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Dehradun: कभी छावनी क्षेत्र तक सीमित था चकराता थाना, आज 52 गांवों की सुरक्षा की जिम्मेदारी
Sun, 01 Oct 2023 04:07 PM IST
देहरादून ब्यूरो
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, देहरादून
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, देहरादून
Published by: देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 01 Oct 2023 04:07 PM IST
सार
भवन में कुल 14 कमरे हैं। नीचे कार्यालय संचालित होता है। पहली मंजिल में बैरक बनी है। पहली मंजिल के खिड़कियों के शीशे टूट चुके हैं।
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चकराता थाना
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कभी चकराता थाना छावनी क्षेत्र तक सीमित था, लेकिन आज चकराता विकासखंड के 52 गांवों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है। थाना आज भी ब्रिटिशकालीन दो मंजिला भवन से चल रहा है। भवन की दीवारें पत्थर से बनी हैं। जिनकी चौड़ाई करीब दो फीट है। कई साल से भवन मरम्मत नहीं हुई है, लेकिन आज भी ब्रिटिशकालीन यह इमारत मजबूती के साथ खड़ी है।
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भवन में कुल 14 कमरे हैं। नीचे कार्यालय संचालित होता है। पहली मंजिल में बैरक बनी है। पहली मंजिल के खिड़कियों के शीशे टूट चुके हैं। छत टीन की है, लेकिन बरसात में नहीं टपकती है। छावनी परिषद के पूर्व सभासद और राज्यमंत्री टीकाराम शाह ने बताया कि वर्ष 1869 में छावनी क्षेत्र चकराता का गठन किया गया। ब्रिटिशकाल में ही छावनी क्षेत्र में ही थाने की स्थापित की गई। तब इसका दायरा छावनी क्षेत्र तक सीमित था।
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लाखामंडल चौकी इसी साल फरवरी में वजूद में आई
जनजातीय क्षेत्र के अधिकांश गांवों में आज भी राजस्व पुलिस व्यवस्था कायम है। राज्य गठन के बाद इसमें बदलाव किया गया। धीरे-धीरे आसपास के गांवों को थाना क्षेत्र में शामिल किया गया। वर्तमान में चकराता थाना क्षेत्र के अंतर्गत 38 और इसके अधीन आने वाली लाखामंडल चौकी के अंतर्गत 14 गांव आते हैं। लाखामंडल चौकी इसी साल 15 फरवरी को वजूद में आई।
थाने में सिपाहियों की कमी
थाने के लिए एक थाना प्रभारी, एक दारोगा, दो हेड कॉस्टेबल और 25 सिपाहियों के पद स्वीकृत हैं। लेकिन वर्तमान में महज छह सिपाही तैनात हैं। एसआई की जगह एएसआई की तैनाती है। तीन हेड कॉस्टेबल तैनात हैं।