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Dehradun News: गन्ना किसानों के मुद्दे पर कांग्रेस का पलटवार
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देहरादून। निर्दलीय विधायक उमेश शर्मा के कांग्रेस पर गन्ना किसानों का साथ नहीं देने के आरोपों पर प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष राजीव महर्षि ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में गन्ने के राज्य परामर्शित मूल्य, चीनी मिलों और किसानों के बकाया भुगतान से जुड़े कई फैसले लिए गए।
महर्षि ने कहा कि 2012-13 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने गन्ने का राज्य परामर्शित मूल्य 250 रुपये से बढ़ाकर 285 रुपये प्रति क्विंटल किया था। उपलब्ध समकालीन रिपोर्टों के अनुसार यह करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि थी।
उन्होंने 2014-15 के दौरान किसानों के भुगतान के लिए बनाई गई व्यवस्था का भी उल्लेख किया। उस समय 280 रुपये प्रति क्विंटल के एसएपी में से 240 रुपये 14 दिनों के भीतर, 20 रुपये पेराई सत्र समाप्त होने के तीन महीने के भीतर और शेष 20 रुपये सरकारी सहायता के माध्यम से मिलों की ओर से भुगतान किए जाने की व्यवस्था की गई थी।
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महर्षि ने कहा कि तत्कालीन सरकार ने चीनी मिलों को वित्तीय राहत देने के साथ किसानों के बकाया भुगतान का मुद्दा भी उठाया। मार्च 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने केंद्र से गन्ना किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए 500 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग की थी। उस समय राज्य की चीनी मिलों पर किसानों का बड़ा बकाया भी बताया गया था।
उन्होंने कहा कि जुलाई 2015 में सरकार ने निजी चीनी मिलों को किसानों के बकाया भुगतान का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा निर्धारित समय में चुकाने के निर्देश दिए थे। वहीं, नवंबर 2015 में राज्य सरकार ने गन्ना किसानों के लंबित भुगतान के लिए 71 करोड़ रुपये जारी करने की घोषणा की थी। महर्षि ने कहा कि उमेश शर्मा को कांग्रेस से सवाल करने के बजाय मौजूदा सरकार के कार्यकाल में किसानों के लिए किए गए कार्यों पर सवाल उठाना चाहिए।
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महर्षि ने कहा कि 2012-13 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने गन्ने का राज्य परामर्शित मूल्य 250 रुपये से बढ़ाकर 285 रुपये प्रति क्विंटल किया था। उपलब्ध समकालीन रिपोर्टों के अनुसार यह करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि थी।
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उन्होंने 2014-15 के दौरान किसानों के भुगतान के लिए बनाई गई व्यवस्था का भी उल्लेख किया। उस समय 280 रुपये प्रति क्विंटल के एसएपी में से 240 रुपये 14 दिनों के भीतर, 20 रुपये पेराई सत्र समाप्त होने के तीन महीने के भीतर और शेष 20 रुपये सरकारी सहायता के माध्यम से मिलों की ओर से भुगतान किए जाने की व्यवस्था की गई थी।
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महर्षि ने कहा कि तत्कालीन सरकार ने चीनी मिलों को वित्तीय राहत देने के साथ किसानों के बकाया भुगतान का मुद्दा भी उठाया। मार्च 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने केंद्र से गन्ना किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए 500 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग की थी। उस समय राज्य की चीनी मिलों पर किसानों का बड़ा बकाया भी बताया गया था।
उन्होंने कहा कि जुलाई 2015 में सरकार ने निजी चीनी मिलों को किसानों के बकाया भुगतान का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा निर्धारित समय में चुकाने के निर्देश दिए थे। वहीं, नवंबर 2015 में राज्य सरकार ने गन्ना किसानों के लंबित भुगतान के लिए 71 करोड़ रुपये जारी करने की घोषणा की थी। महर्षि ने कहा कि उमेश शर्मा को कांग्रेस से सवाल करने के बजाय मौजूदा सरकार के कार्यकाल में किसानों के लिए किए गए कार्यों पर सवाल उठाना चाहिए।