फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   chardham yatra 2021 : uttarakhand high court stops chardham yatra

चारधाम यात्रा 2021 : उत्तराखंड हाईकोर्ट ने चारधाम यात्रा पर लगाई रोक, एक जुलाई से होने वाली थी शुरू

Tue, 29 Jun 2021 04:47 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 29 Jun 2021 04:47 PM IST
सार

कोर्ट ने कहा कि सरकार के अधिकारी कोर्ट को बहुत हल्के ढंग से ले रहे हैं, लिहाजा मुख्य सचिव अधिकारियों को कोर्ट के समक्ष जवाब देने की ट्रेनिंग दें।

विज्ञापन
chardham yatra 2021 : uttarakhand high court stops chardham yatra
नैनीताल हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

नैनीताल हाईकोर्ट ने सरकार के सारे तर्कों को सिरे से नकारते हुए एक जुलाई से चार धाम यात्रा कराने के कैबिनेट के निर्णय पर रोक लगा दी है। सरकार की ये फजीहत कमजोर तर्कों और आधी अधूरी तैयारी के चलते हुई। कोर्ट ने कहा कि सरकार के अधिकारी कोर्ट को बहुत हल्के ढंग से ले रहे हैं, लिहाजा मुख्य सचिव अधिकारियों को कोर्ट के समक्ष जवाब देने की ट्रेनिंग दें। अधिकारी गलत और अधूरी जानकारी देकर हमारे धैर्य की परीक्षा न लें। कोर्ट ने इस प्रकरण में अगली सुनवाई के लिए सात जुलाई की तिथि नियत की है।

विज्ञापन


उत्तराखंड अनलॉक : एक हफ्ते बढ़ा कर्फ्यू, रविवार को भी खुलेंगे मसूरी और नैनीताल, जिम-कोचिंग संचालन को भी अनुमति
विज्ञापन


सच्चिदानंद डबराल, दुष्यंत मैनाली, अनु पंत सहित अन्य ने इस संबंध में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सोमवार को वर्चुअल सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव ओमप्रकाश, पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर और आशीष चौहान कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुए। चीफ जस्टिस आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की बेंच ने सरकार की ओर से दिए गए 177 पृष्ठ के शपथपत्र पर असंतोष जाहिर किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने प्रदेश की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था और कोविड प्रोटोकॉल को लेकर अधिकारियों के सतही रवैये को लेकर फटकार लगाते हुए पूछा कि क्या हरिद्वार कुंभ के दौरान जो हुआ उसी को चारधाम यात्रा में भी दोहराने दिया जाए। हाईकोर्ट ने कहा कि जब कांवड़ यात्रा पर रोक लगाई गई है, तब सरकार अपर्याप्त इंतजाम के साथ चारधाम यात्रा क्यों शुरू करना चाह रही है। हाईकोर्ट ने तीसरी लहर के संभावित खतरे और डेल्टा प्लस वैरिएंट को लेकर चिंता जाहिर करते हुए सरकार की ढुलमुल नीति की भी निंदा की। 

उत्तराखंड में कोरोना: 24 घंटे में मिले 82 नए संक्रमित, दो की मौत, 122 मरीज हुए ठीक

इससे पहले हुई सुनवाई में यात्रा की तैयारियों को लेकर जानकारी 28 जून को कोर्ट के समक्ष रखने को कहा गया था। प्रदेश में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं और कोविड प्रोटोकॉल पालन में कुंभ के दौरान हुई चूक चारधाम यात्रा में न दोहराई जाए इसे लेकर हाईकोर्ट लगातार सरकार से कह रहा था कि वह अपनी तैयारियों से अदालत को संतुष्ट करे ताकि लोगों की सेहत से समझौता न हो, लेकिन सरकार के अधिकारी अपने जवाब से हाईकोर्ट को संतुष्ट नहीं कर सके।

तीन जिलों के लिए चारधाम यात्रा शुरू करने का फैसला किया था

सरकार ने 25 जून की कैबिनेट बैठक में सीमित रूप में तीन जिलों के लिए चारधाम यात्रा शुरू करने का फैसला किया था। इसके तहत चमोली जिले के लोगों को बदरीनाथ धाम दर्शन करने, रुद्रप्रयाग जिले के लोगों को केदारनाथ धाम और उत्तरकाशी के लोगों को गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के दर्शन की अनुमति दी गई थी। इसके साथ ही सरकार 11 जुलाई से यात्रा के दूसरे चरण में बाकी प्रदेशवासियों के लिए चारधाम यात्रा खोलने की तैयारी में थी। सोमवार को हाईकोर्ट ने यात्रा संबंधी कैबिनेट के फैसले पर रोक लगा दी।  

अदालत ने मौके दिए, कमियां दूर नहीं कर पाई सरकार : अभिजय
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिजय नेगी ने यात्रा पर रोक के निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एक जुलाई से चारधाम यात्रा के सरकार के फैसले पर रोक लगाने के सिवाय हाइकोर्ट के पास कोई विकल्प ही नहीं बचा था क्योंकि कोर्ट ने अधिकारियों को अनेक बार कमियां दूर करने के मौके दिए लेकिन सरकार इन्हें दूर नहीं कर पाई।

जगन्नाथ यात्रा की तरह हो पूजा का सजीव प्रसारण 
हाईकोर्ट ने कहा कि उसे श्रद्धालुओं की भावना का पूरा अहसास है और सरकार चारों धामों की पूजा का टीवी पर सजीव प्रसारण करे। सरकार की ओर से इस पर आपत्ति करते हुए कहा गया कि यह शास्त्र सम्मत नहीं है। इस पर कोर्ट ने कहा कि जब शास्त्र लिखे गए तब टीवी होता नहीं था तो ये व्यवस्था कैसे दी जा सकती थी। कोर्ट ने कहा कि जैसे उड़ीसा में जगन्नाथ यात्रा के सजीव प्रसारण की व्यवस्था है वैसा ही प्रबंध यहां भी किया जाए।

देश रक्षा के लिए दी जा सकती है राज्य की कुर्बानी
हाईकोर्ट ने सरकार की ओर से  चारधाम के पुजारियों और अन्य लोगों की यात्रा संबंधी मांग के तर्क पर टिप्पणी की कि ऐसे लोगों को उन परिवारों से मिलाया जाए जिन्होंने परिजनों को महामारी में खोया है। कोर्ट ने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि देश की रक्षा के लिए राज्य की कुर्बानी देनी पड़े तो यह उचित है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed