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Dehradun News: मानव वन्य जीव संघर्ष की रोकथाम के लिए समुदाय की सहभागिता जरूरी
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वन मुख्यालय में मानव वन्यजीव संघर्ष निवारण के लिए कार्यशाला आयोजित
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। मानव वन्य जीव संघर्ष की रोकथाम के लिए समुदाय की सहभागिता जरूरी है। बिना समुदाय की सहभागिता के कुछ नहीं किया जा सकता। यह बात प्रमुख वन संरक्षक रंजन कुमार मिश्र ने वन मुख्यालय में मानव वन्यजीव संघर्ष निवारण के लिए हुई कार्यशाला में कही।
प्रमुख वन संरक्षक ने कहा, केंद्र सरकार की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक में मानव वन्य जीव संघर्ष के मामलों का संज्ञान लिया गया है। बैठक में निर्णय लिया गया कि इस मसले पर राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में बैठकें होंगी। ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों एवं प्रभावितों के साथ हुई इस बैठक में आए सुझावों को केंद्र सरकार के सामने रखा जाएगा। उन्होंने कहा, राज्य में पिछले तीन महीने में भालू के इस तरह से हमले इससे पहले कभी नहीं हुए।
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महिलाओं को मवेशियों के लिए चारा उपलब्ध कराएगा विभाग
प्रमुख वन संरक्षक रंजन कुमार मिश्र ने कहा, महिलाएं जंगल में चारा लेने के लिए जाती हैं। ऐसे में कई बार जंगली जानवर उन पर हमला करते हैं। विभाग की ओर से महिलाओं को उनके मवेशियों के लिए चारा उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए वन विभाग की ओर से पशुपालन विभाग को लिखा जाएगा।
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इस साल 25 हजार बंदरों का होगा बंध्याकरण
प्रमुख वन संरक्षक ने कहा, इस साल 25 हजार बंदरों का बंध्याकरण कराया जाएगा। इससे पहले डेढ़ लाख बंदरों का बंध्याकरण कराया जा चुका है।
वहीं जंगलों में 40 प्रतिशत से अधिक फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं। अगले चार से पांच साल में इसका असर देखने को मिलेगा।
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सरकार के सामने रखे जाएंगे ग्रामीणों के सुझाव : बंसल
राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने कहा, कार्यशाला में ग्रामीणों की ओर से बताया गया कि वन्य जीवों के हमले में मारे गए बछड़े व छानी तोड़े जाने का उन्हें मुआवजा नहीं मिलता। इसके अलावा ग्रामीणों ने प्रभावित क्षेत्रों में सोलर लाइट लगाने की मांग की है। उनकी सभी समस्याओं से सरकार को अवगत कराया जाएगा। कार्यशाला में सांसद कल्पना सैनी भी मौजूद रही।
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अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। मानव वन्य जीव संघर्ष की रोकथाम के लिए समुदाय की सहभागिता जरूरी है। बिना समुदाय की सहभागिता के कुछ नहीं किया जा सकता। यह बात प्रमुख वन संरक्षक रंजन कुमार मिश्र ने वन मुख्यालय में मानव वन्यजीव संघर्ष निवारण के लिए हुई कार्यशाला में कही।
प्रमुख वन संरक्षक ने कहा, केंद्र सरकार की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक में मानव वन्य जीव संघर्ष के मामलों का संज्ञान लिया गया है। बैठक में निर्णय लिया गया कि इस मसले पर राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में बैठकें होंगी। ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों एवं प्रभावितों के साथ हुई इस बैठक में आए सुझावों को केंद्र सरकार के सामने रखा जाएगा। उन्होंने कहा, राज्य में पिछले तीन महीने में भालू के इस तरह से हमले इससे पहले कभी नहीं हुए।
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महिलाओं को मवेशियों के लिए चारा उपलब्ध कराएगा विभाग
प्रमुख वन संरक्षक रंजन कुमार मिश्र ने कहा, महिलाएं जंगल में चारा लेने के लिए जाती हैं। ऐसे में कई बार जंगली जानवर उन पर हमला करते हैं। विभाग की ओर से महिलाओं को उनके मवेशियों के लिए चारा उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए वन विभाग की ओर से पशुपालन विभाग को लिखा जाएगा।
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इस साल 25 हजार बंदरों का होगा बंध्याकरण
प्रमुख वन संरक्षक ने कहा, इस साल 25 हजार बंदरों का बंध्याकरण कराया जाएगा। इससे पहले डेढ़ लाख बंदरों का बंध्याकरण कराया जा चुका है।
वहीं जंगलों में 40 प्रतिशत से अधिक फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं। अगले चार से पांच साल में इसका असर देखने को मिलेगा।
सरकार के सामने रखे जाएंगे ग्रामीणों के सुझाव : बंसल
राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने कहा, कार्यशाला में ग्रामीणों की ओर से बताया गया कि वन्य जीवों के हमले में मारे गए बछड़े व छानी तोड़े जाने का उन्हें मुआवजा नहीं मिलता। इसके अलावा ग्रामीणों ने प्रभावित क्षेत्रों में सोलर लाइट लगाने की मांग की है। उनकी सभी समस्याओं से सरकार को अवगत कराया जाएगा। कार्यशाला में सांसद कल्पना सैनी भी मौजूद रही।