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अब सीबीआई करेगी एनएच-74 घोटाले की जांच, पूर्व एसडीएम समेत छह अधिकारी सस्पेंड

Sat, 25 Mar 2017 09:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 25 Mar 2017 09:09 PM IST
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CBI will take action on  NH-74 scam
- फोटो : अमर उजाला

ऊधमसिंह नगर जिले में स्थित नेशनल हाइवे-74 को फोर लेन हाइवे बनाने के लिए भूमि अधिग्रहण में हुये घोटाले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शनिवार को इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में राज्य सरकार व बाहर की एजेंसियों भी शामिल हैं, इसलिए इसकी जांच की संस्तुति सीबीआई से की जा रही है। 

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उन्होंने कहा कि कुमाऊं कमिश्नर की प्राथमिक जांच सरकार ने यह कदम उठाया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर सात अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की गई हैं, जिसमें एक रिटायर्ड एसडीएम भी शामिल है। प्रकरण को दुस्साहसिक करार देते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ भूमि अधिग्रहण के सिर्फ 18 प्रकरणों में ही सरकार को 170 करोड़ रुपये की क्षति हुई है। 70 करोड़ के प्रकरणों की जांच जारी है। अभी सारे मामलों की जांच नहीं हुई है, इसलिये ये राशि और अधिक हो सकती है। 
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इस प्रकरण में विभागीय अफसरों, कास्तकारों व अन्य लोगों के संगठित गिरोह की सक्रियता का अंदेशा है। उनकी सांठगांठ के जरिये चुनिंदा किसानों को उनकी भूमि का 10 से 20 गुना मुआवजा बांटा गया। इससे भी ज्यादा संगीन तथ्य यह है कि जो वास्तविक किसान थे, उन्हें मुआवजा दिया ही नहीं गया।
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प्राथमिक जांच में दोषी पाए गए अफसरों को सस्पेंड कर दिया गया है और उनके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई गतिमान है। घोटाले में राजनीतिक व्यक्तियों की संलिप्तता की संभावना पर मुख्यमंत्री ने कहा कि चाहे कोई कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, वह जल्द ही बौना नजर आएगा। 

इन अफसरों पर गिरी गाज

CBI will take action on  NH-74 scam

-दिनेश प्रताप सिंह, तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी(एसएलओ)

-अनिल कुमार शुक्ला, तत्कालीन विशे भूमि अध्याप्ति अधिकारी(एसएलओ)

-सुरेंद्र सिंह जंगपांगी, तत्कालीन उप जिलाधिकारी

-जगदीश लाल, तत्कालीन उपजिलाधिकारी

-भगत सिंह फोनिया, तत्कालीन उपजिलाधिकारी

-एनएस नगन्याल, तत्कालीन जिलाधिकारी

-हिमालय सिंह मर्तोलिया(सेवानिवृत्त) तत्कालीन उपजिलाधिकारी

इन तहसीलों के किसानों पर मेहरबानी
 यूएसनगर की जसपुर, काशीपुर, बाजपुर, सितारगंज तहसीलों के किसानों पर मेहरबानी बरती गई। ऐसे अब तक 18 प्रकरण सामने आ चुके हैं।

ऐसे हुआ घोटाला

CBI will take action on  NH-74 scam

वर्ष 2011 में भूमि को अकृषक भूमि घोषित किया गया। 2015 में कंप्यूटर खतौनी में भूमि को अकृषिक दर्ज किया गया। लेकिन 2011 से 2015 के बीच के वर्षों में संबंधित भूमि के खसरे में भूमि में कृषि होना दर्शाया गया। भूमि की फसल पैदावर भी दर्शाई गई। चुनिंदा किसानों को फायदा पहुंचाने की इस साजिश में विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों एवं अन्यों की भूमिका रही है।

एसआईटी जांच बंद, रिकार्ड सीबीआई को सौंपे
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीबीआई जांच की संस्तुति के साथ ही इस प्रकरण के लिये गठित एसआईटी जांच बंद कर दी गई है और प्रकरण से संबंधित सभी दस्तावेज सीबीआई को सौंपे जाएंगे।

एनएच -74 का भूमि अधिग्रहण गंभीर प्रकरण है। इसमें दुस्साहसिक कृत्य हुआ है। भ्रष्टाचार के खिलाफ धर्मयुद्ध की तरह लड़ा जाएगा। चाहे कोई कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, किसी को नहीं बख्शा जाएगा।
- त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री

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