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कैंट बोर्ड गढ़ी के बीमार अस्पताल को पीपीपी मोड़ का सहारा
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लंबे समय से कैंट बोर्ड गढ़ी के लिए सफेद हाथी साबित हो रहे जनरल अस्पताल को आखिरकार संचालक मिल ही गया। इस अस्पताल का संचालन अब प्राइवेट पार्टनरशिप मोड (पीपीपी) में किया जा रहा है। सरस्वती खन्ना मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर अब कैंट बोर्ड के साथ मिलकर अस्पताल का संचालन करेगा।
बता दें कि कैंट क्षेत्र की आम जनता के लिए कैंट बोर्ड की ओर से जनरल अस्पताल का संचालन किया जा रहा था। शुरुआती दौर में तो अस्पताल का संचालन ठीक से हुआ, लेकिन धीरे-धीरे हालत खस्ता होती गई। बजट का अभाव होने के कारण कैंट बोर्ड न तो दवा आदि की खरीद कर पा रहा था और न स्टॉफ रख पा रहा था। दवा और अन्य सुविधाएं न होने के कारण अस्पताल सफेद हाथी सिद्ध हो रहा था। वर्तमान में हालत यह थी कि अगर भूले-भटके कोई मरीज पहुंच भी जाता था तो वह उसे सर्दी-जुकाम तक की दवा नहीं मिल पा रही थी। अस्पताल के रखरखाव और कर्मचारियों के वेतन में कैंट बोर्ड का लाखों रुपये खर्च हो रहा था।
इसके बाद हाल ही में दस मार्च को अस्पताल को पीपीपी मोड में संचालित करने के प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगाई गई। बाकायदा तीन दिन पहले से पीपीपी मोड पर अस्पताल का संचालन शुरू भी हो गया है। अब आयुष्मान, ईसीएचएस, सीजीएचएस सहित अन्य कैशलेस स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ भी अस्पताल में मिलने लगेगा।
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कैंट बोर्ड की ओर से अस्पताल संचालन में काफी दिक्कत आ रही थी। कैंट बोर्ड के पास दवा खरीदने, वेतन देेने और मरम्मत के लिए बजट का अभाव था। लिहाजा अब अस्पताल को पीपीपी मोड पर संचालित किया जा रहा है ताकि आम लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
-शैलेंद्र शर्मा, कार्यालय अधीक्षक कैंट बोर्ड गढ़ी
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बता दें कि कैंट क्षेत्र की आम जनता के लिए कैंट बोर्ड की ओर से जनरल अस्पताल का संचालन किया जा रहा था। शुरुआती दौर में तो अस्पताल का संचालन ठीक से हुआ, लेकिन धीरे-धीरे हालत खस्ता होती गई। बजट का अभाव होने के कारण कैंट बोर्ड न तो दवा आदि की खरीद कर पा रहा था और न स्टॉफ रख पा रहा था। दवा और अन्य सुविधाएं न होने के कारण अस्पताल सफेद हाथी सिद्ध हो रहा था। वर्तमान में हालत यह थी कि अगर भूले-भटके कोई मरीज पहुंच भी जाता था तो वह उसे सर्दी-जुकाम तक की दवा नहीं मिल पा रही थी। अस्पताल के रखरखाव और कर्मचारियों के वेतन में कैंट बोर्ड का लाखों रुपये खर्च हो रहा था।
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इसके बाद हाल ही में दस मार्च को अस्पताल को पीपीपी मोड में संचालित करने के प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगाई गई। बाकायदा तीन दिन पहले से पीपीपी मोड पर अस्पताल का संचालन शुरू भी हो गया है। अब आयुष्मान, ईसीएचएस, सीजीएचएस सहित अन्य कैशलेस स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ भी अस्पताल में मिलने लगेगा।
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कैंट बोर्ड की ओर से अस्पताल संचालन में काफी दिक्कत आ रही थी। कैंट बोर्ड के पास दवा खरीदने, वेतन देेने और मरम्मत के लिए बजट का अभाव था। लिहाजा अब अस्पताल को पीपीपी मोड पर संचालित किया जा रहा है ताकि आम लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
-शैलेंद्र शर्मा, कार्यालय अधीक्षक कैंट बोर्ड गढ़ी