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The Transformed Avatar of Mahua: From Liquor to Healthy Laddoos

Thu, 17 Sep 2026 09:45 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 17 Sep 2026 09:45 PM IST
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The Transformed Avatar of Mahua: From Liquor to Healthy Laddoos

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महुए का बदला रूप: शराब से सेहतमंद लड्डू तक
विकास के साय मॉडल में वनोपज का वैल्यू एडिशन
छत्तीसगढ़ से बिशन सिंह बोरा
रायपुर। छत्तीसगढ़ में जंगलों से मिलने वाली पारंपरिक वनोपज अब केवल स्थानीय जरूरतों तक सीमित नहीं रह गई है। सरकार इन्हें रोजगार और आय का जरिया बनाने के लिए इनके वैल्यू एडिशन पर जोर दे रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया कि महुआ, इमली, सीताफल और तेंदूपत्ता जैसी वनोपज से स्थानीय स्तर पर नए उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, महुआ को लेकर भी तस्वीर बदल रही है। पहले जहां महुए का इस्तेमाल मुख्य रूप से स्थानीय स्तर पर देसी शराब बनाने में किया जाता था, वहीं अब इससे खाद्य उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके जिले में देसी घी से महुए के लड्डू बनाए जा रहे हैं, जिनकी मांग बढ़ रही है और इन्हें बाहर भी भेजा जा रहा है। महुआ आधारित उत्पादों को रोजगार और आर्थिक सशक्तीकरण से जोड़ने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
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साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के जंगलों में बड़ी संख्या में ऐसे उत्पाद उपलब्ध हैं, जिनका स्थानीय समुदायों की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है। बस्तर में इमली, कांकेर में सीताफल और प्रदेश के कई हिस्सों में महुआ प्रमुख वनोपज हैं। इन उत्पादों की पैकेजिंग, प्रसंस्करण और उनसे खाद्य सामग्री तैयार कर सरकार स्थानीय स्तर पर मूल्य बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
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मुख्यमंत्री ने कहा, छत्तीसगढ़ के कुल भौगोलिक क्षेत्र का करीब 44 प्रतिशत हिस्सा वन क्षेत्र है। उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे अभियानों और प्रतिपूरक वनीकरण को भी हरियाली बढ़ाने की कोशिशों से जोड़ा। उनका कहना था कि प्रदेश में प्राकृतिक वन क्षेत्र के साथ पौधरोपण और वन संरक्षण के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

साय ने छत्तीसगढ़ के विकास मॉडल में उद्योग और पर्यावरण के बीच संतुलन की बात कही। उन्होंने कहा, प्रदेश में लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट जैसे खनिज संसाधन हैं, वहीं दूसरी ओर विशाल वन संपदा भी है। उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ नक्सल मुक्त हुआ है।


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