नर्सिंग होम-अस्पतालों की मनमानी पर लगेगी रोक
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प्रदेश में अब प्राइवेट नर्सिंग होम और अस्पताल मनमानी नहीं कर पाएंगे। इन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए राज्य में क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट लागू कर दिया गया है। एक्ट लागू होने के बाद सभी इकाईयां सरकार के नियंत्रण में रहेंगी और नियमों की अनदेखी करने वालों पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
प्रदेश में पिछले लंबे समय से क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट को लागू करने की कवायद चल रही थी। हालांकि प्राइवेट अस्पतालों और कुछ संगठनों के दबाव में इसमें लगातार देरी हो रही थी। करीब दो साल की कसरत के बाद सरकार ने आखिरकार इसे लागू कर ही दिया।
एक्ट में यह है नियम
एक्ट के अनुसार प्रदेश के सभी जिलों में मान्यता प्राप्त चिकित्सा प्रणाली एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस, बीयूएमएस, बीएचएमएस, बीएसएमएस, योग, नेचुरोपैथी और सोवा रिगपा के डिग्रीधारकों से संचालित संस्थानों का जिला रजिस्ट्रीकरण प्राधिकरण में पंजीकरण किया जाएगा।
इसके लिए उत्तराखंड क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट परिषद का गठन किया जाएगा। सभी पंजीकृत संस्थाओं को एक्ट 2010 (रजिस्ट्रीकरण और विनियमन) के तहत नियमों को क्रियान्वित करना होगा। एक्ट के अनुसार सभी सरकारी, केंद्रीय, राज्य या स्थानीय निकाय स्थापित, नियंत्रित और प्रबंधन वाले संस्थानों का पंजीकरण मुफ्त होगा।
संस्थाओं का पंजीकरण और नवीनीकरण करेगा प्राधिकरण
प्राधिकरण संस्थाओं का पंजीकरण करने के साथ ही नियमों के उल्लंघन की शिकायतों का परीक्षण भी करेगा। संस्थानों का पंजीकरण और नवीनीकरण भी प्राधिकरण के स्तर से होगा।
अध्यक्ष की अध्यक्षता में प्राधिकरण की प्रत्येक तीन माह में न्यूनतम एक बैठक आयोजित होगी। प्राधिकरण प्रत्येक तीन माह में नियमों का उल्लंघन करने वाले और अपंजीकृत संस्थानों के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट राज्य परिषद को देगी।
प्राधिकरण के अधिकार
नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए प्राधिकरण और उसके सदस्यों को कार्रवाई के अधिकार भी दिए गए हैं। प्राधिकरण को नियमों के उल्लंघन की शिकायतों की जांच का अधिकार होगा। इसके तहत प्राधिकरण के आदेश पर संबंधित अधिकारी किसी भी संस्थान में दाखिल होने, निरीक्षण करने और तलाशी लेने में सक्षम होंगे। इसके अलावा रजिस्ट्रीकरण, निलंबन और निरस्त करने का अधिकार भी होगा।
कैसे होगा पंजीकरण
एक्ट के तहत पंजीकरण के लिए व्यक्तिगत, डाक या ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। अनंतिम पंजीकरण की मंजूरी को प्राधिकरण कोई पूछताछ नहीं करेगा। आवेदन के 10 दिनों के भीतर ही अनंतिम प्रमाण पत्र जारी हो जाएगा। स्थाई पंजीकरण पर प्राधिकरण अधिकतम एक माह में निर्णय लेगा। स्थाई पंजीकरण का नवीनीकरण पांच वर्ष में होगा।
अस्पतालों को करने होंगे यह काम
एक्ट के अनुसार प्रत्येक प्राइवेट संस्थान को अनंतिम प्रमाण पत्र हासिल करने के 45 दिनों के भीतर पंजीकृत इस्टेब्लिशमेंट का नाम, पता, स्वामित्व, उत्तरदायी व्यक्ति का नाम, किस चिकित्सा विधा की सेवाएं दी जा रही हैं, सेवा का प्रकार व प्रकृति, चिकित्सक, नर्स और अन्य कर्मियों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करना होगा। उन्हें यह ब्योरा प्राधिकरण की वेबसाइट पर भी अनिवार्य रूप से अपलोड करना होगा। चिकित्सा सुविधा देने वाले संस्थानों को सेवाओं के एवज में वसूले जाने वाले शुल्क का पूरा ब्योरा प्रदर्शित करना होगा।
उल्लंघन पर क्या मिलेगी सजा
नियमों का उल्लंघन करने वाले, बिना पंजीकरण स्थापना करने पर पहले अपराध के लिए 50 हजार, दूसरे अपराध के लिए दो लाख और इसके बाद पांच लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। गैर पंजीकृत संस्थानों पर 25 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। जुर्माना न देने पर भू राजस्व बकाया के रुप में यह धनराशि वसूली जाएगी। प्राधिकरण के फैसले के खिलाफ निर्धारित शुल्क जमा कर अपील की जा सकेगी।
मंत्री का है कहना
एक्ट में आईएमए और अन्य संस्थाओं से मिले सुझावों का लागू किया गया है। उनकी सहमति से ही एक्ट तैयार किया गया है। एक्ट लागू होने से लोगों को खासा लाभ मिलेगा।
-सुरेंद्र सिंह नेगी, स्वास्थ्य मंत्री, उत्तराखंड
हमने एक्ट में संशोधन को 19 सुझाव दिए थे। अगर इन सुझावों को शामिल किया गया है तो हमें कोई आपत्ति नहीं है। एक्ट सख्ती से लागू होना चाहिए।
-डॉ. डीडी चौधरी, सचिव, आईएमए