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बसपा अपने पांव मार रही कुल्हाड़ी, कांग्रेस के मजे
अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Mon, 21 Apr 2014 11:22 PM IST
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अपने कुनबे को संभाल न पाने का नुकसान अब हरिद्वार में बसपा को उठाना पड़ सकता है। पार्टी के नेता बसपा से अलग हुए धड़े के नेताओं को आधारहीन बता कर फिलहाल संतुष्ट हो रहे हैं।
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दूसरी ओर, हकीकत यह भी है कि बसपा की दूसरी पांत के नेताओं के कांग्रेस की ओर रुख करने से पार्टी को नुकसान की पूरी आशंका बन रही है।
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बसपाइयों का दावा रहा है कि नेताओं के इधर-उधर हो जाने से बसपा के आधार को कोई फर्क नहीं पड़ता। कारण यह कि बसपा अपने वोट को कैडर बेस मानती है। पर वोट बेस से इधर पार्टी की भी अपनी डायनामिक्स है।
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हरिद्वार है सबसे मजबूत आधार
प्रदेश में बसपा का सबसे मजबूत आधार हरिद्वार में है। बसपा की सोशल इंजीनियरिंग की तूती भी यहीं बोलती है, पर पिछले कुछ सालों से बसपा के टिकट पर जीतकर सत्ता के गलियारों में पहुंच रहे जनप्रतिनिधि किसी न किसी कारण से बसपा से देर सवेर अलग भी हो जा रहे हैं।
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इस बार भी ठीक चुनाव से पहले कैबिनेट मंत्री सुरेंद्र राकेश और बसपा विधायक दल के नेता हरिदास को पार्टी से निलंबित कर दिया गया।
पार्टी पर पड़ रहा असर
बसपा के प्रदेश अध्यक्ष मेघराज जरावरे का कहना है कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। पर खुद कई बसपाई यह मान रहे हैं कि बसपा के वोट बेस को भले ही कोई फर्क न पड़े पर पार्टी को तो फर्क पड़ ही रहा है। ऐन चुनाव के समय पार्टी को ज्यादा से ज्यादा ऐसे लोगों की दरकार भी है जो अलग-अलग स्थानों पर मोर्चा ले सके।
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विशलेष्क इसका एक कारण मुस्लिम और दलित मतों के ध्रुवीकरण करने की राजनीतिक दलों की कोशिश को भी मान रहे हैं। मुस्लिम और दलित मतों पर कांग्रेस की भी निगाह है। लिहाजा बसपा में सेंधमारी करना कांग्रेस की मजबूरी बन रही है। दूसरी ओर बसपा की अंदरूनी कलह कांग्रेस के लिए यह काम आसान कर रही है।