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Uttarakhand: चारधाम में धारण क्षमता से तय हो श्रद्धालुओं की संख्या, एसडीसी फाउंडेशन ने दिए सरकार को सुझाव

Fri, 11 Apr 2025 03:09 PM IST
रेनू सकलानी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Fri, 11 Apr 2025 03:09 PM IST
सार

चारधाम यात्रा को लेक एसडीसी फाउंडेशन ने सरकार को सुझाव दिए हैं।  पिछली यात्रा की विश्लेषण रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने आगामी चारधाम यात्रा में हर तीर्थ यात्री को धामों में जाने की अनुमति देने का फैसला लिया है। भारी भीड़ उमड़ने और अव्यवस्थाओं की पूरी आशंका है।

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Chardham Yatra devotees number should be decided by carrying capacity SDC Foundation suggestions to government
बदरीनाथ-केदारनाथ - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्यूनिटी (एसडीसी) फाउंडेशन ने प्रदेश सरकार को सुझाव दिया कि चारधाम यात्रा के दौरान धामों की धारण क्षमता के आधार पर प्रतिदिन दर्शन के लिए तीर्थ यात्रियों की संख्या तय करना जरूरी है। तीर्थ यात्रियों की संख्या पर नियंत्रण न रखने से धामों में भीड़ प्रबंधन की चुनौती बढ़ सकती है।

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एसडीसी फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल ने पिछली यात्रा की विश्लेषण रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने आगामी चारधाम यात्रा में हर तीर्थ यात्री को धामों में जाने की अनुमति देने का फैसला लिया है। हर साल यात्रा के आकार में भारी बढ़ोतरी हो रही है। इस बार भी पिछले साल से कहीं ज्यादा तीर्थ यात्रियों के पहुंचने की संभावना है।
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उठाए सवाल
ऐसे में धामों में भारी भीड़ उमड़ने और अव्यवस्थाओं की पूरी आशंका बनी है। एसडीसी फाउंडेशन ने 2024 में चारधाम यात्रा की विस्तृत रिपोर्ट जारी की थी। इसमें 192 दिनों की यात्रा में आने वाले यात्रियों की संख्या का विश्लेषण किया गया था। पूरे यात्रा में लगभग 48 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने चारधाम के साथ हेमकुंड साहिब में दर्शन किए।


इसमें यात्रा के पहले महीने में 41 प्रतिशत श्रद्धालु चारधाम में पहुंचे। जबकि शेष पांच महीने में यात्रियों की संख्या 59 प्रतिशत रही। अनूप नौटियाल ने सवाल उठाया कि तीर्थ यात्रियों की संख्या की कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई है तो फिर स्लॉट बुक हो जाने का क्या मतलब हो सकता है।

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सभी को जाने की अनुमति देने का मतलब सभी का रजिस्ट्रेशन हो जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। यात्रा पंजीकरण से असमंजस की स्थिति है। सरकार को धामों की धारण क्षमता के आधार पर तीर्थ यात्रियों की संख्या तय करने की जरूरत है।

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