कोरोनाः उत्तराखंड में चारधाम यात्रा नजदीक, बढ़ी चिंता, वैज्ञानिक आयोजन पर भी मंडराया साया
- स्वास्थ्य महानिदेशक ने की जिलों के सीएमओ के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग
- वानिकी विवि भरसार से भी छह वैज्ञानिकों को होना था आयोजन में शामिल
- बैतड़ी में हुई भारत-नेपाल के अधिकारियों की बैठक
विस्तार
चारधाम यात्रा और मानसरोवर यात्रा की शुरुआत का समय नजदीक आने के साथ ही कोरोना संक्रमण के खौफ ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता और चुनौती बढ़ा दी है। बुधवार को प्रदेश की स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. अमिता उप्रेती ने कोरोना से निपटने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी को लेकर सभी जिलों के सीएमओ के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग की।
इसमें यात्रा के बीच कोरोना के संक्रमण का खौफ साफ नजर आया। स्वास्थ्य महानिदेशक ने यात्रा की तैयारियों में इस पहलू को भी ध्यान में रखने के निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि यात्रा सीजन शुरू होते ही लोगों की आवाजाही बढ़ने लगेगी। हर साल हजारों की तादाद में श्रद्धालु चारधाम यात्रा पर आते हैं।
यही नहीं मानसरोवर यात्रा पर भी बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। ऐसे में अत्याधिक सर्तकता बरतने की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गढ़वाल मंडल में अप्रैल से शुरू होने वाली चारधाम यात्रा व कुमाऊं मंडल में होने वाली मानसरोवर यात्रा के मद्देनजर आवश्यक तैयारी व किसी भी प्रकार के संक्रमण से बचाव के लिए कार्ययोजना तैयार कर लें।
कोरोना की डर से भू-वैज्ञानिक कांग्रेस स्थगित
कोरोनावायरस ने अब वैज्ञानिक आयोजनों को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। दिल्ली में 36वां अंतर भू-वैज्ञानिक कांग्रेस का आयोजन आठ मार्च को होना था, लेकिन कोरोनावायरस के चलते आयोजन को स्थगित कर दिया गया है। इसमें वीर चंद्र सिंह गढ़वाली औद्यानिकी एवं वानिकी विवि भरसार से भी छह वैज्ञानिकों को प्रतिभाग करना था।
आयोजन का संयोजन नेशनल जियो फिजीकल इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रो. वीपी डिमरी ने किया था। आठ मार्च को होने वाली अंतर भू-वैज्ञानिक कांग्रेस में देश-विदेश से 10 हजार वैज्ञानिकों को शिरकत करनी थी।
आयोजन में दुनिया के भू-वैज्ञानिक व भूगोलवेत्ताओं को हिमालय, मरुस्थल, उत्तरपूर्वी भारत, वैज्ञानिक भ्रमण सहित अनेक गतिविधियों में हिस्सा लेना था। भू- वैज्ञानिक कांग्रेस में उत्तराखंड से 50 वैज्ञानिकों को शिरकत करनी थी। इनमें वाडिया संस्थान, कुमाऊं विवि, गढ़वाल विवि, आईआईटी रुड़की सहित अनेक संस्थानों के वैज्ञानिक शामिल हैं।
भारत-नेपाल के अधिकारियों का आपसी समन्वय पर जोर
भारत एवं नेपाल कोऑर्डिनेशन कमेटी की त्रैमासिक बैठक में आपसी समन्वय बनाने पर जोर दिया गया। बुधवार को बैतड़ी के प्रशासनिक सभागार में भारत एवं नेपाल के अधिकारियों का आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए बैठक हुई।
इस दौरान सीमा क्षेत्र में वन्यजीवों का शिकार रोकने, मानव तस्करी, अवैध तरीके से नशे के कारोबार को रोकने, हत्या और अपराधों से संबंधित जानकारियां साझा करने, अवैध करेंसी को रोकने के साथ ही पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई पर चर्चा हुईं।
पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे, दार्चुला के सीडीओ यदुनाथ पौडेल, बैतड़ी के सीडीओ आनंद पौडेल ने झूलाघाट, धारचूला, जौलजीबी और बलुवाकोट में दोनों देशों के नागरिकों के साथ सौहार्दपूर्ण व्यवहार करने पर चर्चा की।
रोहिंग्या शरणार्थियों को आने से रोकने पर भी चर्चा हुई
एसएसबी 55वीं वाहिनी के कमांडेंट एसके सासनी, 11वीं वाहिनी डीडीहाट के कमांडेट महेंद्र प्रताप, बैतड़ी आर्मफोर्स के डीएसपी अमित सिंह और दार्चुला के डीएसपी दिपेंद्र साही ने सीमा पर पेट्रोलिंग की जानकारी साझा करने पर सहमति जताई।
बैठक में नेपाल के रास्ते रोहिंग्या शरणार्थियों को आने से रोकने पर भी चर्चा हुई। साथ ही महाकाली नदी में रिवर ट्रेनिंग कराने, कोरोनावायरस पर रोकथाम लगाने पर सहमति हुई।
बैठक में पिथौरागढ़ के सीओ आरएस रौतेला, पीडब्लूडी के एसई एमएस धर्मशक्तू, सिंचाई विभाग के एसई फरहान खान, डीआईओ गिरिजा शंकर जोशी, कस्टम इंस्पेक्टर रामजियावन, राजस्व उपनिरीक्षक गोपाल डिनिया, बैतड़ी के डीएसपी दिल्ली नारायण पांडे, दार्चुला के डीएसपी दामोदर बहादुर बिस्ता, कस्टम अधीक्षक रामराज चौरसिया, डीएफओ केशव पराजुए आदि मौजूद रहे।