सरकारी अस्पताल का हाल: ‘सफेद कोट’ में चल रहा दलाली का खेल, इमरजेंसी को बनाया अड्डा
- निजी नर्सिंग होम के दलालों ने दून अस्पताल की इमरजेंसी को बनाया अड्डा
- मरीजों को बरगलाकर ले जाते हैं निजी अस्पतालों में
विस्तार
अगर आपको उत्तराखंड के दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल की इमरजेंसी में या उसके बाहर डॉक्टर या स्टाफ का सफेद कोट पहनें कोई शख्स मिलें और वह आपको या मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए बरगलाएं तो उन पर आंख बंद कर भरोसा न करें।
ऐसा इसलिए क्योंकि दून अस्पताल की इमरजेंसी और उसके आसपास मरीजों को बरगलाकर निजी अस्पतालों में ले जाने वाला गैंग सक्रिय है। जो मरीज को निजी अस्पताल ले जाते हैं। जहां अस्पताल संचालक मनमाने तरीके से जांच कराकर उनसे अत्यधिक शुल्क वसूलते हैं।
सूत्रों ने बताया कि दून अस्पताल की इमरजेंसी और उसके बाहर खासकर रात आठ बजे बाद कुछ संदिग्ध किस्म के लोग मंडराते नजर आते हैं। इनमें कई डॉक्टर या अन्य स्टाफ की एप्रिन और बाकायदा गले में स्टेथोस्कोप लटकाए रहते हैं। जैसे ही बाहर से कोई गंभीर मरीज आया, यह गैंग सक्रिय हो जाता है।
मरीजों और तीमारदारों को बताया जाता है कि दून अस्पताल में यहां पर डॉक्टरों और स्टाफ की कमी है और विभिन्न जांचों से संबंधित मशीनें या तो खराब पड़ी हैं या फिर यहां ये जांचों की सुविधा है ही नहीं। उसके बाद तीमारदारों को बरगलाकर वे निजी अस्पताल ले जाते हैं और अनापशनाप जांचें कराकर मनमाना शुल्क वसूलते हैं।
एक हफ्ते में सामने आए तीन मामले
दून अस्पताल से मरीजों को निजी अस्पताल ले जाने के पिछले एक हफ्ते के भीतर तीन मामले अस्पताल प्रशासन के सामने आ चुके हैं। ये संख्या उन मरीजों की है, जिन्होंने बाकायदा लिखित शिकायत अस्पताल प्रशासन से की है।
एक मरीज को तो परिजनों की शिकायत पर दून अस्पताल के डिप्टी एमएस डॉ. एनएस खत्री ने एक सामाजिक संस्था के सहयोग से निजी अस्पताल से लाकर दून अस्पताल में भर्ती कराया। निजी अस्पताल प्रबंधन के विरोध पर वहां पुलिस तक बुलानी पड़ी। सूत्रों के अनुसार, इसमें कुछ एंबुलेंस वालों की भी निजी अस्पतालों और दलालों से सांठगांठ है।
दून अस्पताल की दूसरी ब्रांच का भी देते हैं झांसा
वहां पर उनके मरीज की स्थिति गंभीर बताते हुए आईसीयूू मेें रखने की बात कही। 24 घंटे के आठ हजार रुपए ले लिए। दवाओं का खर्च सो अलग। परिजनों ने आपत्ति जताते हुए मरीज को दून अस्पताल ले जाने की बात कही तो निजी अस्पताल वाले मरीज को खतरा बताते हुए डराने लगे। दून अस्पताल प्रशासन तक जब यह शिकायत पहुंची कि उनके अस्पताल से मरीज को बरगलाकर जबरन वहां से ले जाया गया है, तो दून अस्पताल प्रशासन सतर्क हुआ। बाकायदा पुलिस की मौजूदगी में मरीज को दून अस्पताल लाया गया।
दलालों को चिह्नित कर पुलिस के सुपुर्द करेंगे
शिकायत मिलने पर राजकीय दून मेडिकल अस्पताल के प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष सयाना ने अस्पताल के एमएस डॉ. केके टम्टा, डिप्टी एमएस डॉ. एनएस खत्री, डॉ. केसी पंत, डॉ. अभय, डॉ सादिक और सीनियर फार्मासिस्ट सुधा कुकरेती आदि के साथ अस्पताल के कांफ्रेंस हॉल में मीटिंग की।
उन्होंने इमरजेंसी कक्ष की व्यवस्थाओं को सुधारने और दलालों पर अंकुश लगाने की बात कही। प्रिंसिपल ने बताया कि मरीजों को दून अस्पताल से बरगलाकर और जबरन निजी अस्पताल ले जाने वालेे दलालों को चिह्नित किया जा रहा है। उन्हें पकड़कर पुलिस के हवाले किया जाएगा।