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कोरोना तीसरी लहर: उत्तराखंड कितना है तैयार? जांच की रफ्तार बढ़ाने के लिए स्टाफ की दरकार

Mon, 17 Jan 2022 12:42 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 17 Jan 2022 12:42 PM IST
सार

प्रदेश में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग का सैंपलिंग बढ़ाने पर फोकस है। वर्तमान में 11 सरकारी और 26 निजी पैथोलॉजी प्रयोगशाला में कोविड आरटीपीसीआर जांच की जा रही है।

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corona third wave: How ready is Uttarakhand, Staff needed to speed up investigation
कोरोना जांच - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग में लैब टेक्नीशियनों की कमी है। ऐसे में कोविड सैंपलों की जांच बढ़ाने की विभाग के सामने एक चुनौती है। हालांकि पहले की तुलना में प्रदेश में कोविड जांच में बढ़ोतरी हुई है। मेडिकल कालेज में लैब टेक्नीशियनों के 329 खाली पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है।

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प्रदेश में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग का सैंपलिंग बढ़ाने पर फोकस है। वर्तमान में 11 सरकारी और 26 निजी पैथोलॉजी प्रयोगशाला में कोविड आरटीपीसीआर जांच की जा रही है। लेकिन सरकारी कोविड लैब में सैंपल जांच का दबाव है। इसके अलावा प्रदेश की सीमाओं, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन पर बाहर से आने वाले लोगों की कोविड जांच बढ़ाने के लिए लैब टेक्नीशियनों की कमी है।
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कोविड सैंपल जांच की रिपोर्ट 24 घंटे के बाद मिल रही है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि कोविड जांच के लिए सभी जिलाधिकारियों, सीएमओ और मेडिकल कालेजों के प्राचार्यों को आवश्यकता के अनुसार टेक्नीशियन रखने के लिए अधिकार दिए हैं। यदि किसी जिले में लैब टेक्नीशियन की जरूरत है तो उन्हें आउटसोर्स के माध्यम से रखा जा सकता है।

कोविड महामारी को देखते हुए पूर्व में भी एक साल के लिए आउटसोर्स पर लैब टेक्नीशियन रखे गए थे। जिनकी सेवाओं को मार्च 2022 तक बढ़ाया गया है। कोविड जांच के लिए किसी जिले में लैब टेक्नीशियनों की कमी है तो सीएमओ के माध्यम से शासन को मांग भेजी जा सकती है। चुनाव आयोग से अनुमति लेकर लैब टेक्नीशियनों को बढ़ाया जा सकता है।
-पंकज कुमार पांडेय, सचिव स्वास्थ्य

देहरादून: टेक्नीशियन संक्रमित, स्टाफ की कमी
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज की कोरोना टेस्टिंग लैब में 10 से अधिक कर्मचारियों के कोरोना संक्रमित होने के बाद आरटीपीसीआर की टेस्टिंग को लेकर संकट खड़ा हो गया है। लैब टेक्नीशियनों की कमी को देखते हुए राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने निर्वाचन आयोग को पत्र भेजकर नई नियुक्तियों के लिए अनुरोध किया है।अनुमति मिलने के साथ ही भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। बता दें,मेडिकल कॉलेज के कोविड टेस्टिंग लैब में पहले से लैब टेक्नीशियनों की भारी कमी है। ऐसे में कई टेक्नीशियनों के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद संकट की स्थिति है।  

हरिद्वार: रिपोर्ट के लिए करना पड़ रहा इंतजार
अकेले मेला अस्पताल में ही हर दिन सौ से तीन सौ लोग कोरोना जांच कराने के लिए आ रहे हैं। इसके अलावा अन्य स्थानों पर लिए गए सैंपल भी आते हैं। लैब की एक दिन में सैंपल जांच करने की क्षमता लगभग दो सौ है। इसकी वजह से कई-कई बार कोरोना सैंपल एक-एक सप्ताह भी लोगों को नहीं मिल पा रहे हैं। इसकी वजह से लोगों को एक-एक सप्ताह तक कोरोना जांच रिपोर्ट का इंतजार करना पड़ रहा है। उधर, स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि लैब की क्षमता कम और सैंपल अधिक होने से जांच रिपोर्ट प्रभावित हो रही हैं। फिर भी प्रयास रहता है कि जांच रिपोर्ट जल्द से जल्द लोगों को दे दी जाए। 

रुद्रप्रयाग: लैब टेक्नीशियन की कमी नहीं

रुद्रप्रयाग जिला चिकित्सालय की पैथोलॉजी लैब में 5 व ब्लड बैंक में 2 लैब टेक्नीशियन तैनात हैं। इसी तरह सीएचसी अगस्त्यमुनि व जखोली में दो-दो टेक्नीशियन हैं। सीएमओ डा. बीके शुक्ला के अनुसार कोरोना जांच के लिए दस लैब टेक्नीशियन हैं, जबकि सैंपल एकत्रित करने के लिए 50 से अधिक कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया है। 

उत्तरकाशी : 29 पदों के सापेक्ष 15 पर तैनाती
जनपद में लैब टेकनीशियन के 29 पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष 15 पदों पर तैनाती है। शेष 14 पदों पर भर्ती के लिए स्वास्थ्य विभाग को स्वीकृति मिली हुई है, लेकिन आचार संहिता के चलते भर्ती नहीं हो पा रही है। सीएमओ डा. केएस चौहान ने बताया कि टेक्नीशियन के रिक्त पदों पर आउटसोर्स के माध्यम से नियुक्तियां की जानी है। 

पौड़ी: 30 टीमें कर रहीं हैं सैंपलिंग
जिले में वर्तमान में 17 लैब टेक्नीशियन सेवारत हैं। सीएमओ पौड़ी डा. प्रवीण कुमार ने बताया कि 1400 से अधिक सैंपल (आरटीपीसीआर) एक दिन में लिए जाने के बाद एक निजी लैब से भी जांच का अनुबंध किया गया है। जनपद में 30 टीमें कोविड सैंपलिंग कर रही हैं। इनमें 15 टीमें ब्लाक स्तर और 10 टीमें जिले की सीमाओं पर मुस्तैद हैं। 

टिहरी : दून और श्रीनगर में करानी पड़ रही जांच
सीएमओ डा. संजय जैन ने बताया कि जिले में आरटीपीसीआर जांच लैब नहीं है, जिससे सैंपल एकत्रित कर जांच के लिए श्रीनगर मेडिकल कालेज, दून मेडिकल कालेज और आईआईपी देहरादून भेजे जा रहे हैं। वहां से 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट मिल रही है। जिले में लैब टेक्नीशियन के 30 पद स्वीकृत हैं, उनमें से 22 कार्यरत हैं। 

चमोली: श्रीनगर और ऋषिकेश से आ रही रिपोर्ट
जनपद में कहीं भी आरटीपीसीआर लैब नहीं है। इसकी जांचें श्रीनगर व ऋषिकेश में से करवाई जा रही हैं। जिला अस्पताल गोपेश्वर के अलावा उपजिला अस्पताल कर्णप्रयाग, सीएचसी जोशीमठ और गैरसैंण में एंटीजन और ट्रूनेट जांच की जा रही हैं। सीएमओ डा. एसपी कुड़ियाल ने बताया कि प्रतिदिन पांच से छह सौ जांचें की जा रही हैं। 

ऊधमसिंह नगर:  रुद्रपुर में प्रतिदिन हो रही 600 जांचें
ऊधम सिंह नगर जिले में वर्तमान में मेडिकल कॉलेज स्थित इकलौती आरटीपीसीआर की लैब में रोजाना करीब 600 सैंपलों की जांच हो रही है। साथ ही दिल्ली, गुरुग्राम के लिए सैंपल जांच के लिए भेजे जा रहे हैं, जबकि जिनोम सिक्वेंसिंग के लिए देहरादून मेडिकल कॉलेज और ऋषिकेश एम्स में सैंपल भेजे जा रहे हैं। 

अल्मोड़ा:  एक हजार रिपोर्ट वर्तमान में लंबित
जिले में रोजाना एक हजार से अधिक जांचें हो रहीं हैं। करीब एक हजार जांच रिपोर्ट लंबित हैं। जिले में लैब तकनीशियन के 29 पद स्वीकृत हैं जिसमें से 14 पद रिक्त हैं। 15 तकनीशियन काम कर रहे हैं। मेडिकल कॉलेज बेस अस्पताल में तकनीशियनों के पांच पद रिक्त हैं जबकि पांच तकनीशियन कार्यरत हैं। 

चंपावत : तीन दिन में मिल रही जांच रिपोर्ट
जिले में स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए अस्थायी रूप से कर्मी रखे गए हैं। चंपावत, लोहाघाट, पाटी, बाराकोट, टनकपुर, बनबसा के अस्पतालों के अलावा नेपाल से लगी सीमा पर जांचें की जा रहीं हैं। रोजाना आरटीपीसीआर की 500 जांचें हो रहीं हैं। हल्द्वानी और हरिद्वार से ये जांच रिपोर्ट तीन दिन में मिल रहीं हैं। 

पिथौरागढ़: धूल फांक रही है आरटीपीसीआर मशीन
कोरोना की पहली लहर में आई आरटीपीसीआर मशीन निर्माणाधीन बेस अस्पताल में धूल फांक रही है। अभी तक माइक्रोबायोलॉजिस्ट की नियुक्ति भी नहीं हो पाई है। इसकी कवायद जारी है। जांच के लिए सैंपल 220 किमी दूर हल्द्वानी भेजे जा रहे हैं। इस कारण जांच रिपोर्ट आने में काफी देरी हो रही है। 

नैनीताल: आईवीआरआई मुक्तेश्वर में मशीन खराब
आरटीपीसीआर जांच के लिए जिले में सुशीला तिवारी लैब मौजूद हैं। यहां पर्याप्त स्टाफ है। रोजाना तीन से चार हजार जांचें हो रहीं हैं। आईवीआरआई मुक्तेश्वर में भी रोजाना 300 जांचें हो रही थी लेकिन पिछले कई महीनों से यहां की आरटीपीसीआर जांच मशीन खराब है, इसके चलते जांच नहीं हो पा रही है। 

बागेश्वर: तीसरे दिन मिल पा रही है जांच रिपोर्ट
जिले में कोविड जांच आरटीपीसीआर के साथ ही ट्रूनेट विधि से हो रही है। ट्रूनेट की जांच रिपोर्ट उसी दिन मिल जाती है, जबकि आरटीपीसीआर की रिपोर्ट हल्द्वानी से तीसरे दिन मिलती है। वर्तमान में करीब सात सौ सैंपल की रिपोर्ट आनी है। बागेश्वर जिला अस्पताल में कोविड जांच के लिए आठ लैब टेकभनीशियन तैनात हैं।  

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