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Dehradun News: एसटीएफ के रिश्वतखोर पूर्व सिपाही को पांच साल की कैद
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10 हजार रुपये की रिश्वत के साथ पकड़े गए एसटीएफ के पूर्व सिपाही को न्यायालय ने पांच साल कठोर कारावास की सजा सुनाई है। स्पेशल जज अंजलि नौनियाल की कोर्ट ने दोषी पर 70 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। दोषी को न्यायालय परिसर से हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया है।
विजिलेंस सेक्टर देहरादून की एसपी रेणू लोहानी ने बताया, इस संबंध में हरिद्वार के गायत्री विहार निवासी वरुण अग्रवाल ने एक मार्च 2008 को विजिलेंस से शिकायत की थी। अग्रवाल ने बताया था कि वह ट्रैक्टर ट्राली से रेत बजरी और सीमेंट आदि ढुलाई का काम करता है। कई दिनों से उन्हें एसटीएफ देहरादून में तैनात कांस्टेबल नागेश पाल परेशान कर रहा था। नागेश पाल ने अग्रवाल से 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। रिश्वत न देने पर उसके सीमेंट को मिलावटी बताकर उसे बदनाम करने की धमकी दे रहा था। जिसके बाद अग्रवाल उसे 10 हजार रुपये रिश्वत देने के लिए हामी भर दी साथ ही विजिलेंस को इसकी शिकायत कर दी।
प्राथमिक जांच के बाद विजिलेंस ने सिपाही नागेश पाल को ट्रैप करने की योजना बनाई। जिसके बाद चार मार्च 2008 को नागेश को 10 हजार रुपये की रिश्वत के साथ रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया गया। इसकी विवेचना इंस्पेक्टर जगदीश सिंह असवाल ने की और 16 दिसंबर 2008 को न्यायलय में चार्जशीट दाखिल की। अभियोजन की ओर से अनुज साहनी ने बहस की। जबकि, पैरवी कांस्टेबल गोपाल ने की। साक्ष्यों के आधार पर विशेष न्यायाधीश अंजलि नौनियाल ने दोषी नागेश पाल को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा सात में तीन साल कठोर कारावास और धारा 13(1) डी में पांच साल कठोर कारावास की सजा सुनाई। दोनों धाराओं में उस पर 70 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
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विजिलेंस सेक्टर देहरादून की एसपी रेणू लोहानी ने बताया, इस संबंध में हरिद्वार के गायत्री विहार निवासी वरुण अग्रवाल ने एक मार्च 2008 को विजिलेंस से शिकायत की थी। अग्रवाल ने बताया था कि वह ट्रैक्टर ट्राली से रेत बजरी और सीमेंट आदि ढुलाई का काम करता है। कई दिनों से उन्हें एसटीएफ देहरादून में तैनात कांस्टेबल नागेश पाल परेशान कर रहा था। नागेश पाल ने अग्रवाल से 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। रिश्वत न देने पर उसके सीमेंट को मिलावटी बताकर उसे बदनाम करने की धमकी दे रहा था। जिसके बाद अग्रवाल उसे 10 हजार रुपये रिश्वत देने के लिए हामी भर दी साथ ही विजिलेंस को इसकी शिकायत कर दी।
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प्राथमिक जांच के बाद विजिलेंस ने सिपाही नागेश पाल को ट्रैप करने की योजना बनाई। जिसके बाद चार मार्च 2008 को नागेश को 10 हजार रुपये की रिश्वत के साथ रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया गया। इसकी विवेचना इंस्पेक्टर जगदीश सिंह असवाल ने की और 16 दिसंबर 2008 को न्यायलय में चार्जशीट दाखिल की। अभियोजन की ओर से अनुज साहनी ने बहस की। जबकि, पैरवी कांस्टेबल गोपाल ने की। साक्ष्यों के आधार पर विशेष न्यायाधीश अंजलि नौनियाल ने दोषी नागेश पाल को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा सात में तीन साल कठोर कारावास और धारा 13(1) डी में पांच साल कठोर कारावास की सजा सुनाई। दोनों धाराओं में उस पर 70 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
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