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टाटा कंपनी की नई बसें लौटाने का सिलसिला शुरू, पहले दिन लौटायी गई सात बसें
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देहरादून। सीआईआरटी विशेषज्ञों की तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर परिवहन निगम ने टाटा कंपनी की सभी नई बसों को लौटाने की प्रक्रिया मंगलवार से शुरू कर दी। मंगलवार सात बसों को कंपनी के प्लांट के लिए रवाना किया गया। प्रबंध निदेशक रणवीर सिंह चौहान के अनुसार तीन के भीतर सभी बसों को प्लांट भेज दिया जाएगा।
बता दें, परिवहन निगम प्रबंधन ने टाटा कंपनी से 150 नई बसें खरीदी थीं। गियर लीवर टूटने की वजह से बसों की खरीद विवादों के घेरे में आ गई। तीन दिन पहले सीआईआरटी के तकनीकी विशेषज्ञ एसएन धोले की अगुवाई में पहुंची टीम की जांच रिपोर्ट के बाद बसों को लौटाने का निर्णय लिया गया। महाप्रबंधक दीपक जैन ने बताया कि मंगलवार को सात बसों को टाटा कंपनी के पंतनगर प्लांट भेज दी गई हैं। बाकी बसें दो-तीन दिन के भीतर टाटा कंपनी को लौटा दी जाएंगी।
कंपनी को काली सूची में डालने की मांग
टाटा कंपनी की बसों में खामियां उजागर होने के बाद कंपनी को काली सूची में डालने की भी मांग जोर पकड़ने लगी है। उत्तराखंड रोडवेज संयुक्त परिषद के प्रदेश महामंत्री दिनेश पंत का कहना है कि टाटा कंपनी की बसों में तकनीकी खामियां उजागर होने के बाद कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने की जरूरत है। इसके अलावा बसों का संचालन ठप होने से परिवहन निगम को जो वित्तीय नुकसान हुआ है उसकी भी भरपाई कंपनी से कराई जाए। हालांकि इस संबंध में प्रबंध निदेशक रणवीर सिंह चौहान का कहना है कि जब कंपनी को किसी प्रकार का वित्तीय भुगतान नहीं हुआ तो रिकवरी कैसे की जा सकती है।
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बता दें, परिवहन निगम प्रबंधन ने टाटा कंपनी से 150 नई बसें खरीदी थीं। गियर लीवर टूटने की वजह से बसों की खरीद विवादों के घेरे में आ गई। तीन दिन पहले सीआईआरटी के तकनीकी विशेषज्ञ एसएन धोले की अगुवाई में पहुंची टीम की जांच रिपोर्ट के बाद बसों को लौटाने का निर्णय लिया गया। महाप्रबंधक दीपक जैन ने बताया कि मंगलवार को सात बसों को टाटा कंपनी के पंतनगर प्लांट भेज दी गई हैं। बाकी बसें दो-तीन दिन के भीतर टाटा कंपनी को लौटा दी जाएंगी।
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कंपनी को काली सूची में डालने की मांग
टाटा कंपनी की बसों में खामियां उजागर होने के बाद कंपनी को काली सूची में डालने की भी मांग जोर पकड़ने लगी है। उत्तराखंड रोडवेज संयुक्त परिषद के प्रदेश महामंत्री दिनेश पंत का कहना है कि टाटा कंपनी की बसों में तकनीकी खामियां उजागर होने के बाद कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने की जरूरत है। इसके अलावा बसों का संचालन ठप होने से परिवहन निगम को जो वित्तीय नुकसान हुआ है उसकी भी भरपाई कंपनी से कराई जाए। हालांकि इस संबंध में प्रबंध निदेशक रणवीर सिंह चौहान का कहना है कि जब कंपनी को किसी प्रकार का वित्तीय भुगतान नहीं हुआ तो रिकवरी कैसे की जा सकती है।
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