फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   cm harish rawat now tension free.

सीएम हरीश रावत की उलझने खत्म, दूर हुआ कांटा

Thu, 19 May 2016 04:05 AM IST
रजा शास्त्री/अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 19 May 2016 04:05 AM IST
सार

  • रास्ता साफ दावेदारी करने वाला कोई नहीं
  • पार्टी में परदे के पीछे से नहीं होगा हमला

विज्ञापन
cm harish rawat now tension free.
हरीश रावत - फोटो : AmarUjala

विस्तार

कांग्रेस के बागी विधायकों का भाजपा में जाना मुख्यमंत्री हरीश रावत के लिए राहत देने वाला है। रावत की उलझनें बढ़ाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और पूर्व मंत्री हरीश रावत अब उनके रास्ते में नहीं आएंगे। बागी विधायकों का कांग्रेस से नाता टूटने पर पार्टी के अंदर रावत को अब नीति निर्णय में किसी का विरोध नहीं झेलना पड़ेगा। परदे से पीछे होने वाले इन नेताओं के गुटों के हमले बंद हो जाएंगे। हरीश रावत सुकून से पार्टी मामलों में निर्णय ले सकेंगे।

विज्ञापन


मुख्यमंत्री पद के लिए हरीश रावत के प्रदेश कांग्रेस के अंदर विजय बहुगुणा और हरक सिंह रावत ही मुख्य प्रतिद्वंदी रहे हैं। वर्ष 2013 में आपदा के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी जाने की टीस बहुगुणा के दिल को निरंतर सालती रही। इसके लिए वह हरीश रावत को जिम्मेदार मानते थे।
विज्ञापन


बहुगुणा हमेशा रावत सरकार के कामकाज में खामियां निकालते रहे। इसकी शिकायत हाईकमान से भी की जाती रही। बहुगुणा के भाजपा में जाने से अब यह दिक्कत हरीश रावत को नहीं आएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

हरक भी रहे हैं सीएम पद के मजबूत दावेदार

cm harish rawat now tension free.
कांग्रेस के नौ बागियों ने थामा भाजपा का हाथ। - फोटो : पीटीआई

मुख्यमंत्री के मजबूत दावेदारों में हरक सिंह रावत भी रहे हैं। उनकी अति महत्वाकांक्षा हरीश रावत के लिए समस्या बनी थी। खुद मुख्यमंत्री रावत भी कहते रहे कि हरक सिंह रावत के दबाव में उन्हें अनचाहे फैसले लेने पड़े थे। कई बार हरक ने अपनी बात मुख्यमंत्री से जबरदस्ती मनवाई। यह स्थिति अब मुख्यमंत्री को नहीं झेलनी पड़ेगी।

बहुगुणा और हरक सिंह रावत गुट का कांग्रेस के अंदर अच्छा दबदबा भी रहा है। इनके गुट आए दिन परदे के पीछे से हरीश रावत पर हमला करते थे।

बहुगुणा और हरक सिंह रावत गुट के लोग अब या तो उनके साथ भाजपा में जाएंगे या फिर हरीश रावत के साथ आ जाएंगे। पार्टी की सीनियर नेताओं में इंदिरा हृदयेश हैं जो हरीश रावत के साथ हैं और सियासी संकट में उनके कांधे से कांधा मिलाकर खड़ी रहीं। प्रदेश पार्टी के नीति निर्धारण में हरीश रावत की राह फिलहाल अब निष्कंटक हो गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed