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बद्री गायों की नस्ल सुधारेगा पशु प्रजनन एवं अनुसंधान केंद्र

Thu, 07 Jun 2018 01:28 PM IST
सतीश जोशी ‘सत्तू’, अमर उजाला, चंपावत
सतीश जोशी ‘सत्तू’, अमर उजाला, चंपावत Updated Thu, 07 Jun 2018 01:28 PM IST
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Breeding of Badri Cows will improve in research center
badri cow

जिले के नरियाल गांव में स्थित पशु प्रजनन एवं अनुसंधान केंद्र में स्थानीय नस्ल की गायों (बद्री गाय) की नस्ल (ब्रीड) सुधारने का अनुसंधान कार्य जारी है।

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वर्तमान में अनुसंधान केंद्र में 120 बद्री गायों पर अनुसंधान चल रहा है, जबकि केंद्र की ओर से आसपास की 30 ग्राम पंचायतों में 142 बद्री गायों को चयनित किया गया है। हर गाय के बारे में पूरा विवरण जीओ टैगिंग के माध्यम से ऑनलाइन किया गया है। इन चयनित गायों के दुग्ध उत्पादन पर एक साल तक नजर रखी जाएगी। उसके बाद इन गायों को क्रय कर अनुसंधान के लिए केंद्र में लाया जाएगा।
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पशु प्रजनन एवं अनुसंधान केंद्र के परियोजना निदेशक डॉ.एचसी जोशी ने बताया कि वर्तमान में 120 बद्री गायों में शोध चल रहा है। इसके अलावा पूर्व में अश्व प्रजनन केंद्र के लिए बनाए गए शेडों को परिवर्तित कर 150 बद्री गायों के शेड में तब्दील किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आसपास के गांवों में चयनित बद्री गायों के दूध का मापन मिल्क रिकार्डर के जरिए किया जा रहा है।
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उनका कहना है कि केंद्र का उद्देश्य अध्ययन के बाद बद्री गायों की नई ब्रीड विकसित करना है। ताकि गरीब और मध्यम वर्ग के पशुपालकों की आर्थिकी बेहतर हो सके। विशेषकर उन बद्री गायों के संरक्षण को विशेष तवज्जो दी जा रही है जिनके दूध में ए-2 प्रोटीन पाया जाता है। जो मनुष्य के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के साथ ही कैंसर की संभावनाओं को खत्म करता है। 

चारा वृक्षों की नर्सरी भी हो रही है विकसित
पशु प्रजनन एवं अनुसंधान केंद्र में बद्री गायों की नस्ल सुधारने के अनुसंधान के साथ ही मनरेगा के तहत चारा वृक्षों की नर्सरी भी विकसित की जा रही है। परियोजना निदेशक डॉ.एचसी जोशी का कहना है कि स्थानीय गायों के जैविक दूध उत्पादन के लिए चारा वृक्षों की नर्सरी तैयार की जा रही है। जिन्हें तैयार होने के बाद पशुपालकों को वितरित किया जाएगा।

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