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Dehradun News: नवजात को देखने बाल आयोग अध्यक्ष पहुंची दून अस्पताल
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दून अस्पताल में भर्ती पांच दिन के नवजात का हाल जानने के लिए बुधवार को उत्तराखंड बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना अस्पताल गईं। नवजात को भर्ती हुए दो दिन हो गए हैं, लेकिन जिला बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की ओर से कोई भी नवजात का हाल जानने के लिए नहीं आया। इस संबंध में बाल आयोग की ओर से बाल कल्याण समिति और पुलिस अधीक्षक से आख्या मांगी गई है।
डॉ. गीता खन्ना ने बताया कि कोई भी अनाथ नवजात मिलता है तो उसको पुलिस के साथ मिलकर अस्पताल में भर्ती करवाने की जिम्मेदारी सीडब्ल्यूसी की होती है। अस्पताल से बच्चा डिस्चार्ज होता है तो भी सीडब्ल्यूसी ही बच्चे को शरणालय में ले जाकर रखती है। कोई भी बच्चा जब गोद दिया जाता है तो भी कागजी औपचारिता सीडब्ल्यूसी की होती है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि सीडब्ल्यूसी की ओर से कोई भी नवजात को देखने नहीं आया।
डॉ. गीता ने बताया कि बाल आयोग यही देखता है कि सबने अपना काम ठीक से किया है या नहीं। बाल आयोग का काम सुपर विजन का होता है। लेकिन बच्चे का अभिभावक सीडब्ल्यूसी ही रहती है। इस मामले में सीडब्ल्यूसी पहुंची ही नहीं। पुलिस से भी आख्या मांगी गई है कि पुलिस विभाग ने सीडब्ल्यूसी को सूचित किया था या नहीं। आख्या प्रस्तुत करने के बाद आगे की कार्यवाई होगी। इस दौरान बाल आयोग के सदस्य विनोद कपरवाण मौजूद रहे।
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डॉ. गीता खन्ना ने बताया कि कोई भी अनाथ नवजात मिलता है तो उसको पुलिस के साथ मिलकर अस्पताल में भर्ती करवाने की जिम्मेदारी सीडब्ल्यूसी की होती है। अस्पताल से बच्चा डिस्चार्ज होता है तो भी सीडब्ल्यूसी ही बच्चे को शरणालय में ले जाकर रखती है। कोई भी बच्चा जब गोद दिया जाता है तो भी कागजी औपचारिता सीडब्ल्यूसी की होती है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि सीडब्ल्यूसी की ओर से कोई भी नवजात को देखने नहीं आया।
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डॉ. गीता ने बताया कि बाल आयोग यही देखता है कि सबने अपना काम ठीक से किया है या नहीं। बाल आयोग का काम सुपर विजन का होता है। लेकिन बच्चे का अभिभावक सीडब्ल्यूसी ही रहती है। इस मामले में सीडब्ल्यूसी पहुंची ही नहीं। पुलिस से भी आख्या मांगी गई है कि पुलिस विभाग ने सीडब्ल्यूसी को सूचित किया था या नहीं। आख्या प्रस्तुत करने के बाद आगे की कार्यवाई होगी। इस दौरान बाल आयोग के सदस्य विनोद कपरवाण मौजूद रहे।
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