उत्तराखंड में कोरोना: तेजी से बढ़ रहा संक्रमण ग्राफ, पिछले 24 घंटे में मिले 3005 नए मरीज
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक गुरुवार को 13 जिलों में 3005 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए। अब तक कुल 7435 मरीजों की मौतें हो चुकी है।
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उत्तराखंड में बीते 24 घंटे में 3005 नए संक्रमित मिले हैं। वहीं दो कोरोना मरीजों की मौत हुई है। पिछले 24 घंटे में 977 मरीज स्वस्थ हुए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक गुरुवार को 13 जिलों में 3005 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए। अब तक कुल 7435 मरीजों की मौतें हो चुकी है। पिछले 24 घंटे में 977 मरीज स्वस्थ हुए हैं। इन्हें मिलाकर 335677 मरीजों ने संक्रमण को मात दी है। संक्रमितों की तुलना में ठीक होने वालों की संख्या घटने से सक्रिय मामले बढ़ गए हैं। वर्तमान में 9936 सक्रिय मरीजों का इलाज चल रहा है। प्रदेश की रिकवरी दर 93.19 प्रतिशत और सैंपल जांच के आधार पर संक्रमण दर 10.91 प्रतिशत पहुंच गई है।
देहरादून जिले में 1224 संक्रमित मिले हैं। नैनीताल में 431, हरिद्वार में 426, ऊधमसिंह नगर में 399, चंपावत में 35, पौड़ी में 106, अल्मोड़ा में 103, टिहरी में 47, पिथौरागढ़ में 44, बागेश्वर में 59, चमोली में 71, रुद्रप्रयाग में 20, उत्तरकाशी जिले में 40 संक्रमित मिले हैं।
देहरादून में हालात चिंताजनक: संस्थानों में सामूहिक रूप से मिलने लगे हैं कोरोना मरीज
दून अस्पताल में 35 मरीज भर्ती, 370 को लगी वैक्सीन
राजधानी के दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में गुरुवार को ओपीडी में 700 से अधिक मरीज देखे गए। अस्पताल में कोरोना ग्रसित 35 मरीज भर्ती हैं। पिछले 24 घंटे में 11 मरीज भर्ती हुए हैं। अस्पताल के एमएस आवास में कोविशील्ड की 250 और कोवाक्सीन की 120 डोज लगाई गई। गुरुवार को लैब बंद होने के चलते सैंपलिंग नहीं हुई। नोडल अधिकारी डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि जिन भी मरीजों को कोई भी लक्षण नहीं है, उनको कोविड-19 टेस्ट कराने की आवश्यकता नहीं है।
60 वर्ष अधिक तथा हाई रिस्क मरीज जैसे डायबिटिक इत्यादि बीमारी वाले मरीजों को कोविड-19 टेस्ट कराना चाहिए। जिन भी कोविड-19 से ग्रसित मरीजों को हल्के लक्षण हैं, उनका होम आइसोलेशन समय सात दिन का है। प्राचार्य डा. आशुतोष सयाना ने निर्देशित किया है कि ओपीडी, आईपीडी, टीकाकरण, सैंपलिंग आदि में मरीजों को किसी तरह की दिक्कत न आए। इसके लिए सभी एचओडी को निर्देशित किया गया है।
उत्तराखंड में होम आइसोलेशन में 97 प्रतिशत संक्रमित
राज्य में कोरोना संक्रमण ने रफ्तार पकड़ ली है। हालांकि यह संक्रमण ज्यादा घातक नहीं है। 97 प्रतिशत संक्रमित होम आइसोलेशन में रह कर इलाज करा रहे हैं। जबकि पूरे प्रदेश में 233 संक्रमित मरीज ही भर्ती हैं। जिससे अस्पतालों में भी बेड के लिए मारामारी की स्थिति नहीं आई है।
चुनावी माहौल के बीच कोरोना की तीसरी लहर को रोकने की चुनौती है। प्रदेश में 1 से 12 जनवरी तक कुल 12132 कोरोना संक्रमित मिले हैं। जबकि 15 मरीजों की मौत हुई है। प्रदेश में आठ हजार से अधिक सक्रिय मरीज हैं। जिसमें 97 प्रतिशत संक्रमित होम आइसोलेशन में रह रहे हैं। मात्र तीन प्रतिशत संक्रमितों को ही अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण काफी घातक साबित हुआ है। संक्रमितों को सांस लेने में दिक्कतें होने से ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी थी। जिससे सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड कम पड़ गए थे। इस बार कोरोना संक्रमण तेजी के साथ फैल रहा है, लेकिन संक्रमित घर में ही रह कर ठीक भी हो रहे हैं।
स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. तृप्ति बहुगुणा का कहना है कि कोरोना संक्रमण से घबराने की जरूरत नहीं है। कोविड अनुरूप व्यवहार का पालन कर लोग संक्रमण से बच सकते हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण की स्थिति को देखते हुए सभी इंतजाम पूरे किए गए हैं। वर्तमान में कुल सक्रिय मरीजों में 233 ही अस्पतालों में भर्ती हैं।
दिन संक्रमित ठीक
6 जनवरी 630 128
7 जनवरी 814 147
8 जनवरी 1560 270
9 जनवरी 1413 482
10 जनवरी 1292 294
11 जनवरी 2127 416
12 जनवरी 2915 1335
सरकारी दफ्तरों में 58 वर्ष से ऊपर वाले और गर्भवती कार्मिकों का वर्क फ्रॉम होम
प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे कोविड संक्रमण के बीच सरकारी दफ्तरों में कार्यरत 58 वर्ष से अधिक आयु के कर्मचारियों और गर्भवती कार्मिकों के लिए वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था शुरू कर दी गई है। चुनाव ड्यूटी में लगे किसी भी कर्मचारी पर यह आदेश लागू नहीं होंगे।
सचिव प्रभारी विनोद कुमार सुमन ने सचिवालय सहित सभी सरकारी दफ्तरों के लिए एक आदेश जारी किया। इसमें कहा गया है कि ऐसी महिला कर्मचारी जो गर्भवती हैं और ऐसे कर्मचारी जिनकी आयु 58 वर्ष से अधिक है, को घर से ही काम करना होगा। उन्हें केवल अपरिहार्य स्थिति में ही दफ्तर बुलाया जा सकेगा।
शासकीय कार्यालयों में कार्यरत दिव्यांग कार्मिकों (अति आवश्यक सेवाओं को छोड़कर) को दफ्तर में आने के संबंध में कार्यालयाध्यक्ष की ओर से छूट दी जा सकती है। शासकीय हित में किसी भी कर्मचारी को दफ्तर बुलाया जा सकता है। जो कर्मचारी विधानसभा चुनाव ड्यूटी में लगाए गए हैं। आवश्यक सेवाओं के तहत ड्यूटी पर तैनात हैं, उन पर यह आदेश लागू नहीं होगा। चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारियों पर निर्णय का अधिकार जिला निर्वाचन अधिकारी और आवश्यक सेवाओं में लगे कार्मिकों पर निर्णय का अधिकार संबंधित विभागाध्यक्ष या कार्यालयाध्यक्ष को दिया गया है।
कोविड संक्रमण के बीच ऑनलाइन मोड में आया आयोग
तेजी से बढ़ते जा रहे कोविड संक्रमण के बीच उत्तराखंड लोक सेवा आयोग भी ऑनलाइन मोड में आ गया है। आयोग के अध्यक्ष ने इस संबंध में सख्त दिशा-निर्देश जारी किए।निर्देशों के मुताबिक, विभिन्न परीक्षाओं की टाइमलाइन निर्धारित करने को लेकर ऑनलाइन पावर प्वाइंट प्रस्तुतिकरण होगा। आयोग में होने वाली डीपीसी भी ऑनलाइन की जाएगी।
आयोग में कार्यरत सभी कर्मचारियों के स्वास्थ्य संबंधी स्थिति के लिए रोजाना की रिपोर्ट चार्ट तैयार होगा, जिसमें यह स्पष्ट होगा कि अब तक कितने कर्मचारी कोविड पॉजिटिव हुए और कितने कर्मचारियों में कोविड के लक्षण हैं। आयोग की ओर से एम्स ऋषिकेश के चिकित्सा अधीक्षक को पत्र भेजा गया, जिसमें यह कहा गया है कि आयोग के सदस्यों, अधिकारियों, कर्मचारियों को आवश्यकता पड़ने पर कोविड जांच व उपचार में प्राथमिकता दी जाए। इसके लिए एम्स ऋषिकेश से यह भी अनुरोध किया गया है कि नोडल अफसर नामित किया जाए ताकि अधिकारियों व कर्मचारियों को बूस्टर डोज लगाने की व्यवस्था हो सके।
तीन दिन में 61 हजार ने लगवाई एहतियाती डोज
उत्तराखंड में तीन दिन के भीतर 61 हजार से अधिक लोगों को कोविड वैक्सीन की एहतियाती डोज लगाई गई। तीसरी डोज लगाने से बुजुर्गों, स्वास्थ्य कर्मियों और फ्रंट लाइन वर्करों को संक्रमण से सुरक्षा कवच मिल रहा है। इसके अलावा 15 से 18 वर्ष तक के 3.37 लाख से अधिक किशोरों को वैक्सीन की पहली डोज लगाई गई है।
राज्य प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. कुलदीप मर्तोलिया ने बताया कि कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए प्रदेश में टीकाकरण चल रहा है। गुरुवार को 1286 बूथों पर टीकाकरण किया गया। इसमें 51699 लोगों को पहली, दूसरी और एहतियाती डोज लगाई है। उन्होंने बताया कि तीन दिन में 61 हजार से अधिक लोगों को एहतियाती डोज लगाई गई। जबकि 10 दिन में 3.27 लाख किशोरों को वैक्सीन की पहली डोज लगाई जा चुकी है।