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उत्तराखंड: इको सेंसिटिव जोन में बदला जा सकेगा भू उपयोग
रजा शास्त्री/अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 21 Sep 2016 03:13 AM IST
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भागीरथी नदी
- फोटो : Amar Ujala
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भागीरथी इको सेंसिटिव जोन के लोगों को बड़ी राहत मिली है। वे जरूरत के लिए निर्माण कार्य करा सकेंगे। उन्हें अनुमति के लिए केंद्र सरकार के पास नहीं जाना पड़ेगा। मुख्य सचिव स्तर से उन्हें स्वीकृति मिल जाएगी। केंद्र ने भागीरथी इको सेंसिटिव जोन के मामले में ढील दी है।
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इसके साथ ही जोन में 25 मेगावाट तक जल विद्युत परियोजनाएं भी शुरू हो सकती है। केंद्र ने इस पर पुनर्विचार करने का वादा किया है। इस संबंध में सर्वे भी कराया जाएगा। केंद्र से मिली राहत के मद्देनजर प्रदेश शासन ने जोनल मास्टर प्लान में संशोधन की तैयारी शुरू कर दी है।
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भागीरथी इको सेंसिटिव जोन की एक्सपर्ट कमेटी की 31 अगस्त की बैठक में अपर मुख्य सचिव एस. रामास्वामी की अगुवाई में गई टीम ने बड़ी दमदारी के साथ जोन की विसंगतियों को उठाया था। इस पर केंद्रीय एक्सपर्ट कमेटी ने बड़ी राहत दे दी है। इको सेंसिटिव जोन की वजह से यहां भू-उपयोग बदलने पर पूर्ण प्रतिबंध था। मकान का एक कमरा बनवाने तक के लिए केंद्र से अनुमति लेनी पड़ती थी, लेकिन अब जरूरत के निर्माण के लिए भू-उपयोग बदलने में राहत दे दी गई है।
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जनसंख्या के बढ़ते दबाव की समस्या के निस्तारण के लिए बगीचे, बागवानी क्षेत्र, कृषि पार्क का इस्तेमाल नॉन ग्रीन कार्य के लिए हो सकेगा। कमेटी ने कहा है कि पहले से प्रचलित प्रदेश के नियम ही लागू रहेंगे। भू-उपयोग बदलने के लिए मुख्य सचिव की अनुमति लेनी पड़ेगी। इको सेंसिटिव जोन में 20 डिग्री ढलान तक ही विकास कार्य कराने की अनुमति थी, लेकिन अब हिमाचल प्रदेश की तरह 40 से 60 डिग्री तक छूट देने का इशारा किया गया है।
जल विद्युत परियोजनाओं पर भी होगा पुनर्विचार
इको सेंसिटिव जोन में पहले दो मेगावाट तक ही विद्युत परियोजनाएं संचालित करने की अनुमति दी गई थी, लेकिन प्रदेश की मांग पर 25 मेगावाट तक की परियोजनाओं पर पुनर्विचार के लिए केंद्र ने सहमति दे दी है। पहले इस संबंध में सर्वे कराया जाएगा। इसके लिए आईआईटी रुड़की या किसी दूसरे संस्थान के चयन पर विचार शुरू हो गया है। केंद्रीय कमेटी से मिली इस छूट पर शासन ने मास्टर जोनल प्लान में संशोधन कर रहा है।
अभी ये बंदिशें
-आबादी बढ़ने पर भी लोग नए घर नहीं बनवा पा रहे थे
-दुकानों और दूसरे नॉन ग्रीन काम नहीं हो पाते थे
-16 जल विद्युत परियोजनाएं बंद कर दी गई थीं
-इनमें 11 परियोजनाएं 25 मेगावाट के नीचे बंद थीं
-पहाड़ों के स्लोप पर विकास कार्य बंद कर दिए गए थे
राहत
-25 मेगावाट की परियोजनाओं को मिल सकती है, संजीवनी
-स्लोप वाले क्षेत्रों में विकास कार्य हो सकते हैं शुरू
-सड़क निर्माण कराने के लिए भी कमेटी ने सुझाव दिए
-प्रदेश सरकार को सड़क निर्माण की अनुमति
-नदी का बहाव दुरुस्त रखने के लिए हो सकेगा चुगान
सलाह
-आर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा दिया जाए
-मानव-वन्य जीव संघर्ष रोकने के लिए ‘प्रे बेस’ और कॉरीडोर बनाएं जाएं
-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग जीआईएस मैपिंग के लिए प्रस्ताव दे
-आपदा प्रबंधन के वृहत कार्ययोजना तैयार की जाए
-क्षेत्र में चीड़ का पौधारोपण हतोत्साहित किया जाए