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धर्मपुर का नहीं मैं उत्तराखंड का मंत्रीः हूं

Sun, 13 Nov 2016 11:08 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 13 Nov 2016 11:08 AM IST
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congress leader dinesh agarwal interview
dinesh agarwal

उत्तराखंड के पहले मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी को लगातार दो बार चुनावी शिकस्त दे चुके कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल का कांग्रेस में बड़ा कद है। विधानसभा चुनाव में जीत की हैट्रिक पूरी कर चुके अग्रवाल पर यह आरोप है कि कैबिनेट मंत्री बनने के बावजूद धर्मपुर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।

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कैंट से बड़े चेहरे की तलाश के बीच उनके नाम पर भी चर्चा की बात सामने आई, लेकिन अग्रवाल उसे कोरी अफवाह बताते हैं। मुख्यमंत्री हरीश रावत के करीबी माने जाने वाले दिनेश अग्रवाल का कहना है कि वे धर्मपुर से ही चुनाव लड़ेंगे। अमर उजाला के संवाददाता बिशन सिंह बोरा ने प्रदेश के खेल एवं वन मंत्री पर सवालों के तमाम तीखे तीर चलाए। जवाब में उन्होंने क्या कहा, आप भी जानिए...
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भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को आपने दो महीने से खाली बैठाया हुआ है?
- ऐसा नहीं है मुख्यमंत्री हरीश रावत पहले उन्हें ओएसडी बनाना चाहते थे, लेकिन अब उन्हें दिल्ली में एनजीटी के लंबित प्रकरणों की मानीटरिंग के लिए दिल्ली में बैठाया जाएगा। इस पर अनुमोदन हो चुका है। इन सब वजहों से इसमें कुछ देरी हुई है। 
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लोगों का आरोप है कि आप धर्मपुर के ही मंत्री बनकर रह गए ?
- मैं नहीं समझ पा रहा हूं कि लोग किस तरह से यह आरोप लगा रहे हैं? मैं पिथौरागढ़ व चंपावत का प्रभारी मंत्री रहा हूं। वहां के लोग इसका सही जवाब दे पाएंगे। पहले मेरे पास खेल मंत्रालय ही था। हल्द्वानी, पिथौरागढ़ और दून में स्टेडियम बनवाया। हर जनपद में खेल मैदान बनाए। 

आप कांग्रेस प्रदेश संगठन के फैसले को तवज्जो नहीं दे रहे हैं। विधायक हो या कार्यकर्ता टिकट के लिए सबको आवेदन करना था, लेकिन आपने आवेदन नहीं किया ? 
- सीटिंग विधायकों को आवेदन की जरूरत नहीं होती। क्या मुख्यमंत्री हरीश रावत, वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश, सिंचाई मंत्री यशपाल आर्य, स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने कहीं से आवेदन किया है। पार्टी हाईकमान कहेगा तो आवेदन करूंगा। रही बात ब्लॉक व बूथ कार्यकारिणी की 143 बूथ हैं और चार ब्लॉक कार्यकारिणी गठित होनी हैं, संगठन के साथ मिलकर इनमें काम किया जा रहा है। 

सरकार और पीडीएफ की जुगलबंदी पर आपका क्या मत है ?
- पीडीएफ के बारे में पार्टी हाईकमान को निर्णय लेना है और हाईकमान ने मुख्यमंत्री हरीश रावत को निर्णय लेने का अधिकार दिया हुआ है। पीडीएफ भरोसे का साथी है, सरकार को गिराने का षड्यंत्र हुआ हो या दस विधायकों की कांग्रेस से बगावत का मामला, पीडीएफ हर मुसीबत में हमारे साथ खड़ा रहा। 

हरिद्वार में अवैध खनन पर आप पर भी अंगुलियां उठती हैं, आरोप यह भी है कि आपने अपने बेटे को खनन के पट्टे दे दिए?
 -  भाजपा के लोग इस तरह के आरोप लगा रहे हैं। वन विभाग की किसी भी नीति के तहत पट्टे आवंटित नहीं किए जा सकते, मेरा बेटा यदि अपना कोई व्यापार कर रहा है तो उसके काम की सराहना होनी चाहिए।

आईएफएस अधिकारियों के हाल में हुए तबादलों में पैसे के प्रभाव की चर्चा रही ? 
- पहली बार आईएफएस अधिकारियों के तबादले इतनी पारदर्शिता से हुए, उन लोगों से पूछो जिनके तबादले हुए या फिर नहीं हो पाए, वह आपको बताएंगे। खुद आईएफएस एसोसिएशन ने पारदर्शी तबादले होने पर आभार जताया है। 

प्रदेश में वन्य जीव, फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, खासकर बंदरों के आतंक से लोग परेशान हैं, लेकिन इससे राहत को कोई योजना नहीं बन पाई ?

बंदरों के आतंक से निजात के लिए इनके बंध्याकरण का काम किया गया है। वन विभाग में विशेषज्ञों द्वारा वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। हमने मानव व वन्य जीव संघर्ष में मुआवजे की राशि भी दोगुनी कर दी।

आरोप है कि दौड़वाला में आपने अपने फार्म हाउस और भूमि पर सरकारी विकास योजनाओं का 50 लाख रुपया लगवा दिया ?
- चैलेंज के साथ कहता हूं यदि एक भी रुपया लगा हो। मेरे खिलाफ इस तरह के भ्रष्टाचार का कोई मामला मिलता है तो मैं राजनीति से संन्यास ले लूंगा। मैं कानून का विद्यार्थी रहा हूं इस तरह के आरोप लगाने की हरकतें बंद न हुई तो मानहानि का मुकदमा करूंगा।  मेरी जमीन के सामने से लोनिवि की सड़क जा रही है, उसमें तो सरकारी पैसा लगेगा ही। इसमें मेरा क्या दोष है।

कानाफूसी हो रही है कि जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) की नियुक्ति निजी कारणों से आप लटकाए हुए हैं?
- ऐसा नहीं है डीएम और जिला जज का पैनल इसके लिए प्रस्ताव भेजता है। इससे पहले विज्ञप्ति जारी होती है। प्रस्ताव आने पर नियुक्तियां की जाएंगी।

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