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जैव विविधता पर मंडरा रहे खतरे को लेकर पर्यावरणविदों, वनस्पति विज्ञानियों, वन्यजीव विज्ञानियों ने जताई चिंता

Sun, 23 May 2021 12:46 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 23 May 2021 12:46 AM IST
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Concerns over biodiversity hovering
भारतीय वन्यजीव संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ. जीएस रावत ने कहा कि समय रहते जैव विविधता के संरक्षण को लेकर कारगर कदम नहीं उठाए गए तो इसका एक बड़ा हिस्सा खत्म हो जाएगा। वह अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर यूकॉस्ट की ओर से आयोजित वर्चुअल सेमिनार में बतौर मुख्य अतिथि बोल कर रहे थे ।
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डॉ. रावत ने ‘उत्तराखंड के संदर्भ में जैव विविधता संरक्षण के विज्ञान, नीति एवं कार्य, आत्मनिरीक्षण एवं संभावना’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने हिमालयी पर्यावरण, पारिस्थितिकी तंत्र, वनस्पतियों और जीवों के संरक्षण में चुनौतियों, सीबीडी, जैव विविधता प्रबंधन समिति, विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय नीतियां व एजेंडा, और उत्तराखंड के लिए प्राथमिकताएं जैसे मुद्दों पर प्रकाश डाला।
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यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. राजेंद्र पाल ने कहा कि जैव विविधता के संरक्षण में लोगों की सहभागिता भी जरूरी है। एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एएन पुरोहित, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. डीके महेश्वरी समेत कई वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए। सेमिनार में यूकॉस्ट के संयुक्त निदेशक डॉ. डीपी उनियाल, डॉ. अपर्णा शर्मा सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर यूकॉस्ट, जीएस रौतेला सलाहकार साइंस सिटी के अलावा कई डिग्री कॉलेजों के शिक्षक और छात्र शामिल हुए।
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सुंदरलाल बहुगुणा को दी श्रद्धांजलि
सेमिनार के दौरान पर्यावरणविद् स्वर्गीय सुंदरलाल बहुगुणा के निधन पर गहरा शोक जताते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। वक्ताओं ने बताया कि स्वर्गीय बहुगुणा 2018 में विज्ञानधाम में जैव विविधता पार्क का उद्घाटन करने आए थे। वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर स्वर्गीय बहुगुणा के योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता।
प्रकृति से छेड़छाड़ से बिगड़ रही जैव विविधता
देहरादून। तेजी से खत्म हो रही जैव विविधता के लिए मानवीय गतिविधियां बहुत अधिक जिम्मेदार हैं। प्रकृति के साथ छेड़छाड़ के कारण ही मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ी हैं। यह बात भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद के महानिदेशक व वन अनुसंधान संस्थान के निदेशक अरुण सिंह रावत ने अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता पर आयोजित वेबिनार में कही।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में हो रहा बदलाव भी जैवविविधता के लिए घातक है। इसे रोकने को लेकर ठोस कदम उठाने का वक्त आ गया है। वनस्पति विज्ञान प्रभाग, वन अनुसंधान संस्थान के प्रमुख डॉ. अनुप चंद्रा ने बताया कि जैवविविधता का संरक्षण पारिस्थितिकी संतुलन के लिए आवश्यक है।

इस अवसर पर कीट पतंगों पर लघु फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। साथ ही अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर केंद्रीय विद्यालय एवं नवोदय विद्यालय के छात्रों छात्राओं के लिए आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार भी प्रदान किए गए। कार्यक्रम में वैज्ञानिक डॉ. चरण सिंह, विस्तार प्रभाग के प्रमुख दीपक मिश्रा, डा. देवेन्द्र कुमार, रामबीर सिंह, रमेश सिंह, यथार्थ दुलगचा, समेत कई वैज्ञानिक शामिल थे।
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