उत्तराखंड : कोरोना महामारी के साथ दिमागी बीमारियां बन रहीं बड़ी चुनौती, मनोवैज्ञानिकों के पास कॉल की भरमार
कोरोना की पहली लहर के मुकाबले दूसरी लहर में मुसीबत बनती जा रहे मानसिक विकार, डॉक्टरों ने माना, अब ढलान पर आ रही है कोरोना की दूसरी लहर, मृत्यु दर भी हो गई कम।
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कोरोना महामारी की दूसरी लहर के साथ दिमागी बीमारियां बड़ी चुनौती बनकर उभर रही हैं। चिकित्सकों और मनोवैज्ञानिकों के पास दिनभर ऐसे फोन कॉल की भरमार है, जिसमें कोरोना को लेकर लोग अपनी चिंताएं और परेशानी बयां कर रहे हैं। उन्हें डर सता रहा है कि कहीं कोरोना हो गया और ऑक्सीजन न मिली तो क्या होगा। आईसीयू न मिला तो क्या होगा। ऑक्सीजन लेवल गिर गया तो क्या होगा। हालांकि चिकित्सकों का कहना है कि घर पर रहें, सुरक्षित रहें, अब कोरोना की दूसरी लहर ढलान पर आ रही है।
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कोरोनेशन अस्पताल में कोरोना वार्ड के इंचार्ज वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एनएस बिष्ट का कहना है कि दूसरी लहर में लोगों के भीतर एक खौफ पैदा हो गया। जो संक्रमित नहीं हुए, उन्हें संक्रमण और फिर ऑक्सीजन लेवल, आईसीयू की चिंता सता रही है। जो संक्रमित हो गए, उन्हें अब हार्टअटैक, ब्लैक फंगस, अनिंद्रा और एंजाइटी की चिंता हो रही है। डॉ. बिष्ट का कहना है कि कहीं से भी घबराने की जरूर नहीं है। जो लोग संक्रमित नहीं हुए, वह अपने घर में सुरक्षित रहें। जरूरी नहीं है कि वह संक्रमित होंगे। जो संक्रमित हो गए, वह अगर अपने खान-पान का सही से ख्याल रखेंगे तो कोई भी परेशानी नहीं होगी।
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वहीं, वनिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ. मुकुल शर्मा का कहना है कि 75 प्रतिशत लोग केवल अस्पतालों के हालातों और परिवार में किसी के निधन से मनोविकार से जूझ रहे हैं। वह लगातार इस चिंता में हैं कि अगर उन्हें कोरोना हो गया तो क्या होगा। समय से इलाज, अस्पताल, आईसीयू, ऑक्सीजन न मिली तो क्या होगा। उन्होंने यह भी बताया कि जो लोग कोरोना से जुड़ी खबरों को लेकर ज्यादा अपडेट हैं, उनमें डिप्रेशन भी उसी स्तर पर हो रहा है। उधर, मजदूर तबके की बात करें तो वह आराम से अपनी मजदूरी करने में जुटा हुआ है। डॉ. शर्मा के मुताबिक, जितना हो सके, सकारात्मक रहें, महामारी के साथ ही इस चुनौती से भी पार पाना आसान हो जाएगा।
अस्पतालों के हालात, मौतें मुख्य कारक
लोगों में मानसिक विकार, डिप्रेशन की सबसे मुख्य वजह इस बार अस्पतालों के हालात और कोरोना संक्रमितों की मौतें रही हैं। चिकित्सकों और मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक, जिस तरह से अस्पतालों में ऑक्सीजन बेड की किल्लत हुई। मरीजों की मौत हुई, उससे लोग घबरा गए। यह घबराहट वक्त के साथ ही कम होगी। इसके लिए जबदस्ती दवाइयां लेने की कोशिश न करें।
कोरोना के बाद बुखार आए तो घबराएं नहीं
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एनएस बिष्ट का कहना है कि कई लोग ऐसे हैं जो कि कोरोना संक्रमण से निकल चुके हैं, लेकिन उन्हें अचानक बुखार आ जाता है तो वह घबरा जाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर लगातार तीन दिन भी 101 तक बुखार रहे तो घबराएं नहीं।
अभी तक वैज्ञानिक तौर पर कहीं भी यह प्रमाणित नहीं है कि एक बार कोरोना होने के बाद तुरंत ही दोबारा संक्रमण हो जाएगा। चूंकि कोरोना में इम्यूनिटी पावर कम हो जाती है, इसलिए कभी-कभी दूसरे वायरल घेर लेते हैं।