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Dehradun: चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ पहुंचे देहरादून, एफआरआई में बोले- भारत सौभाग्यशाली देश...पवित्र पुस्तक संविधान
Sat, 02 Dec 2023 02:44 PM IST
रेनू सकलानी
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
Published by: रेनू सकलानी
Updated Sat, 02 Dec 2023 02:44 PM IST
सार
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ सीजेआई जस्टिस केशव चंद्र धूलिया की याद में एफआरआई में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे।
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चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ कार्यक्रम को संबोधित करते।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि भाषा के अनुभव के अभाव में नौजवानों की प्रगति में बाधा आती है। विधि के क्षेत्र में इस बाधा को दूर करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने बड़ा कदम उठाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने करीब 30 हजार निर्णयों का हिंदी में अनुवाद कर इसे वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। ताकि, अधिवक्ता इन्हें पढ़ें और अपनी प्रगति का मार्ग प्रशस्त करें।
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सुप्रीम कोर्ट का लक्ष्य है कि भारत के हर घर में अपनी भाषा में न्याय पालिका पहुंचे। न्याय की जो मिसाल है वह भाषा के फेर में ने छिपे। मुख्य न्यायाधीश शुक्रवार को एफआरआई में जस्टिस केसी धूलिया की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे।
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जस्टिस केसी धूलिया की स्मृति में विधि और संविधान के विषय पर वाद-विवाद और निबंध प्रतियोगिताएं भी आयोजित कराई गईं। प्रतियोगिता के विजेता बच्चों को मुख्य न्यायाधीश ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इस मौके पर मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने अंग्रेजी में अपने भाषण से पहले हिंदी में युवाओं को संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत के जिला न्यायालयों में कामकाज हिंदी में होता है।
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भाषाई समस्या को दूर किया जा सके
कई राज्यों में स्थानीय भाषा में होता है। जबकि सर्वोच्च न्यायालय में 1950 से अब तक के सभी निर्णय अंग्रेजी में ही आए हैं। भारत के जिला न्यायालयों में आने वाली जनता और अधिकतर अधिवक्ता अंग्रेजी नहीं जानते हैं। ऐसे में जब उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश का कार्यभार संभाला तो इस बाधा को दूर करने का प्रण लिया था। सर्वोच्च न्यायालय के सभी 36 हजार निर्णयों का हिंदी में अनुवाद कराने की योजना शुरू की थी। इसमें मद्रास आईआईटी और भारत सरकार के भाषिणी कार्यक्रम के साथ मिलकर करीब 30 हजार निर्णयों का हिंदी में अनुवाद हो चुका है। इनमें से 20 हजार हिंदी में अनुवादित निर्णयों को सत्यापित कर सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड भी कर दिया है।उन्होंने युवाओं से कहा कि वे इन निर्णयों को पढ़ें और अपने ज्ञान को बढ़ाएं। ताकि उनके सामने आने वाली भाषाई समस्या को दूर किया जा सके। इसके साथ ही अन्य राज्यों में जहां स्थानीय भाषा में कामकाज होता है। वह इसे अपनी भाषा में भी अनुवादित कर विधि के क्षेत्र को मजबूती देने का काम करें।
सिलक्यारा आपदा में देश ने दिखाई एकता
उन्होंने भाषण की शुरुआत सिलक्यारा आपदा में बचाव व राहत कार्य में मिली सफलता से की। उन्होंने कहा कि 41 जिंदगियां सुरंग में फंसी थीं। मशीन और इंसानी मेहनत के बल पर उन्हें आखिरकार निकाल लिया गया। जो लोग मेहनत कर रहे थे, उनकी जितनी तारीफ की जाए कम है। लेकिन, उस वक्त देश ने दिखाया कि हम सब एक हैं। पूरा देश इस रेस्क्यू को सफल बनाने के लिए प्रार्थना कर रहा था। यह एक बेहतर उदाहरण है। उन्होंने आगे कहा कि भारत के साथ जो देश आजाद हुए हैं वे इतने सौभाग्यशाली नहीं है जितना कि भारत। क्योंकि यहां हम अपने संविधान के साथ बंधे हैं। यही हमें सभी से अलग बनाता है। कार्यक्रम में उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मनोज तिवारी, हाईकोर्ट के पूर्व जज सुधांशु धूलिया, हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल निशंक, फिल्म डायरेक्टर व अभिनेता तिग्मांशु धूलिया आदि उपस्थित रहे।
कई राज्यों में स्थानीय भाषा में होता है। जबकि सर्वोच्च न्यायालय में 1950 से अब तक के सभी निर्णय अंग्रेजी में ही आए हैं। भारत के जिला न्यायालयों में आने वाली जनता और अधिकतर अधिवक्ता अंग्रेजी नहीं जानते हैं। ऐसे में जब उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश का कार्यभार संभाला तो इस बाधा को दूर करने का प्रण लिया था। सर्वोच्च न्यायालय के सभी 36 हजार निर्णयों का हिंदी में अनुवाद कराने की योजना शुरू की थी। इसमें मद्रास आईआईटी और भारत सरकार के भाषिणी कार्यक्रम के साथ मिलकर करीब 30 हजार निर्णयों का हिंदी में अनुवाद हो चुका है। इनमें से 20 हजार हिंदी में अनुवादित निर्णयों को सत्यापित कर सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड भी कर दिया है।उन्होंने युवाओं से कहा कि वे इन निर्णयों को पढ़ें और अपने ज्ञान को बढ़ाएं। ताकि उनके सामने आने वाली भाषाई समस्या को दूर किया जा सके। इसके साथ ही अन्य राज्यों में जहां स्थानीय भाषा में कामकाज होता है। वह इसे अपनी भाषा में भी अनुवादित कर विधि के क्षेत्र को मजबूती देने का काम करें।
सिलक्यारा आपदा में देश ने दिखाई एकता
उन्होंने भाषण की शुरुआत सिलक्यारा आपदा में बचाव व राहत कार्य में मिली सफलता से की। उन्होंने कहा कि 41 जिंदगियां सुरंग में फंसी थीं। मशीन और इंसानी मेहनत के बल पर उन्हें आखिरकार निकाल लिया गया। जो लोग मेहनत कर रहे थे, उनकी जितनी तारीफ की जाए कम है। लेकिन, उस वक्त देश ने दिखाया कि हम सब एक हैं। पूरा देश इस रेस्क्यू को सफल बनाने के लिए प्रार्थना कर रहा था। यह एक बेहतर उदाहरण है। उन्होंने आगे कहा कि भारत के साथ जो देश आजाद हुए हैं वे इतने सौभाग्यशाली नहीं है जितना कि भारत। क्योंकि यहां हम अपने संविधान के साथ बंधे हैं। यही हमें सभी से अलग बनाता है। कार्यक्रम में उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मनोज तिवारी, हाईकोर्ट के पूर्व जज सुधांशु धूलिया, हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल निशंक, फिल्म डायरेक्टर व अभिनेता तिग्मांशु धूलिया आदि उपस्थित रहे।
जस्टिस केसी धूलिया
जस्टिस केसी धूलिया का जन्म 10 मार्च 1928 को ग्राम मदनपुर, जिला पौड़ी गढ़वाल में हुआ था। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा अपने गांव से ली। उनके पिता पंडित भैरव दत्त धूलिया स्वतंत्रता सेनानी थे। जस्टिस केसी धूलिया ने पढ़ाई पूरी करने के बाद वकालत करनी शुरू की और स्थानीय समाचार पत्र में अपने परिवार का हाथ बंटाने के लिए लैंसडौन आ गए। इसके बाद जब शादी हुई तो वह इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने लगे। काफी समय के संघर्षों के बाद उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य स्थायी परिषद बनाया गया। इसके बाद उन्हें मख्य न्यायाधीश के पद पर पदोन्नत कर दिया गया। उनके कई निर्णय आज भी नजीर के तौर पर पेश किए जाते हैं। 15 जनवरी 1985 को हृदयाघात से उनकी मृत्यु हो गई। वह अपने पीछे एक समृद्ध विरासत छोड़ गए हैं, जिनमें जस्टिस सुधांशु धूलिया, पूर्व नेवी अधिकारी हिमांशु धूलिया, तिग्मांशू धूलिया आदि का नाम है।
ये भी पढ़ें...Uttarakhand: उत्तरकाशी में सिलक्यारा के पास एक और सुरंग से 'खतरों' का रिसाव, ग्रामीणों की बढ़ रही चिंता
प्रतियोगिताओं में ये हुए विजेता
निबंध प्रतियोगिता
वीरेंद्र प्रताप सिंह राठौर-यूपीईएस
जीत सिन्हा -यूपीईएस
अक्षत गोयल-उत्तरांचल यूनिवर्सिटी
वाद विवाद प्रतियोगिता
शताक्षी शर्मा व पार्थ नारायण सिंह-उत्तरांचल यूनिवर्सिटी
अंशवीर व मनोनित-यूपीईएस
सर्वश्रेष्ठ वक्ता
शताक्षी शर्मा-उत्तरांचल यूनिवर्सिटी
जस्टिस केसी धूलिया का जन्म 10 मार्च 1928 को ग्राम मदनपुर, जिला पौड़ी गढ़वाल में हुआ था। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा अपने गांव से ली। उनके पिता पंडित भैरव दत्त धूलिया स्वतंत्रता सेनानी थे। जस्टिस केसी धूलिया ने पढ़ाई पूरी करने के बाद वकालत करनी शुरू की और स्थानीय समाचार पत्र में अपने परिवार का हाथ बंटाने के लिए लैंसडौन आ गए। इसके बाद जब शादी हुई तो वह इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने लगे। काफी समय के संघर्षों के बाद उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य स्थायी परिषद बनाया गया। इसके बाद उन्हें मख्य न्यायाधीश के पद पर पदोन्नत कर दिया गया। उनके कई निर्णय आज भी नजीर के तौर पर पेश किए जाते हैं। 15 जनवरी 1985 को हृदयाघात से उनकी मृत्यु हो गई। वह अपने पीछे एक समृद्ध विरासत छोड़ गए हैं, जिनमें जस्टिस सुधांशु धूलिया, पूर्व नेवी अधिकारी हिमांशु धूलिया, तिग्मांशू धूलिया आदि का नाम है।
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प्रतियोगिताओं में ये हुए विजेता
निबंध प्रतियोगिता
वीरेंद्र प्रताप सिंह राठौर-यूपीईएस
जीत सिन्हा -यूपीईएस
अक्षत गोयल-उत्तरांचल यूनिवर्सिटी
वाद विवाद प्रतियोगिता
शताक्षी शर्मा व पार्थ नारायण सिंह-उत्तरांचल यूनिवर्सिटी
अंशवीर व मनोनित-यूपीईएस
सर्वश्रेष्ठ वक्ता
शताक्षी शर्मा-उत्तरांचल यूनिवर्सिटी