगत कराया कि राज्य के सभी डॉक्टरों को कंप्यूटर प्रिंटर आदि सामग्री अभी उपलब्ध कराया जाना संभव नही है। इस पर कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए कि इस आदेश को लागू करने में कम से कम समय लिया जाय। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि डॉक्टर मरीज को दवा देते वक्त ब्रांडेड दवा के बजाय जेनेरिक दवाएं ही लिखे।
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कोर्ट ने पूर्व आदेश में राज्य में बगैर लाइसेंस तथा क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट रजिस्ट्रेशन एक्ट 2010 के तहत पंजीकृत न हुए सभी अस्पतालों और क्लिनिक सील करने के आदेश दिया था। कोर्ट ने ब्रांडेड दवाएं लिखने पर रोक लगाई थी और जांच शुल्क निर्धारित करने के निर्देश दिए थे। इस आदेश में संशोधन के लिए हिमालयन हास्पिटल एसआरएचयू कैंपस जौली ग्रांट देहरादून व सिनर्जी इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल हास्पिटल ने पुनर्विचार याचिका दायर की थी। बाजपुर निवासी अहमद नबी ने इस मामले में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में बाजपुर में दोराहा स्थित बीडी अस्पताल तथा पब्लिक अस्पताल केलाखेडा बगैर पंजीकरण के संचालित होने की शिकायत की गई थी। आईएमए ने अनुरोध किया था कि पंजीकरण कराने का आदेश स्थगित कर दिया जाए।