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डेपुटेशन के नाम पर अफसरों ने किया करोड़ों का खेल
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 27 Apr 2014 01:47 PM IST
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इंडियन काउंसिल फॉर फारेस्ट्री रिसर्च एंड एजूकेशन (आईसीएफआरई) में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ताजा रिपोर्ट ने फिर बड़ी वित्तीय अनियमितताएं पकड़ी हैं।
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मिलीभगत और लापरवाही से करोड़ों का खेल
यह रिपोर्ट शुक्रवार को केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजी गई है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि अफसरों की मिलीभगत और लापरवाही ने करोड़ों का खेल किया है।
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सिर्फ डेपुटेशन के नाम पर ही 86 लाख रुपए का नुकसान पहुंचाया गया है। सीएजी ने 51 पेज की दूसरी रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं की जमकर पोल खोली है।
सीएजी ने बताया है कि संस्थान में डेपुटेशन पर आए आईएफएस अधिकारियों को 86,05,717 की ओवर पे की गई है।
इनमें से 10,83,726 रुपए सुधांशु गुप्ता को जुलाई 2013 से मार्च 2014 तक, 11,14,868 रुपए पंकज अग्रवाल को जून 2013 से मार्च 2014 तक, 19,52,000 रुपए रेनू सिंह को नवंबर 2012 से मार्च 2014 तक, 23,52,042 रुपए एएस रावत को जून 2012 से मार्च 2014 तक, 9,66,048 रुपए एके आइमा को अगस्त 2013 से मार्च 2014 तक, 11,37,033 रुपए एसआर रेड्डी को जुलाई 2013 से मार्च 2014 तक दिए गए हैं।
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सीएजी ने लिखा है कि पांच वर्ष से अधिक तक आईसीएफआरई और इसके संस्थानों में रहने वाले इन सभी अधिकारियों से नियमानुसार रिकवरी की जानी चाहिए।
गड़बड़ियां ये भी
- वैज्ञानिक उपकरणों की 901 लाख रुपये में खरीदारी तो की गई, लेकिन इसके लिए कोई परचेजिंग आफिसर नहीं था
- वर्ष 2011 में 2500 रुपए प्रति पुस्तक की दर से 14.80 लाख रुपए की किताबें छपवाई गई, लेकिन मार्च 2014 तक इनमें से एक भी किताब बेची नहीं जा सकी, माना जा रहा है कि पब्लिकेशन हाउस के साथ मिलकर यह खेल किया गया है
- आईसीएफआरई को 2010-11 से 2012-13 के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, अपग्रेडेशन और रिसर्च एजुकेशन को मजबूत बनाने के लिए वन टाइम स्पेशल ग्रांट के तौर पर 100 करोड़ रुपए बजट केंद्र सरकार ने दिया था, लेकिन मार्च 2014 तक इसमें से केवल 33.02 करोड़ रुपए ही खर्च हो पाए हैं
- 31 मार्च 2013 तक आईसीएफआरई के नौ संस्थानों और चार केंद्रों से कुल 70.39 लाख रुपए की कमाई हुई, लेकिन मार्च 2014 तक इसमें से एक भी रुपया आईसीएफआरई के राजस्व में नहीं जोड़ा गया इससे इस पैसे के गुम होने का संदेह पैदा हो रहा है
- वर्ष 2010-11 से 2012-13 के बीच एक्सटर्नल एडेड प्रोजेक्ट के नाम पर आए 1.88 करोड़ रुपए मार्च 2014 तक आईसीएफआरई के रेवेन्यू में नहीं जोड़े गए, इस धन के भी गुम होने की आशंका है
- एएफआरआई जोधपुर में 69.33 लाख लागत वाले सात वैज्ञानिक उपकरण पांच-दस साल से धूल फांक रहे हैं, लेकिन इन्हें अनसर्विसेबल घोषित नहीं किया जा रहा
डेपुटेशन पूरा, फिर भी जमे
- डॉ. एन कृष्ण कुमार, आईएफएस, निदेशक आईएफजीटीबी कोयंबटूर, 6 अक्तूबर 2008 से
- डॉ. वीआरआर सिंह, आईएफएस, निदेशक एचएफआरआई शिमला, 28 मार्च 2007 से
- अरुण सिंह रावत, आईएफएस, हेड सिल्वीकल्चर डिवीजन, एफआरआई देहरादून, 17 मई 2007 से
- आरके आइमा, आईएफएस, हेड इंजीनियरिंग सेल, एफआरआई देहरादून, सात जुलाई 2008 से
- सुधांशु गुप्ता, आईएफएस, सचिव, आईसीएफआरई, 23 जून 2008 से
- डॉ. रेनू सिंह, आईएफएस, एडीजी ईएंडपीआर, आईसीएफआरई, पांच नवंबर 2007 से
- पंकज अग्रवाल, आईएफढस, एडीजी ईएम, आईसीएफआरई, 19 मई 2008 से
- एसआर रेड्डी, एसएफएस, डीसीएफ, एफआरआई, 19 जून 2008 से
- एके चट्टोपाध्याय, एसएफएस, डीसीएफ, टीएफआरआई जबलपुर, 9 अगस्त 2004 से
- एमआर बलोच, आईएफएस, सीएफ, एएफआरआई जोधपुर, 20 जून 2008 से
- डी चेल्लाचामी, एसएफएस, डीसीएफ, आईएफजीटीबी, कोयंबटूर, 22 जुलाई 2004 से
- जे मो. शुजाउद्दीन, एसएफएस, डीसीएफ, आईएफजीटीबी, कोयंबटूर, 12 जुलाई 2006 से
- गौतम बनर्जी, डीसीएफ आरएफआरआई जोराहाट, नौ जनवरी 2008 से
- विप्लव कुमार मिश्रा, डीसीएफ, आईएफपी रांची, पांच दिसंबर 2007 से