उत्तराखंड में कोरोना : महामंडलेश्वर की मौत के बाद जागा प्रशासन, छावनी में संतों और अनुयायियों की जांच में दिखाई तेजी
अखिल भारतीय श्री पंच निर्वाणी अणि के महामंडलेश्वर कपिल देवदास की मौत से अखाड़ों की छावनियों में कम्युनिटी स्प्रेड की आशंका सही साबित हो रही है।
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मेला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और अखाड़ों की लापरवाही कुंभनगरी पर भारी साबित हुई। कोविड संक्रमित महामंडलेश्वर की मौत के बाद मेला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की नींद टूटी है। आनन-फानन बैरागी कैंप स्थित छावनी में संतों और अनुयायियों की जांच में तेजी दिखाई जा रही है।
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अखिल भारतीय श्री पंच निर्वाणी अणि के महामंडलेश्वर कपिल देवदास की मौत से अखाड़ों की छावनियों में कम्युनिटी स्प्रेड की आशंका सही साबित हो रही है। सूत्रों की अनुसार महामंडलेश्वर की तबीयत पिछले चार-पांच दिनों से खराब थी। तबीयत ज्यादा बिगड़ने के बाद उनको देहरादून भर्ती कराया गया, तब कोविड जांच में उनके संक्रमित होने की पुष्टि हुई।
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गौरतलब है कि मेला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अखाड़ों की छावनियों में कोविड जांच के लिए रैंडम सैंपलिंग से पल्ला झाड़ता रहा है। अखाड़ों ने भी संक्रमण के बढ़ते खतरे के बावजूद स्वास्थ्य विभाग से छावनियों में संतों और अनुयायियों की कोविड जांच के लिए रैंडम सैंपलिंग कराने की मांग नहीं की।
कोविड जांच को लेकर अखाड़ों की चुप्पी नहीं टूटी
हैरानी की बात यह है कि जब अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमंहत नरेंद्र गिरि संक्रमित हुए तब भी कोविड जांच को लेकर अखाड़ों की चुप्पी नहीं टूटी।
कुंभनगरी को कोविड संक्रमण का एपिक सेंटर बनते देर नहीं लगेगी
ऐसे में अगर समय रहते स्वास्थ्य विभाग ने बड़े पैमान पर अखाड़ों की छावनियों में संतों और अनुुयायियों की रैंडम कोविड सैंपलिंग शुरू नहीं की, तो कुंभनगरी को कोविड संक्रमण का एपिक सेंटर बनते देर नहीं लगेगी।
सभी अखाड़ों की छावनियों में रैंडम कोविड सैंपलिंग के टीम गठित कर दी गई। शुक्रवार से कोविड जांच के लिए सैंपल लेने शुुरू कर दिए जाएंगे। बैरागी कैंप में कोविड जांच संतों और अनुयायियों के सैंपल लिए जा रहे हैं।
-डॉ. एसके झा, सीएमओ, हरिद्वार