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चमोली ने झेला केदारनाथ से बड़ी आपदा का दर्द
अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 25 Dec 2013 10:14 AM IST
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उत्तराखंड में बीते जून माह में आई केदारनाथ त्रासदी की गूंज सारे संसार में हुई। बड़ी संख्या में लोग इसमें हताहत हुए।
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चमोली ने झेली आपदा
कई का आज तक भी पता नहीं। लेकिन, मारुति सुजुकी के पूर्व सीएमडी और कार्नेशन आटो के सीईओ जगदीश खट्टर की मानें तो 1970 में चमोली ने इससे भी बड़ी आपदा झेली थी। यह बात अलग है कि उस वक्त मीडिया का कोई बड़ा नेटवर्क नहीं था, लिहाजा वह गुम होकर रह गई।
खट्टर उस वक्त उत्तराखंड के चमोली में बतौर डीएम तैनात थे। पटेलनगर स्थित कार्नेशन के आउटलेट में मीडिया कर्मियों से बात-चीत के दौरान उन्होंने इस आपदा का जिक्र किया।
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संचार नेटवर्क के अभाव की वजह से उस वक्त रेस्क्यू आपरेशन में आई दिक्कतों के सवाल पर अलबत्ता बोले कि उस वक्त अधिकारी बेहतर तरीके से रेस्क्यू कर पाए थे, क्योंकि उनका पूरा फोकस प्रभावितों को राहत पहुंचाने पर था। मीडिया का बहुत फैलाव न होने से वह अपना काम सहजता से कर पाए।
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डॉक्टरेट की मानद उपाधि
बता दें कि प्रशासनिक क्षेत्र में तकरीबन 37 वर्ष का अनुभव रखने वाले खट्टर चमोली में 1969-72 के बीच डीएम रहे।
इसके अलावा उन्होंने 1975-78 तक उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम (यूपीएसआईडीसी) के एमडी के बतौर कार्य किया, जबकि 1986 से लेकर 1988 तक उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) में।
लंदन मेट्रोपोलिटन यूनिवर्सिटी ने उन्हें बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में डॉक्टरेट की मानद उपाधि भी दी है।
260 मिलियन डॉलर पहुंचाया लाभ
मारुति सुजुकी से उनका संबंध 14 साल का रहा। 60 मिलियन डॉलर का नुकसान दे रही कंपनी को उन्होंने सफल मार्केट लीडर बनाने में कामयाबी हासिल की। 2008 में उसका लाभ 260 मिलियन डॉलर पहुंच चुका था।
आत्मकथा में राजनीतिज्ञों, नौकरशाहों की तल्खी दर्शाई
जगदीश खट्टर ने अपनी आत्मकथा भी लिखी है। ‘ड्रिवन-मेमोयर्स आफ ए सिविल सर्वेंट-टर्न्ड-एंटरप्रेन्योर’ नाम से लिखी इस किताब में उन्होंने सूखे से प्रभावित गांवों से लेकर राजनीतिज्ञों, नौकरशाहों से जुड़ी तल्खियों को जगह दी है। जापानियों के साथ जटिल रिश्तों के भी बारे में लिखा है।