फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Corona Vaccination in Uttarakhand: QR code of e-vaccine card can also be of Cyber Fraud

कोरोना काल में ठगी: सावधान! ई-वैक्सीनेशन कार्ड के क्यूआर कोड से भी आपको लग सकता है चूना 

Sun, 23 May 2021 11:19 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 23 May 2021 11:19 PM IST
सार

कोरोनाकाल में साइबर अपराधी ठगी के लिए अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं। वैक्सीन पंजीकरण कराने से लेकर दवाइयों की खरीददारी पर ठगी हो रही है।

विज्ञापन
Corona Vaccination in Uttarakhand: QR code of e-vaccine card can also be of Cyber Fraud
साइबर क्राइम (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अगर आपके पास वैक्सीनेशन कार्ड है तो यह खबर आपके लिए है। सोशल मीडिया पर ई-वैक्सीन कार्ड शेयर करने वाले भी ठगों के निशाने पर आ सकते हैं। कार्ड में क्यूआर कोड होता है। जिसमें व्यक्ति की जानकारी होती है। कोड स्कैन होने से साइबर अपराधी आपको चूना लगा सकते हैं। हरिद्वार साइबर सेल ने अलर्ट जारी करते हुए ई-वैक्सीन कार्ड सोशल मीडिया पर शेयर न करने की अपील की है। 

विज्ञापन


उत्तराखंड में कोरोना: 6173 मरीज हुए ठीक, सामने आए 3050 नए संक्रमित, 53 की मौत
विज्ञापन


वैक्सीनेशन को लेकर लोगों में खासा उत्साह है। वैक्सीन लगने के बाद लाभार्थी को डिजिटल कार्ड मिलता है, जिसमें वैक्सीन की पहली और दूसरी डोज की डेट होती है। साथ ही संबंधित व्यक्ति के बारे में डिटेल भी लिखी होती है। इस ई-कार्ड को वैक्सीन लगने के बाद लोग अपने सोशल मीडिया अकाउंट में साझा कर रहे हैं। ऐसे में सक्रिय साइबर ठग डिटेल लेकर संबंधित व्यक्ति को कॉल कर नाम से पुकारते हैं। कई लोग उनके झांसे में आकर ओटीपी भी शेयर कर देते हैं। इससे उनके खाते से रुपये निकल जाते हैं। इसके साथ ही दिए गए मोबाइल नंबर पर बिना कॉल किए लिंक भी शेयर कर खुद को स्वास्थ्य विभाग से होने का हवाला देते हैं। अधिकतर लोग उनके झांसे में आकर ठगी का शिकार हो जाते हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


इस तरह कर रहे ठगी
कोरोना संक्रमण को लेकर फैली दहशत का फायदा उठाते हुए साइबर ठग कोरोना का मुफ्त इलाज, दवा, वैक्सीन के बाद कोरोना से जंग जीतकर आने वाले लोगों को दोबारा संक्रमित न होने की शर्तिया दवा दिलाने के नाम पर ठगी कर रहे हैं। कोरोना काल में लोगों को सहायता और इलाज में खर्च रकम की प्रतिपूर्ति करने के नाम पर ई-मेल, वाट्सएप मैसेज भेजकर ठग झांसे में ले रहे हैं। फिर बैंक खाते की पूरी जानकारी लेकर, हैक कर ऑनलाइन पैसे उड़ा रहे हैं। 

ठगी करने का दूसरा अंदाज 

ऑक्सीजन सिलिंडर, कंसंट्रेटर, फ्लोमीटर, बेड, एंबुलेंस समेत अन्य दवाओं और उपकरणों के नाम पर ये लोग जरूरतमंदों के साथ ठगी कर रहे हैं। इनके चंगुल में फंसकर जरूरतमंद लोग और परेशान हो रहे हैं। ।

वैक्सीनेशन ई-कार्ड क्यों है खास
 -  यह एक तरह का प्रोविजनल सर्टिफिकेट होता है, जोकि हर लाभार्थी को वैक्सीन के दोनों डोज लगने के बाद जारी किया जाता है।
 -  यह सीधे लाभार्थी के मोबाइल में कोविन एप के जरिए भेजा जाता।
 - ई-कार्ड में लाभार्थी से जुड़ी जानकारी, जिसमें लाभार्थी का नाम, उम्र, कौन सा आईडी प्रूफ, पता, बेनिफिशरी रिफरेंस और आईडी होते हैं।
 - सोशल मीडिया पर इन डिटेल्स की जानकारी देने वाले वैक्सीनेशन ई कार्ड को डालने से साइबर ठग इस जानकारी का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं।
 - आईडी से जुड़ी जानकारी के आधार पर खातों से रकम पार करने का खतरा भी बनता है।
 - इसके अलावा आपकी पर्सनल डिटेल के किसी गलत जगह पर शेयर होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

कोई भी पर्सलन जानकारी सोशल मीडिया पर नहीं जाननी चाहिए। क्यूआर कोड में काफी जानकारी होती है। वहीं लोगों को किसी भी लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए। 
- सुंदरम शर्मा, साइबर सेल प्रभारी, हरिद्वार

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed