फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   carelessness of nari niketan of dehradun

नारी निकेतन में सहमी हुई हैं संवासिनियां

Sun, 22 Dec 2013 11:55 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 22 Dec 2013 11:55 AM IST
विज्ञापन
carelessness of nari niketan of dehradun

दून अस्पताल में भरती नारी निकेतन की पांच संवासिनियों में से एक की हालत गंभीर है, बाकी चार की हालत में कुछ सुधार है। लेकिन वे इतनी सहमी हुई हैं कि लौटकर नारी निकेतन नहीं जाना चाहतीं।

विज्ञापन


ज्यादातर संवासिनियां मनोरोगी हैं
उनका कहना है कि निकेतन में ज्यादातर संवासिनियां मनोरोगी हैं और उनके शोरगुल से वे परेशान रहती हैं। दून अस्पताल के वार्ड नंबर 17 में मैरीना (30), रेनू (21), हमसोली (45), प्रिया (25) और नीना (20) का इलाज चल रहा है।
विज्ञापन


पढ़ें, अब इंटरनेट वाउचर की तरह लीजिए टीवी वाउचर भी
विज्ञापन
विज्ञापन


डॉ. एसडी जोशी का कहना है कि इनमें दक्षिण भारतीय भी हैं, जिनसे दुभाषिये की मदद से बात की जा रही है। सीएमएस डॉ. आरएस असवाल ने बताया कि एक संवासिनी की हालत गंभीर है, उसे एनीमिया था और खून चढ़ाया जा रहा है।

अधिकारियों ने लापरवाही के सारे रिकॉर्ड तोड़े
संवासिनियों का कहना है कि नारी निकेतन में वे नारकीय जिंदगी जीती हैं। उधर, समाज कल्याण अधिकारियों ने लापरवाही के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

दो संवासिनियों की मौत और पांच के गंभीर होने के बावजूद अब तक कोई अफसर उनका हाल जानने नहीं पहुंचा हे। न ही नारी निकेतन की स्थिति देखी गई है। हालांकि डीएम बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने सीडीओ ज्योति नीरज खैरवाल को जांच का आदेश दे दिया है।


पढ़ें, उत्तराखंड में मोदी की 'दीवानी' हुई कांग्रेस

समाज कल्याण अधिकारी राम अवतार सिंह का कहना है कि वह प्रभारी जरूर हैं, लेकिन कार्यक्रम होने पर ही नारी निकेतन जाते हैं।

मनोरोगियों को क्यों नहीं भेजते अस्पताल
समाज कल्याण विभाग मनोरोगी संवासिनियों को नारी निकेतन में रखकर उनकी जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा है। निकेतन में उनका इलाज नहीं हो रहा, जबकि व्यवस्था भी खराब हो रही है।

जिला समाज कल्याण अधिकारी राम अवतार सिंह ने बताया कि 65 संवासिनियां मनोरोगी हैं। सिर्फ दो को सेलाकुई मेंटल हास्पिटल भेजा गया है। वहां स्टाफ कम होने और सिर्फ एक डॉक्टर होने के कारण अस्पताल और संवासिनियों को नहीं ले रहा।

पढ़ें, लोकसभा तक पहुंचने का 'जुगाड़' बने रामदेव

विशेषज्ञ कहते हैं कि प्रदेश में व्यवस्था न होने पर रोगियों को बरेली, आगरा या दिल्ली के मेंटल हॉस्पिटल भेजा जा सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed