फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   coronavirus in uttarakhand latest news : mental illness become the big problem

उत्तराखंड : कोरोना महामारी के साथ दिमागी बीमारियां बन रहीं बड़ी चुनौती, मनोवैज्ञानिकों के पास कॉल की भरमार

Thu, 20 May 2021 01:28 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 20 May 2021 01:28 PM IST
सार

कोरोना की पहली लहर के मुकाबले दूसरी लहर में मुसीबत बनती जा रहे मानसिक विकार, डॉक्टरों ने माना, अब ढलान पर आ रही है कोरोना की दूसरी लहर, मृत्यु दर भी हो गई कम।

विज्ञापन
coronavirus in uttarakhand latest news : mental illness become the big problem
अवसाद - फोटो : पिक्साबे

विस्तार

कोरोना महामारी की दूसरी लहर के साथ दिमागी बीमारियां बड़ी चुनौती बनकर उभर रही हैं। चिकित्सकों और मनोवैज्ञानिकों के पास दिनभर ऐसे फोन कॉल की भरमार है, जिसमें कोरोना को लेकर लोग अपनी चिंताएं और परेशानी बयां कर रहे हैं। उन्हें डर सता रहा है कि कहीं कोरोना हो गया और ऑक्सीजन न मिली तो क्या होगा। आईसीयू न मिला तो क्या होगा। ऑक्सीजन लेवल गिर गया तो क्या होगा। हालांकि चिकित्सकों का कहना है कि घर पर रहें, सुरक्षित रहें, अब कोरोना की दूसरी लहर ढलान पर आ रही है।

विज्ञापन


उत्तराखंड में कोरोना: मरीज बढ़े तो कुमाऊं में एक महीने में ही बिक गई पांच करोड़ की पैरासिटामोल
विज्ञापन


कोरोनेशन अस्पताल में कोरोना वार्ड के इंचार्ज वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एनएस बिष्ट का कहना है कि दूसरी लहर में लोगों के भीतर एक खौफ पैदा हो गया। जो संक्रमित नहीं हुए, उन्हें संक्रमण और फिर ऑक्सीजन लेवल, आईसीयू की चिंता सता रही है। जो संक्रमित हो गए, उन्हें अब हार्टअटैक, ब्लैक फंगस, अनिंद्रा और एंजाइटी की चिंता हो रही है। डॉ. बिष्ट का कहना है कि कहीं से भी घबराने की जरूर नहीं है। जो लोग संक्रमित नहीं हुए, वह अपने घर में सुरक्षित रहें। जरूरी नहीं है कि वह संक्रमित होंगे। जो संक्रमित हो गए, वह अगर अपने खान-पान का सही से ख्याल रखेंगे तो कोई भी परेशानी नहीं होगी। 
विज्ञापन
विज्ञापन


ब्लैक फंगस: उत्तराखंड में तैयार होगी ब्लैक फंगस की दवा, दो फैक्ट्रियों में होगा उत्पादन

वहीं, वनिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ. मुकुल शर्मा का कहना है कि 75 प्रतिशत लोग केवल अस्पतालों के हालातों और परिवार में किसी के निधन से मनोविकार से जूझ रहे हैं। वह लगातार इस चिंता में हैं कि अगर उन्हें कोरोना हो गया तो क्या होगा। समय से इलाज, अस्पताल, आईसीयू, ऑक्सीजन न मिली तो क्या होगा। उन्होंने यह भी बताया कि जो लोग कोरोना से जुड़ी खबरों को लेकर ज्यादा अपडेट हैं, उनमें डिप्रेशन भी उसी स्तर पर हो रहा है। उधर, मजदूर तबके की बात करें तो वह आराम से अपनी मजदूरी करने में जुटा हुआ है। डॉ. शर्मा के मुताबिक, जितना हो सके, सकारात्मक रहें, महामारी के साथ ही इस चुनौती से भी पार पाना आसान हो जाएगा।

अस्पतालों के हालात, मौतें मुख्य कारक

लोगों में मानसिक विकार, डिप्रेशन की सबसे मुख्य वजह इस बार अस्पतालों के हालात और कोरोना संक्रमितों की मौतें रही हैं। चिकित्सकों और मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक, जिस तरह से अस्पतालों में ऑक्सीजन बेड की किल्लत हुई। मरीजों की मौत हुई, उससे लोग घबरा गए। यह घबराहट वक्त के साथ ही कम होगी। इसके लिए जबदस्ती दवाइयां लेने की कोशिश न करें।

कोरोना के बाद बुखार आए तो घबराएं नहीं

वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एनएस बिष्ट का कहना है कि कई लोग ऐसे हैं जो कि कोरोना संक्रमण से निकल चुके हैं, लेकिन उन्हें अचानक बुखार आ जाता है तो वह घबरा जाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर लगातार तीन दिन भी 101 तक बुखार रहे तो घबराएं नहीं।

अभी तक वैज्ञानिक तौर पर कहीं भी यह प्रमाणित नहीं है कि एक बार कोरोना होने के बाद तुरंत ही दोबारा संक्रमण हो जाएगा। चूंकि कोरोना में इम्यूनिटी पावर कम हो जाती है, इसलिए कभी-कभी दूसरे वायरल घेर लेते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed