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बदरीनाथ धाम में हाईकोर्ट के आदेश को दिखा रहे ठेंगा

Wed, 12 Feb 2014 09:59 PM IST
प्रमोद सेमवाल/अमर उजाला, गोपेश्वर
प्रमोद सेमवाल/अमर उजाला, गोपेश्वर Updated Wed, 12 Feb 2014 09:59 PM IST
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court order not followed in badrinath

अलकनंदा नदी के मुहाने पर स्थित बदरीनाथ धाम में चार धाम यात्रा के दौरान सीवर सीधे नदी में उडे़ला जाता है। आठ साल पहले यहां सीवरेज का काम शुरू किया गया था जो अभी तक पूरा नहीं हो पाया था।

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अलकनंदा को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए हाईकोर्ट बीकेटीसी, प्रशासन और नगर पंचायत को इस संबंध में आदेश भी दे चुका है। अगर सीवरेज का निर्माण जल्द पूरा नहीं होता तो आगामी चारधाम यात्रा में अलकनंदा और दूषित हो जाएगी।
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2005 में कोर्ट ने लिया था संज्ञान
वर्ष 2005 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के तत्कालीन न्यायमूर्ति जब बदरीनाथ धाम के दर्शनों के लिए पहुंचे तो वे गंगा में बहती सीवर को देख आहत हुए।

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उन्होंने इस संबंध में बदरीनाथ में सीवरेज व्यवस्था के आदेश दिए थे। साथ ही उत्तराखंड हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को पत्र भेजा, जिस पर रजिस्ट्रार ने पीआईएल (जनहित याचिका) दायर करते हुए बीकेटीसी, जिला प्रशासन और नगर पंचायत बदरीनाथ को प्रतिवादी बनाया।

हाईकोर्ट ने लिया था जायजा
इसी दौरान उत्तराखंड हाईकोर्ट के तत्कालीन न्यायमूर्ति एस जोसेफ ने बदरीनाथ पहुंच सीवर समस्या का जायजा लिया, लेकिन आठ वर्ष बीत जाने के बाद भी बदरीनाथ में सीवरेज का निर्माण नहीं हो पाया और सीवर अलकनंदा में प्रवाहित किया जा रहा है।

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कार्यदायी संस्था कभी बर्फबारी तो कभी बजट का न मिलने का बहाना बहाकर अक्सर काम रोक देती है जिस कारण काम आज तक पूरा नहीं हो पाया।

इनका है कहना
बदरीनाथ में सीवरेज कार्य निर्माणाधीन है। इसके लिए 7 करोड़ 53 लाख 90 हजार रुपये की लागत की सीवरेज ट्रीटमेंट योजना बनाई जा रही है। इस कार्य के लिए 70 फीसदी धनराशि केंद्र और 30 फीसदी राशि राज्य सरकार को देनी है। हमें राज्य सरकार से धनराशि नहीं मिल पा रही है, जिससे कार्य अधूरा पड़ा हुआ है।
-केके रस्तोगी, परियोजना प्रबंधक, गंगा इकाई, श्रीनगर, गढ़वाल।

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