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Coronavirus in Uttarakhand : कोरोना के गंभीर मरीजों को नहीं मिल पा रहा प्लाज्मा

Thu, 01 Oct 2020 02:18 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 01 Oct 2020 02:18 PM IST
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Coronavirus in Uttarakhand : serious corona patients cannot get plasma
प्लाज्मा थेरेपी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

कोेरोना के गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए कोरोना से जंग जीत चुके ज्यादातर मरीज आगे नहीं आ रहे हैं। जिससे अस्पतालों में भर्ती कई गंभीर मरीजों को प्लाज्मा थेरेपी नहीं दी जा पा रही है।

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डॉक्टरों के मुताबिक, प्लाज्मा थेरेपी भले ही कोरोना का शर्तिया इलाज नहीं, लेकिन शुरूआती ट्रायल में कुछ मरीजों के इससे ठीक होने की रिपोर्ट आई है। इसलिए जब तक कोरोना का कोई कारगर इलाज नहीं आ जाता तब तक प्लाज्मा थेेरेपी को ही डॉक्टर गंभीर मरीजों पर प्रयोग कर रहे हैं। ऐसेे में ब्लड बैंक में प्लाज्मा की किल्लत होने की वजह से दिक्कत आ रही हैं।
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राजकीय दून मेडिकल कालेज अस्पताल के प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष सयाना, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा, उप अधीक्षक डॉ. एनएस खत्री, कोरोना के चिकित्सा नोडल अधिकारी डॉ. अनुराग अग्रवाल और ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. शशि उप्रेती ने कोरोना से स्वस्थ हुए लोगों से अन्य गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए प्लाज्मा दान करने आने की अपील की है।

उन्होंने बताया कि दून अस्पताल के ब्लड बैंक को पूरी तरह से साफ सुथरा रखा गया है और वहां पर कोरोना होने का किसी तरह का डर नहीं है।

प्लाज्मा दान करने से नहीं होता कोई नुकसान 

राजकीय दून मेडिकल अस्पताल के ब्लड बैंक की प्रभारी डॉ. शशि उप्रेती ने बताया कि प्लाज्मा दान करने वाले को किसी तरह का नुकसान नहीं होता है। बल्कि प्लाज्मा दोबारा से जल्द ही रिकवर हो जाता है।

तीन से चार घंटे की है पूरी प्रक्रिया

प्लाज्मा दान करने आने वाले व्यक्ति की पहले तमाम जांचें होती हैं। जो कि बाजार में बहुत महंगी दरों पर होती हैं। साथ ही एंटीबॉडी की जांच भी होती है। सब कुछ ठीक होने पर ही प्लाज्मा देने वाले को ब्लड बैंक में रखा जाता है। करीब 45 मिनट की प्रोसेसिंग में प्लाज्मा निकाल लिया जाता है।

बाकी खून वापस दूसरी नली से उसी इंसान के शरीर में चला जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक, जिस दिन कोई इंसान पॉजीटिव आया, उसके 40 दिन बाद वह प्लाज्मा दान कर सकता है। पूरी तरह से स्वस्थ्य होने और एंटीबॉडी बनने के बाद ही प्लाज्मा लिया जाता है।
 

प्लाज्मा दान करने बहुत कम लोग पहुंच रहे

दून अस्पताल के ब्लड बैंक में लोग प्लाज्मा दान करने बहुत कम संख्या में पहुंच रहे हैं। जो आ रहे हैं वे भी स्वैच्छिक कम ही हैं। किसी का परिजन या परिचित गंभीर अवस्था में है तो ही आ रहे हैं। दून अस्प्ताल के ब्लड बैंक में 10 से अधिक लोगों ने ही अभी तक प्लाज्मा दान किया है। जबकि 20 से अधिक लोग ऐसे थे जो प्लाज्मा दान करने पहुंचे, लेकिन उनके खून में एंटीबाडीज नहीं मिली।

चार मरीजों को दिया जा चुका प्लाज्मा 

दून अस्पताल में भर्ती चार मरीजों को प्लाज्मा दिया जा चुका है। जिसमें से दो मरीजों में यह कामयाब नहीं रहा और उनकी मौत हो गई। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि उनकी मौत के अन्य कारण भी थे। 

एंटीबॉडीज न बनने का कारण स्पष्ट नहीं 

डॉक्टरों के मुताबिक, कोरोना से जंग जीत चुके कई मरीजों में एंटीबॉडीज नहीं बन रही हैं। चूंकि यह नई बीमारी है इसलिए इस बारे में अभी बहुत ज्यादा शोध न होने वजह से कुछ स्पष्ट नहीं हो पा रहा है।
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