इस बार भी चारधाम यात्रियों पर कहर ढाएगी आपदा
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चारधाम यात्रा की तैयारियों पर पहले सरकारी सुस्ती और अब मौसम की मार भारी पड़ रही है।
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बारिश होने से बदरीनाथ हाईवे पर बड़े-बडे़ गड्ढे भरने का काम बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यात्रा पड़ावों पर बिजली, पानी, शौचालय और स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी काम नहीं हो पा रहा है।
यात्रा पड़ाव पीपलकोटी, जोशीमठ, पांडुकेश्वर और गोविंदघाट में हाईवे की हालत लस्त पस्त है। वाहनों के गुजरने से धूल ही धूल उड़ रही है। शासन ने हाईवे सुधारीकरण कार्य के लिए लोनिवि को दो सप्ताह पूर्व पांच करोड़ रुपए की धनराशि दी।
यमुनोत्री व गंगोत्री हाईवे पर हैं दर्जनों डेंजर जोन
लोनिवि ने मजदूर लगाकर गौचर से हाईवे पर पडे़ गड्ढों को भरने का कार्य शुरू किया लेकिन रुक-रुक कर हो रही बारिश से यह कार्य भी प्रभावित हो रहा है।
बदरीनाथ ही नहीं केदारनाथ और गंगोत्री-यमुनोत्री हाईवे अब भी कई जगह बदहाल और खतरनाक है।
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पिछले चार सालों से चार धाम यात्रा सड़कों की बदहाली की भेंट चढ़ रही है। बरसात का सीजन शुरू होते ही सड़कें अवरुद्ध होने से यात्रा ठप हो जाती है।
अगस्त 2012 और जून 2013 की आपदा तो यात्रा मार्गों पर कहर बनकर टूटी। यमुनोत्री और गंगोत्री राजमार्ग पर दर्जनों डेंजर जोन विकसित हो चुके हैं।
यात्रा मार्गों को दुरुस्त करने में सरकारी लेटलतीफी यात्रा पर भारी पड़ती दिख रही है। पिछले वर्ष आपदा में क्षतिग्रस्त हुए यमुनोत्री एवं गंगोत्री हाईवे पर यातायात बहाली में ही सरकारी विभागों को करीब तीन माह लग गए थे।
बीते माह से बीआरओ के साथ ही लोनिवि को यात्रा शुरू होने से पहले यात्रा मार्गों को दुरुस्त करने में लगाया गया है लेकिन मौसम की बेरुखी इस पर भारी पड़ रही है।
तय समय सीमा में काम मुश्किल
मौसम की मार और विभागीय कार्यों की सुस्ती से नहीं लगता कि केदारनाथ हाईवे का डामरीकरण कार्य तय समय सीमा तक हो पाएगा। जल प्रलय के दौरान केदारनाथ हाईवे पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था।
सरकार ने निर्माणदायी एजेंसियों को हाईवे के सुधारीकरण और डामरीकरण के लिए 30 अप्रैल तक की मोहलत दी है। पहले सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) फिर लोनिवि और फिर बीआरओ को हाईवे हस्तांतरण करने की कार्रवाई में ही आधा समय गुजर गया।
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अब सुधारीकरण कार्य में थोड़ी तेजी आई है तो मौसम बाधा बन रहा है। आए दिन बारिश होने से सुधारीकरण का कार्य प्रभावित हो रहा है।
हालांकि, रुद्रप्रयाग और ऊखीमठ के अधिकारियों का कहना है कि विभाग मार्ग को दुरुस्त करने में जुटा हुआ है। 30 अप्रैल तक मार्ग को यातायात लायक बना दिया जाएगा।
गोविंदघाट तक सिमटी हेमकुंड साहिब यात्रा की तैयारी
हेमकुंड साहिब तीर्थयात्रा की तैयारियां गोविंदघाट तक ही सिमट कर रह गई हैं। गोविंदघाट हेमकुंड साहिब यात्रा का प्रवेश द्वार है। यहां जलप्रलय से अलकनंदा नदी का पैदल पुल बह गया था।
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लोनिवि यहां मोटर पुल बना रहा है लेकिन पुल का निर्माण कार्य अभी तक नदी के दोनों ओर दीवार निर्माण तक ही पहुंच पाया है। हेमकुंड साहिब के 19 किमी पैदल मार्ग की बात करें तो मार्ग पर पानी और बिजली व्यवस्था बहाल नहीं हो पाई है।
यहां दो मुख्य पड़ाव हैं घांघरिया और भ्यूंडार। जलप्रलय में यहां दुकानें और पेयजल लाइन तहस-नहस हो गई थी। पैदल रास्ता भी कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसका सुधारीकरण कार्य अभी तक भी शुरू नहीं हो पाया है।