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नए साल में सीएम को पार करना होगा 'अग्निपथ'
अनूप वाजपेयी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 17 Nov 2013 12:10 AM IST
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नया साल उत्तराखंड की राजनीति में नई तस्वीर और समीकरण बनाएगा। जनवरी में होने वाले पंचायत चुनाव पर दोनों ही बड़ी पार्टियों कांग्रेस-भाजपा की नजर है।
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चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस में कोई पंचायत न हो इसके लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को बड़ी परीक्षा देनी होगी। इस चुनाव में देश की राजनीतिक नब्ज टटोलने का मौका तो मिलेगा ही साथ ही प्रदेश सरकार खासकर बहुगुणा सरकार के कामकाज को प्रदेश की ग्रामीण जनता कसौटी पर कसेगी।
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पहाड़ों का उजाड़ गई आपदा
उत्तराखंड का करीब 70 फीसदी हिस्सा ग्रामीण आबादी में आता है। पहाड़ों की बात करें तो आपदा पूरी तरह से उजाड़ गई है। सरकार की ओर से भरपाई की जा रही है लेकिन लोग आपदा के सात महीनों बाद राहत को किस नजरीये से देखते हैं इसका खुलासा पंचायत चुनाव में होगा।
दरअसल 13 पंचायतों में मैदान की चार पर ही कांग्रेस व अन्य का कब्जा है। पहाड़ की पंचायतों पर बीजेपी है। देहरादून पंचायत अप्रत्यक्ष रूप से बीजेपी के खाते में ही आती है। ऐसे में बीजेपी की पूरी कोशिश एक बार फिर कुछ इसी तरह का परिणाम लाने की होगी।
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कांग्रेस को पहाड़ की पंचायतों पर चढ़ने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ेगी। अगर पहाड़ की पंचायतों में कांग्रेस दबदबा बनाती है तो इसका क्रेडिट सिर्फ और सिर्फ विजय बहुगुणा की सरकार को जाएगा। मुख्यमंत्री के लिए पंचायत चुनाव टिहरी से बेटे साकेत बहुगुणा की हार का बदला लेने का भी मौका है।
मुसीबतें फिर बढ़ेंगी
हाल के महीनों में साकेत को परिपक्व राजनेता की तौर पर पेश किया गया। तमाम मौके आए जब साकेत ने मध्यस्तता कर सरकार की मुसीबतें दूर की हैं।
ऐसे में पार्टी की जीत पिता-पुत्र का राजनीतिक ग्राफ बढ़ा सकते हैं। मुख्यमंत्री के खिलाफ लंबे समय से उनकी पार्टी से उठने वाली आवाज भी मंद पड़ेगी। नतीजे उल्टे आते ही नए साल की आस में बैठे उनके विरोधी पार्टी में पंचायत करा उनकी मुसीबतें फिर बढ़ाएंगे।
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