Corona In Uttarakhand: सरकारी से ज्यादा निजी पैथोलॉजी में हो रही जांच, अब एसडीआरएफ भी करेगी एंटीजन टेस्ट
- अब तक प्रदेश में हो चुकी है 4.85 लाख से अधिक लोगों की जांच
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उत्तराखंड में सरकारी लैब से ज्यादा कोविड सैंपलों की जांच निजी पैथोलॉजी में हो रही हैं। प्रदेेश में तीन राजकीय मेडिकल कॉलेजों समेत पांच सरकारी लैब है। इतने ही आईसीएमआर से प्रमाणित निजी पैथोलॉजी लैब में सैंपलों की जांच की जा रही है। अब सरकार सैंपलिंग बढ़ाने के लिए सरकारी लैबों की क्षमता बढ़ा रही है।
कोविड सैंपलों की जांच के लिए वर्तमान में सरकारी क्षेत्र में पांच लैब स्थापित हैं। इसमें दून, हल्द्वानी और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज, आईआईपी, आईवीआरआई मुक्तेश्वर की लैब शामिल हैं।
आईसीएमआर से मान्यता प्राप्त पांच निजी लैब भी कोविड की जांच कर रहे हैं। सरकारी अस्पतालों से भी निजी लैब में जांच के लिए सैंपल भेजे जा रहे हैं। जिनका भुगतान स्वास्थ्य विभाग कर रहा है। लेकिन कई लोग जांच के लिए सीधे निजी लैब जा रहे हैं। ऐसे लोगों को एक सैंपल जांच के 2400 रुपये देने पड़ रहे हैं।
बीते पांच दिनों में सरकारी और निजी लैब में सैंपल जांच की स्थिति
9 सितंबर 10225 4519 4645 1061
10 सितंबर 10387 4259 5113 1015
11 सितंबर 9232 3178 5059 995
12 सितंबर 8776 2942 4719 1115
13 सितंबर 10725 3806 5282 1637
एसडीआरएफ भी करेगी एंटीजन टेस्ट
स्वास्थ्य विभाग की टीम जहां नहीं पहुंच सकती, वहां अब एसडीआरएफ एंटीजन टेस्ट करेगी। इसके लिए फोर्स के 18 पैरामेडिक्स स्टाफ को प्रशिक्षण दिया गया है। साथ ही एसडीआरएफ के जवान होम आइसोलेशन में रह रहे लोगों से लगातार संपर्क कर उन्हें जरूरी जानकारी देंगे।
बता दें कि एसडीआरएफ ने लॉकडाउन के दौरान लोगों की मदद के लिए बेहद अच्छी भूमिका निभाई थी। फिर चाहे वह लोगों को खाना वितरित करने की हो या फिर प्रवासियों को घर वापस लाने की। दुर्गम स्थानों पर लोगों की मदद भी इस दौरान एसडीआरएफ ने की।
एसडीआरएफ कमांडेंट तृप्ति भट्ट ने बताया कि एंटीजन टेस्ट के लिए 18 कर्मचारियों को तीलू रौतेली छात्रावास में दो चरणों में प्रशिक्षण दिया गया है। जरूरत पड़ने पर यह टीम दुर्गम स्थानों तक पहुंचकर लोगों के टेस्ट करेगी।
एसडीआरएफ के अब तक के प्रमुख काम
- करीब छह लाख लोगों को प्रदेश में वापस लाने में अहम भूमिका।
- 80 हजार से ज्यादा लोगों को खाना वितरित किया गया।
- 80 हजार से ज्यादा मास्क और 12 हजार से ज्यादा सैनिटाइजर की बोतलें बांटी।
- 15 हेल्पलाइन नंबर जारी किए, जिनके माध्यम से लगभग एक लाख लोगों ने समस्याएं बताईं।
- 32 हजार छात्र, छात्राओं, ग्रामीणों को प्रशिक्षित किया गया।