मिशन 2022: फेरबदल के बाद उत्तराखंड कांग्रेस में विरोध, पूर्व विधायक नवप्रभात ने मेनिफेस्टो अध्यक्ष पद किया अस्वीकार
कांग्रेसी नेता हरीश धामी के बाद अब नवप्रभात ने भी इस फेरबदल का विरोध जताया है। बता दें कि गुरुवार की रात उत्तराखंड कांग्रेसी खेमे में बड़ा बदलाव किया गया।
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प्रदेश कांग्रेस संगठन में मिशन 2022 को लेकर की गई कवायद के बाद भी कांग्रेस धड़ों में बंटी नजर आ रही है। पार्टी हाईकमान ने 10 कमेटियों का गठन कर करीब 180 से ज्यादा सदस्यों की सूची जारी की है। जिसमें हर धड़े को खुश करने की कोशिश की गई है, लेकिन बावजूद इसके पार्टी में अंसतोष के सुर सुनाई दे रहे हैं।
अपने मन मुताबिक पदों के बंटवारे के बाद भी समितियों में कुछ अप्रत्याशित नामों को लेकर पूर्व सीएम हरीश रावत नाराज बताए जा रहे हैं। कभी हरीश के सिपहसलार रहे पूर्व मंत्री किशोर उपाध्याय, पूर्व मंत्री नवप्रभात और विधायक हरीश धामी भी खासे नाराज बताए जा रहे हैं।
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नव प्रभात तो अपनी नाराजगी का खुलकर इजहार भी कर चुके हैं। किशोर उपाध्याय और नव प्रभात ब्राह्मण नेता के तौर पर प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल थे, लेकिन दोनों को ज्यादा तरजीह नहीं मिली है।
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पूर्व मंत्री नवप्रभात ने पद लेने से किया इनकार
पूर्व मंत्री नवप्रभात ने लिस्ट जारी होने के बाद खुलकर अपनी नाराजगी का इजहार किया। अमर उजाला से उन्होंने कहा कि उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के लिए एआईसीसी की ओर से लिया गया निर्णय प्रदेश पार्टी हित में नहीं है। इससे राज्य में कांग्रेस की समस्याओं का हल नहीं होगा। पार्टी को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए। लिस्ट में पूर्व मंत्री नवप्रभात को मेनिफेस्टो कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त करने के साथ-साथ कोर और समन्वय समितियों का सदस्य भी बनाया गया है। जिसे उन्होंने स्वीकार करने से मना कर दिया है।
नवप्रभात ने बताया कि वे पहले भी दो बार इस पद रह चुके हैं। इस बार उन्होंने अपनी अनइच्छा से पार्टी हाईकमान को अवगत करा दिया है। उन्होंने चार कार्यकारी अध्यक्ष बनाने के फैसले पर भी सवाल उठाए हैं। इसके अलावा उन्होंने कहा कि उनको मेनिफेस्टो कमेटी की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन जिनके नेतृत्व में 2022 का चुनाव लड़ा जाना है, वही कांग्रेस की नीति तय करें तो ज्यादा ठीक रहेगा।
राहुल गांधी से मिले गणेश गोदियाल
वहीं उत्तराखंड कांग्रेस के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल शुक्रवार को राहुल गांधी से मिले। उनके साथ पार्टी प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव भी मौजूद रहे। राहुल गांधी ने गणेश गोदियाल को शुभकामनाएं दीं।
धामी पहले गुस्सा हुए और फिर मान गए
लिस्ट जारी होते ही सबसे पहली प्रतिक्रिया धारचूला विधायक हरीश धामी की सामने आई। सोशल मीडिया में उनके पार्टी छोड़ने तक की भी खबरें चलीं। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच उन्होंने अपनी नाराजगी भी जाहिर की। उनकी नाराजगी चार कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने और आर्येंद्र शर्मा को कोषाध्यक्ष बनाए जाने को लेकर थी। उनके अनुसार जिस व्यक्ति ने पार्टी के कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ चुनाव लड़ा, उसको पार्टी में कोषाध्यक्ष बनाना उचित नहीं था।
बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर हरीश रावत ने धामी से फोन पर बात कर गुस्सा शांत करने की बात कही। इसके बाद शुक्रवार को धामी के सुर बदल गए। उन्होंने कहा कि अब उनकी किसी से कोई नाराजगी नहीं है। कहा कि हमारी सभी मांगें पूरी हो गई हैं। हरीश रावत को पार्टी ने चेहरा बनाया है। इसके अलावा ब्राह्मण समाज से गणेश गोदियाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। प्रीतम सिंह को भी नेता प्रतिपक्ष बनाकर सम्मान दिया गया है। वैसे भी प्रदेश अध्यक्ष के नाते हुए उनका कार्यकाल पूरा हो गया था।
हरीश रावत को भी धीरे से दिया जोर का झटका
विभिन्न कमेटियों में अपने लोगों की ताजपोशी कराने में सफल रहे राजनीतिक धुरंधर हरीश रावत को भी पार्टी हाईकमान ने धीरे से जोर का झटका दिया है। बताया जा रहा है कि कार्यवाहक अध्यक्षों की जो सूची जारी की गई है, उसमें एक नाम राजपाल खरोला का भी था। सूची फाइनल करने से पूर्व पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल की प्रीतम सिंह से फोन पर बातचीत हुई।
इसमें प्रीतम ने खुलकर अपनी नाराजगी दर्ज कराई। इसके बाद राजपाल खरोला का नाम हटाकर रंजीत रावत का नाम जोड़ा गया। जिसकी हरीश को भनक तक नहीं लगने दी गई। एक समय था, जब रंजीत रावत हरीश रावत के कंमाडर के तौर पर जाने जाते थे। लेकिन वर्ष 2017 के विस चुनाव के बाद दोनों के बीच अनबन हो गई। सूची में शामिल दूसरा नाम आर्येंद्र शर्मा का है, जिसे हरीश रावत के लिए बड़ी राजनीतिक हार के तौर पर देखा जा रहा है।