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उत्तराखंड में कोरोना : घबराए नहीं! कोरोना से बच्चों को नहीं कोई खास खतरा, घर पर ही ठीक हो रहे 95 फीसदी बच्चे

Sat, 15 May 2021 04:33 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 15 May 2021 04:33 PM IST
सार

दून अस्पताल के वरिष्ठ बालरोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव कुमार झा के अनुसार वैसे तो कोरोना का बुजुर्ग, अधेड़, युवा, महिलाओं, बच्चों सब पर असर दिखाई दे रहा है, लेकिन इनमें बच्चे काफी सुरक्षित हैं।

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coronavirus in uttarakhand latest news : do not panic children are curing form corona in home
नवजात शिशु - फोटो : pixabay

विस्तार

बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल बच्चों में कोरोना संक्रमण को लेकर बहुत अधिक चिंता करने की जरूरत नहीं है। दूसरी लहर में यह बात देखने को मिल रही है कि कोरोना संक्रमित 95 फीसदी बच्चे घरों में ही स्वत: ठीक हो रहे हैं। पांच फीसदी बच्चों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ रहा है। इनमें से सिर्फ एक फीसदी बच्चों को आईसीयू की जरूरत पड़ रही है। 

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दून अस्पताल के वरिष्ठ बालरोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव कुमार झा के अनुसार वैसे तो कोरोना का बुजुर्ग, अधेड़, युवा, महिलाओं, बच्चों सब पर असर दिखाई दे रहा है, लेकिन इनमें बच्चे काफी सुरक्षित हैं। जिन बच्चों को कोरोना संक्रमण हो रहा है उसमें से 95 फीसदी बच्चे घरों में ही ठीक हो जाते हैं। सिर्फ पांच फीसदी बच्चों को अस्पताल लाना पड़ता है।
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कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के अधिक संक्रमित होने की बात है तो अभी से तमाम कदम उठाने होंगे। बच्चों के लिए न सिर्फ वैक्सीन विकसित करनी होगी वरन बच्चों का तेजी से टीकाकरण भी करना होगा। साथ ही सरकारी व गैर सरकारी निजी अस्पतालों में बच्चों के इलाज के लिए अलग से प्रबंध करने होंगे।

रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है थायमस ग्लैंड

बालरोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव कुमार झा का कहना है कि नवजात बच्चों में थायमस ग्लैंड पाई जाती है जो बच्चों में 13 साल की उम्र तक मौजूद रहती है। यह थायमस ग्लैंड बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता को विकसित करती है। यही वजह है कि बच्चों में बीमारी का संक्रमण बहुत अधिक नहीं होता है।

फ्लू, एमएमआर, बीसीजी के टीकाकरण से भी बच्चों का बचाव

डॉ. संजीव कुमार झा का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से बच्चों के लिए टीकाकरण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। उन्हें फ्लू, एमएमआर और बीसीजी समेत कई टीके लगाए जा रहे हैं। इसकी वजह से काफी हद तक बच्चे सुरक्षित हैं, लेकिन जिस तरीके से कोरोना वायरस खुद को म्यूटेट कर रहा है, उसे देखते हुए कोई भी भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है।  कोरोना का बच्चों पर कितना असर होगा यह तो बाद में ही पता चलेगा।

कोरोना से बच्चों को खतरे की आशंका से परिजन चिंतित

विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि कोरोना की तीसरी लहर का असर बच्चों पर ज्यादा हो सकता है। इससे अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। अभिभावकों का कहना है कि खतरे को देखते हुए वैज्ञानिकों को बच्चों की वैक्सीन विकसित करनी चाहिए। साथ ही केंद्र और राज्य सरकार को कोविड अस्पतालो में बच्चों के इलाज के लिए अलग व्यवस्था करनी चाहिए। 

वैज्ञानिक कोरोना की तीसरी लहर की आशंका जता रहे हैं तो ऐसे में बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभी से तैयारियां तेज करने की जरूरत है। बच्चों को लेकर अभी से चिंता सताने लगी है। देशभर के विशेषज्ञों को बच्चों की वैक्सीन विकसित करने के साथ ही इलाज के पुख्ता इंतजाम किए जाने की सख्त जरूरत है।
- डॉ. दीपशिखा रावत, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी

तीसरी लहर से पहले केंद्र और राज्य सरकार को तेजी से कदम उठाने होंगे। जल्द से जल्द बच्चों को भी कोरोना का टीका लगाने की जरूरत है। यदि ऐसा नहीं होता है तो न सिर्फ बच्चे संक्रमित होंगे वरन बड़ी संख्या में माता-पिता भी दोबारा बीमारी की चपेट में आएंगे। लिहाजा तेजी से कदम उठाने की जरूरत है।
- रितिका सिंह, निवासी डालनवाला

कोरोना की तीसरी लहर में सबसे अधिक बच्चे संक्रमित होंगे, ऐसा पढ़कर और सुनकर ही डर लगने लगा है। सरकार को तत्काल बच्चों के लिए वैक्सीन विकसित करने के साथ ही टीकाकरण पर फोकस करना चाहिए। बच्चों के इलाज में दिक्कत न आए इसके लिए अस्पतालों में व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की जरूरत है।
- आभा त्रिपाठी, निवासी डालनवाला

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